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    क्या है नासा का MRS अभियान, जिस शुरू हो चुका है काम पर इजाजत मिली है अभी

    नासा (NASA) को मंगल (Mars) से मिट्टी लाने के अभियान को हरी झंडी मिल गई है. (तस्वीर: Pixabay)
    नासा (NASA) को मंगल (Mars) से मिट्टी लाने के अभियान को हरी झंडी मिल गई है. (तस्वीर: Pixabay)

    नासा (NASA) को (Mars) से मिट्टी के नमूने (Samples) लाने के अभियान को हरी झंडी मिल गई है, जबकि वह इस काम बहुत पहले से शुरू कर चुका है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 13, 2020, 12:56 PM IST
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    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अगले दशक में मंगल (Mars) पर इंसान भेजने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए मंगल पर कुछ प्रयोग करने के लिए वह अपना पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) भी रवाना कर चुका है. इस रोवर के प्रयोगों से जुड़ा एक खास प्रयोग भी है और वह है मंगल से मिट्टी के नूमनों (Soil Samples) को जमा करना और उसे पृथ्वी (Earth) तक लाना. लेकिन नासा को इसके लिए हरी झंडी हाल ही में मिली है जबकि वह इस अभियान में काफी काम कर चुका है.

    अभी हुई औपचारिक घोषणा
    इस स्वीकृति की औपचारिक घोषणा 10 नवंबर को ही की गई. इस मिशन का नाम मार्स सैम्पल रिटर्न (Mars Sample Return, MSR) है. मंगल से जमा किए गए पत्थर और मिट्टी के नमूनों का अध्ययन अंतरिक्ष अन्वेषण में एक बड़ा कदम साबित होगा. यह काम नासा यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के साथ मिलकर करेगा.

    बहुत समय से काम चल रहा है इस अभियान पर
    इस मिशन पर काम बहुत पहले से चल रहा है. यह तब से चल रहा है जब से नासा मंगल पर इसान भेजने की तैयारी कर रहा है. दरअसल मंगल पर नासा कई सालों से शोध कर रहा है और यहां पर कई तरह के रोवर भी भेज चुका है. ऐसे में पर्सिवियरेंस रोवर भेजना यह सवाल पैदा कर सकता है कि जब इतने रोवर भेजे जा चुके हैं तो नया रोवर क्यों. लेकिन पर्सवियरेंस रोवर मंगल पर नासा के अगले दशक के अभियानों के लिए खास प्रयोग और अन्वेषण करेगा.



    तो क्या काम है पर्सिवियरेंस का
    पर्सिवियरेंस का मंगल पर जीवन के संकेतों और जमीन के नीचे पानी की तलाश करना है ही. इसके अलावा प्रमुख रूप से उसे ऐसे प्रयोग करने हैं जो मंगल पर जाने वाले इंसानों के लिए बहुत ही उपयोगी होंगे. इनमें से एक अहम है मंगल पर ऑक्सीजन का उत्पादन करना. लेकिन इन प्रयोगों के साथ ही उसे मंगल से मिट्टी और चट्टानों के नमूने भी जमा करने हैं, जिन्हें बाद में पृथ्वी पर वापस लाया जा सके.

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    अभियान का पहला हिस्सा
    पर्सवियरेंस का मंगल पर नमूने जमा करना MSR अभियान का पहला हिस्सा है. पर्सिवियरेंस इसी  साल जुलाई के अंत में प्रक्षेपित किया गया है और वह अगले साल फरवरी में मंगल पहुंचेगा. इस तरह वह नमूने लेने की पूरी तैयारी से गया है. इसके लिए वह तमाम तरह के उपकरणों से सुसज्जित है.

    तो कैसे पृथ्वी पर आएंगे नमूने
    मंगल से नमूने लाने के लिए नासा ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी से साझेदारी की है. पर्सवियरेंस मंगल से नमूने तैयार कर एक जगह जमा करेगा कुछ नमूने ESA के फेच (Fetch) रोवर उठाएगा और वह नासा के मार्स एसेंट व्हीकल (MARS Ascent vehicle) तक पहुंचाएगा. मंगल से उसकी कक्षा में इन नमूनों को पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी व्हीकल की है. इसके बाद ESA का अर्थ रिटर्न ऑर्बिटर मार्स एसेंट व्हीकल से नमूने लेकर उन्हें पृथ्वी तक लाएगा. ये नमूने पृथ्वी 2030 के दशक में पहुंचेंगे.

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    क्या कहा नासा ने
    नासा ने अपने बयान में कहा है कि एजेंसी के महत्वाकांक्षी MSR प्लान परीक्षण करने के बाद बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि नासा मंगल के वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए तैयार है. नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टीन  ने कहा कि नासा के विश्व समुदाय के नेतृत्व के लिए MSR आवश्यक है. उन्होंने कहा, “हम जानते हैं आगे चुनौतियां है, लेकिन हम इस पर बारीकी से काम कर रहे हैं. हम इसीलिए बड़े नतीजे हासिल करते हैं.”
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