पहली बार मरते हुए तारे का चक्कर लगाता ग्रह खोजा नासा ने

नासा (NASA) के बाह्यग्रह (Exoplanet) का तारा खत्म होकर सफेद ड्वार्फ (White Dwarf) बन चुका है. (तस्वीर- @NASAExoplanets  )
नासा (NASA) के बाह्यग्रह (Exoplanet) का तारा खत्म होकर सफेद ड्वार्फ (White Dwarf) बन चुका है. (तस्वीर- @NASAExoplanets )

नासा (NASA) के आंकड़ों से पता चला है कि एक बाह्यग्रह (Exoplanet) अपने सूर्य के सफेद ड्वार्फ (White Dwarf) बन जाने के बाद भी उसका चक्कर लगा रहा है जो कि आमतौर पर नामुमकिन है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 6:42 AM IST
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ब्रह्माण्ड(Universe) में बहुत अजीब तरह  की घटनाएं भी खगोलविदों (Astronomers) को कई बार चौंका देती है. आम धारणा है कि किसी सौरमंडल (Solar System) के ग्रह अपने तारे (Star) के खत्म होने से पहले खत्म हो जाते हैं या तारा ही उन्हें पहले खत्म कर देता है. लेकिन नासा ने पहली बार ऐसा बाह्यग्रह (Exoplanet) देखा है जो अपने मरते हुए तारे का चक्कर लगा रहा है.

कैसा दिखा यह ग्रह
यह बाह्यग्रह अपने सफेद ड्वार्फ तारे का चक्कर बहुत पास से लगा रहा है. जो कि हमारे सूर्य जैसे तारे के घने अवशेष  रह गया है और पृथ्वी से केवल 40 प्रतिशत ही बड़ा है. नासा के ट्रांजिट एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) और उसके रिटायर हो चुके स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप के नए आंकड़ों से पता चला है कि 'WD 1856 b नाम का ग्रह पूरी तरह से सही सलामत है और अपने तारे की नजदीकी कक्षा में उसका चक्कर लगा रहा है.

उम्मीद नहीं थी कि यहां मिलेगा ग्रह
पहले वैज्ञानिकों को लग रहा था कि ऐसा खोज बेकार जाएगी क्योंकि सफेद ड्वार्फ के बनने के बाद यही उम्मीद रहती है कि उसके काफी नजदीक आने पर वह ग्रह खत्म हो कर देता है. नासा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “'WD 1856 b गुरू ग्रह के आकार का बाह्यग्रह है और इसके साथ ही WD 1856+534. नाम के सफेद ड्वार्फ से सात गुना बड़ा है जिसका वह चक्कर लगा रहा है. यह ग्रह अपने सूर्य की 34 घंटे में परिक्रमा पूरी कर लेता है.  यह गति हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह से 60 गुना ज्यादा है.”



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सफेद ड्वार्फ (White Dwarf) बनने के बाद तारे (Star) की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (Gravitation) बहुत बढ़ जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पास आकर कैसे बचा रह गया
विस्कॉन्सिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी के एसिस्टेंट प्रोफेसर एंड्रयू वैनडरबर्ग का कहना है, “WD 1856 b किसी तरह से अपने सफेद ड्वार्फ के बहुत पास आ गया और फिर साबुत बचने रहने में कामयाब रहा. जब भी सफेद ड्वार्फ बनता है तो उस प्रक्रिया में वह अपने आसपास के ग्रहों को नष्ट कर देता है. वह अपनी अत्याधिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति से उस ग्रह के टुकड़े टुकड़े कर देता है.“

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यह होती है प्रक्रिया
वेंडरबर्ग का मानना है कि उनके पास अब भी बहुत सारे सवाल हैं जैसे WD 1856 b अपनी वर्तमान स्थिति में कैसे आया और फिर भी उसका यह हश्र क्यों नहीं हुआ जैसा कि होना चाहिए. नासा के मुताबिक जब सूर्य जैसे तारे का ईंधन खत्म हो जाता है तो वह अपना आकार हजार गुना कर लेता है और ठंडा लाल रंग का हो जाता है. इसके बाद अंतरिक्ष में उससे गैस निकलती है जिससे वह सिकुड़ना शुरू हो जाता है और उसका 80 प्रतिशत भार कम हो जाता है और बचे हुए अवेशष ही सफेद ड्वार्फ के रूप में रह जाते हैं.

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यह बाह्यग्रह (Exoplanet) गुरू ग्रह (Jupiter) के जितना बड़ा है. (तस्वीर: Pixabay)


तो फिर क्या हुआ होगा
इस पूरी प्रक्रिया में उसके पास की जो भी चीजें होती हैं वह उन्हें निगल कर जला देता है. WD   1856 b उसके पास उतना ही करीब था जितना आज है. इसका भी वही हश्र होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं होने पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वह 50 गुना ज्यादा दूर होगा और फिर अंदर आया होगा.

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वहीं नासा का इस मामले में यह भी कहना है कि वैसे तो इस सिस्टम में और ग्रह नहीं दिखाई दिए हैं, लेकिन और ग्रह हो सकते हैं इसकी भी संभावना है और वे टेस की नजर से बच गए हों.
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