शुक्र के पास से गुजरा NASA ESA का सोलर ऑर्बिटर, जानिए कितनी खास है ये घटना

कृत्रिम सौर उपग्रह  (Solar Orbiter) का शुक्र ग्रह (Venus) के पास से गुजरना महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. (तस्वीर: ESA)

कृत्रिम सौर उपग्रह (Solar Orbiter) का शुक्र ग्रह (Venus) के पास से गुजरना महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. (तस्वीर: ESA)

सूर्य (Sun) के लिए भेजा गया नासा (NASA) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) का कृत्रिम सौर उपग्रह (Solar Orbiter) हाल ही में अपने सफर के दौरान शुक्र ग्रह (Venus) के पास से गुजरा था. इस दौरान उसने कुछ अहम आंकड़े भी जमा किए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2021, 3:37 PM IST
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पिछले साल ही यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और नासा (NASA) ने मिलकर एक सूर्य (Sun) के लिए एक ऑर्बिटर (Orbiter) का प्रक्षेपण किया था. फिलहाल यह ऑर्बिटर सूर्य की ओर जा रहा है और हाल ही में यह शुक्र ग्रह (Venus) के पास आया था और इस मौके पर इसका संचालन करने वालों ने इसके उपकरणों का रुख शुक्र ग्रह की ओर मोड़ दिया था. इससे मिलने वाले आंकड़े शुक्र ग्रह के बारे काफी अहम जानकारी देंगे.

काफी समय बाद पहुंचा कोई उपग्रह इतने नजदीक

सोलर ऑर्बिटर ने पिछले महीने की 27 तारीख को शुक्र ग्रह के सबसे नजदीक पहुंचने का मुकाम हासिल किया था. इस मौके पर यह शुक्र के बादलों के शीर्ष से 75,00 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गया था. इस लिहाज से काफी समय बाद कोई उपग्रह शुक्र के इतने ज्यादा नजदीक पहुंच सका था. इतनी दूरी और इस कोण से शुक्र ग्रह के बारे में दुर्लभ जानकारी मिलने की उम्मीद की जा रही है.

आंकड़े जमा किए जाएंगे शुक्र के
इस मौके पर प्रेस से बात करते हुए यूरोपीय स्पेस एजेंसी के इस मिशन के प्रजोक्ट साइंटिस्ट डेनियल मुलर ने बताया कि वैसे तो सोलर ऑर्बिटर अभियान शुक्र ग्रह का अवलोकन करने के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन चूंकि विज्ञान में हमेशा ही अतिरिक्त अवसरों को भुनाने का प्रयास किया जाता है, यह तय किया गया कि सोलर ऑर्बिटर शुक्र ग्रह के पास से गुजरने के दौरान वहां का अवलोकन कर भी आंकड़े जमा करेगा.

यह अहम जानकारी जुटाने का प्रयास

शुक्र के पास से गुजरने के दौरान वैज्ञानिक सोलर ऑर्बिटर के मैग्नेटोमीटर, रेडियो और प्लाज्मा वेव उपकरणों, और कुछ सेंसर के जरिए बहुत सारे अहम आंकड़े जमा कर सकेंगे. इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिकविद और सोलर ऑर्बिटर के उपकरणों में से एक प्रमुख अन्वेषणकर्ता  टिम हॉर्बरी ने बताया कि जिस दूरी पर ऑर्बिटर पहुंच सका है वहां से वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करेंगे कि शुक्र सौर पवनों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है.



नतीजे आने में लगेगा समयचूंकि पिछले सप्ताह की फ्लायबाय सोलर ऑर्बिटर का शुक्र के साथ पहला वास्ता था, टीम यह सुनिश्चित करने की स्थिति में नहीं थी कि ऐसे में क्या अपेक्षा की जाए. इस स्थिति में यह जानने में समय लगेगा कि उपकरणों से मिले आकंड़े क्या बता सकते हैं क्योंकि आंकड़ों के अध्ययन में ही कुछ समय लग जाएगा.जानिए साल 2021 में विज्ञान की दुनिया में क्या होगा सबसे खासशुक्र का महत्वकिसी दूसरे उद्देश्य के लिए जाने वाले किसी ऑर्बिटर का किसी ग्रह से गुजरना बहुत ज्यादा जानकारी देने की उम्मीद नहीं जगाता है, लेकिन शुक्र ग्रह के मामले में बात कुछ और ही है. पिछले साल ही शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन की मौजूदगी ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में तलहका मचा दिया गया था. उस समय माना जा रहा था कि शुक्र ग्रह के वायुमंडल में फॉस्फीन की मौजूदगी वहां पर जीवन के संकेत हैं.

इतनी अहमियत क्यों

फॉस्फीन की खोज से लोगों में शुक्र ग्रह पर जीवन की मौजूदगी को लेकर बहुत उम्मीदें पैदा होने लगी थी, क्योंकि पृथ्वी पर फॉस्फीन केवल बैक्टीरिया ही बना पाते हैं और यह यहां की रासायनिक प्रक्रियाओं की वजह से नहीं बनता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि फॉस्फीन और भी कारणों से बन सकता है, फिलहाल इस मामले में स्पष्टीकरण करने की स्थिति में हमारे में वैज्ञानिक नहीं हैं.

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सोलर ऑर्बिटर का प्रमुख उद्देश सूर्य के पास जाकर उसका अध्ययन करना है जिसमें उसके अंदरूनी हेलियोस्कोप का अध्ययन अहम है. यह  सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी के एक तिहाई दूरी से ज्यादा करीब नहीं जाएगा. यहां पर भी उसे पृथ्वी पर आने वाले सौर विकिरणों से 13 गुना विकिरणों का सामना करना पड़ेगा. यह अगले साल के अंत तक अपना काम शुरू कर सकेगा.
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