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हबल टेलीस्कोप ने ‘रंगे हाथों’ पकड़ा एक Black Hole, जानिए पूरा मामला

हबल टेलीस्कोप ने ‘रंगे हाथों’ पकड़ा एक Black Hole, जानिए पूरा मामला

अंतरिक्ष में स्थित टेली स्कोप भी वैज्ञानिकों की शोध में मदद कर रहे हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अंतरिक्ष में स्थित टेली स्कोप भी वैज्ञानिकों की शोध में मदद कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने नासा (NASA) के हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) की वजह से एक दुर्लभ अंतरिक्ष घटना को पकड़ा जिससे एक मध्यम आकार के ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में पता चल सका जो बहुत ही मुश्किल से पकड़ में आते हैं.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) को लेकर दुनिया में कोहराम मचा हुआ है, दुनिया भर में लाखों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं तो वहीं 53 हजार से ज्यादा लोग मर भी चुके हैं. बहुत से देशों में लॉकडाउन की वजह से कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. अमेरिका में बहुत खराब हालात होने के बाद भी नासा के वैज्ञानिकों ने अपना काम जारी रखा है और उन्हें पिछले कई सालों की मेहनत के नतीजे भी मिल रहे हैं. अब हबल टेलीस्कोप (Hubble Telescope) के ताजा आंकड़े ब्लैक होल (Black Hole) के होने के अब तक के सबसे बड़े सबूत देते दिख रहे हैं.

अब तक के सबसे मजबूत प्रमाण
नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के संयुक्त कार्यक्रम के तहत भेजे गए हबल स्पेस टेलीस्कोप ने ब्रह्माण्ड में मौजूद मध्यम आकार के ब्लैक होल को होने के अब तक सबसे मजबूत प्रमाण भेजे हैं. हबल ने इस बात की पुष्टि की है कि यह ‘मध्यवर्ती द्रव्यमान’ (Intermediate mass) वाला ब्लैक होने एक घने तारा समूह में स्थित है.

बहुत सालों से तलाश थी इसकी
 मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल (IMBH) होने के विकास में एक ऐसे कड़ी थी जिसकी वैज्ञानिकों को शुरू से ही तलाश थी. अभी तक इस तरह के और ब्लैक होल मिलने के संकेत मिल चुके हैं. यह विशालकाय (Supermassive) ब्लैक होल की तुलना में छोटे होते हैं और बड़ी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित होते हैं लेकिन ये नक्षत्रीय ब्लैग होल (Stellar-mass black holes) से बड़े होते हैं जो बड़े तारों केखत्म होने से बनते हैं. इस बार जो ब्लैक होल हबल ने देखा है वह हमारे सूर्य से 50,000 गुना ज्यादा बड़ा है.

Nasa , Space Science
नासा ने 1990 में हबल स्पेस टेलीस्कोप प्रक्षेपित किया था..


इस टीम के अध्ययन ने खोजा
न्यू हैम्पशायर के स्टड1 के प्रमुख जांचकर्ता दाचेंग लिन और उनकी टीम ने हबल के साथ नासा के चंद्रा एक्स रे ऑबजर्वेटरी और ESA के एक्स रे मल्टी मिरर मिशन (XMM- Newton) के आंकड़ों का अपने अध्ययन में उपयोग किया.

पहले केवल यही पता चल सका था
2006 में सैटेलाइट्स ने एक्स रे की एक लपट को पकड़ा लेकिन वे यह तय नहीं कर सके कि वह अपने गैलेक्सी के अंदर से आई थी या उसके बाहर से. शोधकर्ताओं ने इसकी वजह यह बताई कि शायद किसी ब्लैक होल जैसे बड़े सघन पिण्ड जिसमें शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण शक्ति हो, ने इसके पास आने के बाद दो टुकड़ों में तोड़ दिया हो.

पुष्टि होने में थी यह परेशानी
हैरानी की बात यह थी एक्स रे का यह स्रोत गैलेक्सी के केंद्र में नहीं था जहां कि आमतौर पर ब्लैक होल होते हैं. इसी से उम्मीद बनी कि यह मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल (IMBH) हो सकता है. लेकिन इसके लिए जरूरी था इस एक्स रे लपट के अन्य स्रोत होने की संभावना भी खारिज हो. ऐसा सघन अति उच्च तापमान वाले न्यूट्रॉन तारे का हो सकता है. ये एक विस्फोटित तारे के बहुत ही घने अवशेष होते हैं.

Space Science
नासा की योजना अगले कुछ सालों में एक और शक्तिशाली टेली स्कोप अंतरिक्ष में भेजने की है.


फिर हबल ने यह देखा, तब हो सकी पुष्टि
हबल एक्स रे के स्रोत की इसी दिशा में देख रहा था. उसकी तस्वीरों ने इस बात की पुष्टि की कि यह स्रोत हमारी गैलेक्सी का कोई अलग स्रोत नहीं हैं बल्कि यह सुदूर एक तारा समहू है जो किसी और गैलेक्सी के बाहर है. ऐसी जगह जहां वैज्ञानिक IMBH के होने की उम्मीद करते हैं.

यह भी पता चला इसके बारे में
पूर्व के हबल शोध बताते हैं कि जितनी भारी गैलेक्सी होगी उससे ज्यादा भारी ब्लैक होल होगा. ताजा अवलोकन यह बताता है कि जहां से एक्स रे लपट आई वह तारा समूह एक हलकी गैलेक्सी का केंद्र हो सकता है जो अपनी बड़ी गैलेक्सी में गुरुत्वाकर्षण से टूटफूट गया हो.

मुश्किल होता है ऐसे ब्लैक होल को ढूंढ पाना
मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल (IMBH) ब्लैक होल के बारे में अंतरिक्ष में पता लगाना आसान नहीं होता. वे विशालकाय ब्लैक होल के मुकाबले छोटे और कम सक्रिय होते हैं, उनके पास उर्जा का खुद का स्रोत नहीं होता, न ही उनके पास इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण होता है कि वे लगातार तारों और अंतरिक्ष की दूसरी वस्तुओं को अपनी ओर खींच सकें.

रंगे हाथों ही पकड़ा जा सकता था
इसी लिए वैज्ञानिकों को ऐसे ब्लैकहोल को ‘रंगे हाथों’ पकड़ना पड़ता है. लिन की टीम और अन्य वैज्ञानिक हजारों प्रयासों के बाद एक इस तरह के ब्लैक होल का उम्मीदवार पकड़ सके. खुद लिन के मुताबकि इस तरह के ब्लैक होल एक तरह से ‘बहुत ही मुश्किल से मिलने वाले’ पिण्ड होते हैं. यानि कि वे आसानी से पकड़ में नहीं आते. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर मामले में अन्य सभी संभावनाओं को खारिज किया जाए. हबल के आंकड़ों ने इस मामले में हमें ऐसी ही मदद की है.”

Space
अंतरिक्ष में गए सैटेलाइट वैज्ञानिकों के अंतरिक्ष विज्ञान की खोजों में बहुत मददगार साबित हो रहे हैं. Photo: Reuters


इस अध्ययन से अब लिन सहित वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें ब्लैक होल, उसकी उत्पत्ति के बारे में और गहन जानकारी मिल सकेगी.

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Tags: Nasa, Science, Space

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