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क्या हैं गुरू के चंद्रमा से आए ये FM Radio संकेत जो पकड़े हैं नासा के यान ने

नासा (NASA) के जूनो (Juno) यान ने गुरू के चंद्रमा गैनीमीड (Ganymede) से पहली बार ये संकेत पकड़े हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
नासा (NASA) के जूनो (Juno) यान ने गुरू के चंद्रमा गैनीमीड (Ganymede) से पहली बार ये संकेत पकड़े हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

गुरू ग्रह (Jupiter) के सबसे बड़े चंद्रमा गैनीमीड (Ganymede) से पहली बार एफएम रेडियो (FM Radio) संकेतों को नासा (NASA) के यान जूनो (Juno) ने पकड़ा है जिनके बारे में पता चला है कि वे किसी एलियन से नहीं आए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 8:15 PM IST
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जब भी एफएम संकेतों (FM Signals) की बात होती है तो हमें उस रेडियो चैनल (Radio Channels) की याद आती है जिसके हम खबरें गाने आदि कार्यक्रम सुना करते हैं. लेकिन इस बार एफएम रेडियो संकेत आसपास के किसी रेडियो स्टेशन से नहीं बल्कि गुरू ग्रह (Jupiter) के चंद्रमा गैनीमीड (Ganymede) से आते दिखे हैं. और ये संकेत पृथ्वी (Earth) तक नहीं आए हैं बल्कि इन्हें पकड़ा है नासा का अंतरिक्ष यान जूनो ने. वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब भी पता कर लिया है कि क्या ये संकेत किसी एलियान (Aliens) या फिर बुद्धिमान जीवन से आए हैं?

केवल इंसानी गतिविधि से ही नहीं पैदा होते ये संकेत
दरअसल रेडियो संकेतों खास तौर से एफएम रेडियो के बारे में यही धारणा है कि वे इंसान ही पैदा कर सकते हैं. यही वजह है जब इस तरह की बात चली कि गुरू के चंद्रमा से ऐसे संकेत आ रहे हैं तो पहला सवाल वैज्ञानिकों को जहन में यही आया कि इसका स्रोत कहां है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि ये संकेत किसी संचार उपकरण से नहीं आया है बल्कि एक निर्जीव अंतरिक्ष प्रक्रिया से आया है.

पहली बार आए गैनीमीड से ऐसे संकेत
एफएम रेडियो संकेत नासा के जूनो अंतरिक्ष यान ने पकड़े हैं जो गुरू ग्रह का चक्कर लगा रहा था. तब उसने गुरू के 79 चंद्रमाओं में से एक गैनीमीड से आते हुए इन संकतों को पकड़ा. खास बात यह है कि इससे पहले इस तरह के संकेत गैनीमीड से पहले कभी नहीं पकड़े गए. ना ही कभी इस तरह की गतिविधि कभी पकड़ी गई जिससे ऐसे संकेत लग रहे हैं.



प्राकृतिक लेकिन निर्जीव संकेत
उटाह से नासा के राजदूत पैट्रिक विगिन्स ने मीडिया को जानकारी दी है कि ये एक प्राकृतिक लेकिन निर्जीव प्रक्रिया से पैदा होने वाले संकेत हैं. ये संकेत ज्यादातर इलेक्ट्रोन से पैदा हुए हैं. वैसे तो बाह्यजीवन से आने वाले रेडियो संकेत बहुत रोमांच पैदा करते हैं, लेकिन यह के प्राकृतिक प्रक्रिया से आए हैं जहां संभवतः जीवन नहीं है.

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गुरू ग्रह (Jupiter) के कुल 79 चंद्रमा हैं जिसमें से गैनीमीड (Ganymede) सबसे बड़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


क्या है वह प्रक्रिया
इस प्रक्रिया को साइक्लोट्रॉन मैसर इनस्टेब्लिटी कहा जाता है. यह केवल विद्युतचुंबकीय क्षेत्रों में ही हो सकती है. इस प्रक्रिया से इलेक्ट्रॉन अपने घूमने की गति से धीमी गति से आगे पीछे होते हैं.  इसकी वजह से आसपास की सभी  विद्युतचुंबकीय रेडियो तरंगें विस्तृत (Amplify) हो जाती हैं. इसी बढ़ी हुई आवृति को अंतरिक्ष यान जूनो ने पकड़ा है.

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जूनो की खास स्थिति भी
जूना गुरूग्रह के उस इलाके में घूम रहा था जहां गुरू की मैग्नेटीक फील्ड की रेखाएं गैनीमीड से जुड़ती हैं. यही वह क्षेत्र है जहां पर से इन संकेतों को अच्छी तरह से पकड़ा जा सकता है. कुछ इलेक्ट्रोन जो इन रेडियो संकेतों की वजह बने हैं सुदूर अल्ट्रावॉयलेट स्पैक्ट्रम में अरोर बनाने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. इसी तरह की एक घटना को जूनो अपने कैमरों में कैद कर चुका है.

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नासा (NASA) के जूनो (Juno) यान सौरमंडल का अध्ययन करने लिए भेजा गया है. (तस्वीर: NASA)


क्यों भेजा गया था जूनो
सा ने साल 2011 में जूनो नाम का अंतरिक्ष यान न्यू फ्रंटियर्स प्रोग्राम के तहत भेजा था. इस कार्यक्रम के तरह जूनो को बहुत सारे अभियान एक के बाद एक पूरे करने थे. इसका प्रमुख लक्ष्य पूरे सौरमंडल का अन्वेषण कर हमारी अंतरिक्ष की समझ को विकसित करना था.

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इस यान को गुरू ग्रह की ओर उसके अध्ययन के लिए भेजा गया था जिसमें गुरू ग्रह की निर्माण और उसके विकास के बारे में जानकारी हासिल की जा सके. जूनो गुरू ग्रह की कक्षा में साल 2016 को गया था. जूनो गुरू ग्रह का गुरुत्व, उसके मैग्नेटिक  फील्ड, उसके वायुमंडल का अध्ययन कर रहा है.
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