इंटरनेट पर छाई हबल टेलीस्कोप की सुपरनोवा के विस्फोट तरंगों की तस्वीर

इंटरनेट पर छाई हबल टेलीस्कोप की सुपरनोवा के विस्फोट तरंगों की तस्वीर
नासा की तस्वीर सुपरनोवा विस्फोट के बाद निकली तरंगों की तस्वीर है. (तस्वीर, @HUBBLE_space)

नासा (NASA) ने हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) की इस तस्वीर को हफ्ते की बेस्ट (Best Pic) कहा है जो एकसुपरनोवा (Supernova) के विस्फोट की तरंगों की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 30, 2020, 10:42 AM IST
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नासा  (NASA) का हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) अंतरिक्ष की बहुत ही उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें (Images) हासिल करता है. इनमें कई हैरान करने वाली तस्वीरें होती हैं तो कई खूबसूरत अनोखी तस्वीरें भी होती है. ऐसी ही एक अनोखी तस्वीर हबल ने सिगनस सुपनोनावा (Cygnus supernova) विस्फोट की तरंग (Blast wave) की ली है जिसे इंटरनेट पर बहुत ही पसंद किया जा रहा है.

नासा को ऐसी दिखी यह तस्वीर
इस तस्वीर के बारे में बात करते हुए नासा ने कहा है कि यह तस्वीर अंतरिक्ष में बहुत ही नाजुक और हलके पर्दे की तरह दिख रही है जो हर की कल्पना को जगा रही है. इस तस्वीर में काले अंतरिक्ष की पृष्ठभूमि में प्रस्फोट की तरंगे पीले और कत्थई लहराते दुपट्टे की तरह नजर आ रही हैं. इंटरनेट पर लोगों ने इस तस्वीर कई तरह से व्याख्या की हैं

कैसे बनी यह आकृति
नासा के मुताबिक हबल टेलीस्कोप से ली गई यह तस्वीर वास्तव में सिग्नस सुपरनोवा के विस्फोट की तरंग का हिस्सा है जो हमसे करीब 2400 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है. इस सुपरनोवा का विस्फोट 10 से 20 हजार पहले हुआ था जिसके बाद इसके टुकड़े इसके केंद्र से 60 प्रकाशवर्ष तक फैल गए थे.



इस हफ्ते की हबल के बेस्ट फोटो
हबल के ट्विटर अकाउंट में कहा गया कि हालांकि यह आकाश में एक नाजुक और हलके पर्दे की तरह लिपटा हुआ दिख रहा है, यह इस हफ्ते की हबल की सबसे खूबसरत तस्वीर है, जो सिग्नस सुपरनोवा विस्फोट की तरंग का छोटा हिस्सा है.



सोशल मीडिया पर
हबल टेलीस्कोप ने इंस्टाग्राम पर भी पर इस तस्वीर को साझा किया है. इंस्टाग्राम पर हबल ने लिखा कि यह विशाल विस्फोट की शॉकवेव अब भी 350 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से फैल रही है. हबल ने कहा कि इससे उत्सर्जित पदार्थ और तारों के बीच के कम घनत्व का पदार्थ के बीच की अंतरक्रिया से ये शॉकवेव तस्वीर में एक पर्दे के जैसा आभास दे रही है.

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कहां से आया यह सिग्नस नाम
नासा की वेबसाइट इस सुपरनोवा के बिखरे टुकड़ों का यह सिग्नस नाम इसके उत्तरी तारामंडल से आया है जहां ये मौजूद है. इस तारामंडल का नाम भी सिग्नस है. यह आकाश में पूर्णिमा के चांद से 36 गुना ज्यादा हिस्सा घेर रहा है.

Supernova
सुपरनोवा की विस्फोट ब्रह्माण्ड में बहुत ही कम होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे बनते हैं सुपरनोवा
सुपरनोवा एक मरते हुए तारे का बहुत ही शक्तिशाली विस्फोट होता है जो बहुत ही ज्यादा चमकदार होता है. इस तरह का सुपरनोवा विस्फोट तब भी होता है जब की दो तारे एक दूसरे का चक्कर लगाते हुए आपस में मिल जाते हैं. इनमें से एक पृथ्वी के आकार का छोटा सफोद तारा (White Dwarf) हो. जब ये तारे आपस में टकराते हैं या इन दोनों के पास का तारा इससे बड़ी मात्रा में पदार्थ खींचता है, तब इस सफेद तारे में भी सुपरनोवा का विस्फोट होता है.

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खगोलविदों का कहना है कि सुपरनोवा बहुत ज्यादा नहीं होते और हर सदी में हमारी मिल्की वे जैसी गैलेक्सी में दो या तीन ही ऐसे सुपरनोवा होते हैं.
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