क्यों खास है गुरू का चांद गैनिमीड, जिसकी तस्वीरें भेजी हैं नासा के जूनो ने

क्यों खास है गुरू का चांद गैनिमीड, जिसकी तस्वीरें भेजी हैं नासा के जूनो ने
पहली बार गुरू ग्रह के सबसे बड़े चांद गैनिमीड की तस्वीरें इतने नजदीक से ली गई हैं.

नासा (NASA)के अंतरिक्ष यान जूनो (JUNO) ने पिछले साल के अंत में गुरू ग्रह (Jupiter) के सबसे बड़े चंद्रमा गैनिमीड (Ganymede) की तस्वीरें ली थीं.

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अंतरिक्ष में हमारा दखल बढ़ता जा रहा है. नासा (NASA)और दुनिया के अन्य देशों के भेजे हुए अतंरिक्ष यान बहुत सी काम की जानकारी भेज रहे हैं. इसी कड़ी में अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान जूनो (JUNO)  ने बृहस्पति ग्रह (Jupiter) के सबसे बड़े चांद गैनिमीड (Ganymede) के बर्फीले उत्तरी ध्रुव (North Pole) की तस्वीरें भेजी हैं.  इतना ही नहीं जूनो ने इस इलाके के पहली इंफ्रारेड मैपिंग (Infrared Mapping) भी करके भेजी है.

कब ली गई थीं ये तस्वीरें
अपने बयान में नासा ने बताया कि इस उपग्रह की इंफ्रारेड इमेज जूनो अंतरिक्ष यान की जोवियन इंफ्रारेड ऑरोरल मैपर, जीराम (JIRAM) उपकरण से ली गई है. यह इमेज तब ली गई थी जब जूनो दिसंबर 2019 में गुरू ग्रह के पास से गुजर रहा था. जिराम ने इस उपग्रह के पास से गुजरते हुए 300 इंफ्रारेड इमेज भेजी हैं. उस समय यह गुरू ग्रह से 62 हजार मील दूर था.

ट्वीटर पर साझा की तस्वीर
हाल ही में नासा ने ट्विटर पर इस तस्वीर को साझा किया है. इसके कैप्शन पर नासा ने लिखा है, “पहली बार नासा के जूनो ने हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े चांद, गुरू ग्रह के चंदा गैनिमीड के उत्तरी ध्रुव की तस्वीर ली है.”



प्लाज्मा बारिश और बर्फ
बयान के मुताबिक गैनीमीड हमारे सौरमंडल में इकलौता ऐसा उपग्रह है जिसकी अपनी मैग्नेटिक फील्ड है. इन तस्वीरों से पता चलता है कि गैनिमीड के उत्तरी ध्रुव और उसके आसपास की बर्फ प्लाज्मा की बारिश से कैसे प्रभावित हुई है. रोम में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के जूनो सह अन्वेषक एलेसैंड्रो मूरा का कहना है कि प्लाज्मा बारिश की परिघटना के बारे हमें पहली बार पता चल रहा है क्योंकि जूनो के कारण हम पूरा उत्तरी ध्रुव देख पा रहे हैं.





आगे के अभियानों के लिए फायदेमंद
वहीं नासा के बयान में यह भी कहा गया है कि जूनो और जिराम की तस्वीरों से जो खुलासे हुए हैं ने गुरू ग्रह के आगे के अभियानों को फायदा पहुंचाने में मदद करेंगे. इटैलियन स्पेस एजेंसी के लिए जीराम उपकरण के प्रोग्राम मैनेजर ग्युसेपी सिंडोनी ने बताया, “ये आंकड़े इस बात की मिसाल हैं कि जूनो गुरूग्रह के चंद्रमाओं का अवलोकन करने में कितना सक्षम है.

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क्या खासियतें हैं गैनिमीड की
गैनिमीड हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा चंद्रमा तो है ही, आकार में यह बुध ग्रह से भी बड़ा है, लेकिन इसका घनत्व बुध ग्रह से कम है.  इसकी खोजे गैलिलियो गैलिली ने 7 जनवरी 1619 को  गुरू ग्रह के तीन अन्य चंद्रमाओं के साथ की थी. ये पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह के खोजे गए पहले चंद्रमा थे.

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गुरू ग्रह के यूरोपा उपग्रह में वैज्ञानिक कई समय से जीवन की संभावना के प्रमाण तलाश रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


गैनीमीड की मैग्नेटिक फील्ड
गैनिमीड बर्फ और सिलिकेट शिलाओं से बना है जिसें एक तरल महासागर के ऊपर जमी हुई परत है. इसके अंदर एक तरल लोहे की क्रोड़ (Core) है. माना जा रहा है कि इसी क्रोड़ में चल रहे संवहन (Convection) के कारण गैनिमीड का खुद का एक मैग्नेटोस्फीयर है. लेकिन इसमें एक खास बात और है यह उपग्रह गुरू ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड के दायरे में आता है. इस वजह से गैनिमीड का मैग्नेटोस्फीयर एक और मैग्नेटोस्फीयर के अंदर है. इस कारण यहां तीव्र प्लाज्मा तरंगें बनती हैं जो कि प्लाज्मा कणों से बनती हैं. यह कण इलेक्ट्रॉन होते हैं जो जटिल मैग्नेटिक फील्ड के कारण तेज गति के कारण प्लाज्मा अवस्था में पहुंच जाते हैं.

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पृथ्वी की तरह एक और परिघटना होती है वहां
इस तेज गति के का एक और प्रभाव होता है वह है अरॉर (Aurora). हमारी पृथ्वी पर भी इस तरह के कण मैग्नेटिक फील्ड के कारण ध्रुवीय इलाकों में जमा होते हैं और वे परमाणुओं से अंतरक्रिया करते हुए आकाश में दर्शनीय प्रकाश के दृश्य पैदा करते हैं.
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