हबल स्पेस टेलीस्कोप ने फिर से शुरू किया काम, देखिए उसकी भेजी पहली तस्वीर

हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) ने करीब 35 दिन के बाद काम करना शुरू कर दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

NASA और ESA के हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Telescope) ने सुधरने के बाद से फिर से अपना काम शुरू कर तस्वीरें भेजने भी शुरू कर दी हैं.

  • Share this:
    नासा (NASA) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) का हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से बंद पड़ा था. पिछले महीने की 13 तारीख को इसने काम करना बंद किया था और उसके बाद इस महीने की 13 तारीख को वैज्ञानिक इसकी गड़बड़ी के बारे में पता लगा सके. अब नासा ने घोषणा कर दी है कि हबल टेलीस्कोप सामान्य रूप से काम करने लगा है. दुनिया के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप के पेलोड कम्प्यूटर में गड़बड़ी आ गई थी जिसकी वह से पूरे टेलीस्कोप ने काम करने बंद कर दिया था.

    क्या हुआ था हबल को
    नासा के वैज्ञानिकों ने करीब एक महीने की मशक्कत के बाद इस समस्या का पता लगाया और एक सप्ताह के भीतर इसे ठीक कर हबल को शुरू कर दिया. 13 जून को जैसे ही कम्प्यूटर रुका उपकरण सेफ कॉन्फीगरेशन यानि सुरक्षित विन्यास में चले गेए और वैज्ञानिक आंकड़ों का जमा होना बंद हो गया था.

    पॉवर सप्लाई की समस्या
    हबल के बंद होते ही हबल टीम पेलोड कम्प्यूटर की समस्या के कारण को खोजने में लगी थी. टीम ने पाया कि समस्या पेलोड कम्प्यूटर के पॉवर कंट्रोल यूनिट में हैं जो पेलोड कम्प्यूटर के हार्डवेयर को नियमित और तयशुदा पॉवर सप्लाई सुनिश्चित करता है. लेकिन 15 जुलाई को नासा की टीम हबल टेलीस्कोप सिस्टम को वहां पर मौजूद बैकहार्डवेयर पर ले गए  जिसमें बैकअप पेलोट कम्प्यूटर को ऊर्जा देना भी शामिल था.

    नासा ने की घोषणा
    नासा ने इसके बाद शनिवार को घोषणा कर बताया कि हबल ने वैज्ञानिक आंकड़े हासिल करना शुरू कर दिया है. नासा ने अपने ट्वीट में कहा कि हबल स्पेस टेलीस्कोप के सभी क्रियाशील स्थिति में आ गए हैं और वैज्ञानिक आंकड़े अब जमा किए जाने लगे हैं जिससे हमें ब्रह्माण्ड को और समझ सकेंगे.

    Space, NASA, ESA, Hubble, Hubble Space Telescope, HST, Computer Problem, Payload computer, CPU Problem, Payload computer Glitch
    नासा ने 17 जुलाई को हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) के ठीक होने की घोषणा की. (NASA Tweet)












    क्या थी असल समस्या
    पेलोड कम्प्यूटर और उसकी पॉवर कंट्रोल यूनिट या पीसीयू साइंस इंस्ट्रमेंट कमांड एंड डेटा हैंडलिंग (SI C&DH) यूनिट में रहता है. पीसीयू का पॉवर नियामक या रेग्युलेटर लगातार पेलोड कम्प्यूटर और उसकी मेमोरी को 5 वोल्ट की आपूर्ति कराता है. नहीं एक द्वितीयक सुरक्षा सर्किट (SSC) शक्ति नियामक से निकलने वाले वोल्टेज स्तरों को सेंस करता रहता है. वोल्टेज कम या ज्यादा होने पर यह सर्किट पेलोड कम्प्यूटर को बताता है कि उसे काम करना बंद करना चाहिए. टीम को पता चला कि या तो तो रेग्युलेटर से बार निकलने वाले वोल्टेज स्वीकार्य स्तरों से कम या ज्यादा हो गया था जिससे द्वितीयक सुरक्षा सर्किट ट्रिप हो गया था. या फिर यह सर्किट समय के साथ खराब हो गया था जिससे यह ऐसी स्थिति बन गई.

    क्यों अहम है 1500 प्रकाशवर्ष दूर दो तारों का सिस्टम जो बनाने वाला है सुपरनोवा

    कई सालों तक काम करता रहेगा
    नासा का अनुमान है कि हबल कई और  सालों तक काम कर सकेगा और वह नई नई खोजें करता रहेगा. वह इस साल लॉन्च होने वाले जेम्स स्पेस टेलीस्कोप सहित दूसरी अंतरिक्ष वेधशालाओं के साथ मिलकर काम करते हुए वह ब्रह्माण्ड के बारे में और जानकारी देता रहेगा.

    Space, NASA, ESA, Hubble, Hubble Space Telescope, HST, Computer Problem, Payload computer, CPU Problem, Payload computer Glitch
    ठीक होने के बाद हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) की पहली तस्वीर. (NASA Tweet)


    क्या कहा नासा के प्रशासक ने
    नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा कि हबल एक आइकन है जो पिछले तीन दशकों से हमें ब्रह्माण्ड के बारे में अद्वितीय जानकारियां दे रहा है. उन्होंने कहा कि उन्हें हबल टीम पर गर्व है जिसमें वर्तमान और पुराने सभी सदस्यों ने अपनी विशेषज्ञता के साथ सहयोग किया. नेल्सन ने टीम के समर्पण के लिए  धन्यवाद देते  हुए का हबल अपनी 31 साल की परम्परा को लगातार जारी रखेगा और हमारी ब्रह्माण्ड की जानकारी को विस्तार देता रहेगा.

    पास की गैलेक्सी में तारे बनने वाली जगहों पर क्यों ध्यान दे रहे हैं खगोलविद

    1990 में प्रक्षेपित करने के बाद से हबल 31 सालों से ब्रह्माण्ड का अवलोकन कर रहा है.  अब तक हबल ने 15 लाख अवलोकन किए हैं और इसके आंकड़ों का उपयोग कर करीब 18 हजार वैज्ञानिक शोधपत्रों में हो चुका है. इसमें ब्रह्माण्ड का विस्तार के त्वरण, गैलेक्सी की उत्पत्ति और विकास, बाह्यग्रहों के वायुमंडलीय अध्ययन शामिल हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.