जानिए नासा के जूनो यान ने कैसे सुलझाया गुरु ग्रह के ऑरोर तूफानों का रहस्य

नासा के जूनो ने गुरू ग्रह के ऑरोर तूफानों (Auroral Storms) की यह तस्वीर ली है. (तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)

नासा (NASA) के जूनो यान ने गुरु ग्रह (Jupiter) के ध्रुवों पर आने वाले ऑरोर तूफानों (Auroral Storms) की उत्पत्ति सहित कई रहस्यों से पर्दा उठाया है जो अब तक पूरी तरह से देखे भी नहीं जा सके थे.

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    हमारे सौरमंडल (Solar System) के सबसे बड़े ग्रह गुरु (Jupiter) के बारे में नासा (NASA) के यूनो यान ने एक बड़ा खुलासा किया है. बहुत लंबे समय से गुरु ग्रह पर रहस्यमयी ऑरोर के तूफानों (Auroral Stroms) ने हमारे वैज्ञानिकों ने उलझा रखा था. अब जूनो की मदद से वैज्ञानिक ध्रुवों पर होने वाली इस घटना के रहस्यों से पर्दा उठाने में सफल हो गए हैं. जिसे अभी तक पूरी तरह से देखा भी नहीं जा सका था.

    पहली बार मिली इतनी ज्यादा जानकारी
    इस अध्ययन के नतीजे एजीयू एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. यह अध्ययन जूनो अभियानके अल्ट्रावॉलेट स्पैक्ट्रोग्राफ उपकरण से गुरू ग्रह के ध्रव पर एक विशाल गैस की कक्षा चमकती दिखाई दी है. यह पहली बार है कि गुरु ग्रह के सुबह में विशेष चमकीला ऑरोर के पैदा होने की कहानी भी पता चली है.

    पूरी तरह से नहीं दिखते हैं ये
    यह तेज चमकीली प्रकाशीय घटना गुरु ग्रह की खासियत कही जा सकती है. ये गुरु के दोनों ध्रुवों पर होती है. और इससे पहले केवल पृथ्वी पर स्थित या फिर उसका चक्कर लगा रहे टेलीस्कोप से अवलोकित किया जा सका था. लेकिन फिर यह पूरी तरह से नहीं देखा जा सकता था. केवल जूनो यान ने इसे पूरी तरह से पहली बार देखा है.

    केवल एक ही हिस्सा दिख पाता है पृथ्वी से
    इस ऑरोर तूफान का अधिकांश हिस्सा ग्रह के रात वाले हिस्से में छिप जाता है जिससे इसका केवल एक ही हिस्सा अब तक दिखाई देता था. इसे पहले पहले हबल के फेंट ऑबजेक्ट कैमरा से 1994 में देखा गया था जब इसे सुबह के समय छोटे समय के लिए तीव्र चमकीली और चौड़ी रोशनी की तरह गुरु के ऑरोर ओवल में देखा गया था.

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    गुरू ग्रह (Jupiter) के ये ऑरोर तूफान (Auroral Storms) उसकी वायुमंडल में रात को बनता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    ध्रुवों के पास चमकीला मंडल
    यह ऑरोर ऑवल गुरु ग्रह पर सुबह के समय सूर्योदय से ठीक पहले दोनों ध्रुवों के पास गोलाकार चमकीला मंडल जैसे दिखाई देता है. बेल्जियम में यूनिवर्सिटी ऑफ लीग के शोधकर्तों और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक बर्ट्रेंड बोनफोर्ड का कहना है कि पृथ्वी से गुरू ग्रह के अवलोकन के दौरान यह ऑरोर एक हिस्से से ज्यादा दिखाई नहीं देता है.”

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    क्यों दिख नहीं सके अब तक ये
    नासा के वॉयजर, गैलीलियो, कैसिनी, जैसे लंबे अभियान गुरू ग्रह के पास से तो गुजरे लेकिन वे कभी गुरू ग्रह के ध्रुवों के ऊपर से नहीं गुजर पाए. यही वजह से इन ऑरोर तूफानों की सही और पूरी तस्वीर कभी भी सामने नहीं आ सकी. बोनफोर्ड ने बताया कि यही वजह रही कि जूनों के आंकड़े गेमचेंजर रहे क्योंकि जूनो से रात वाले हिस्से की जानकारी मिल सकी जब अलसुबह के वक्त ये तूफान पैदा होते हैं.

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    नासा (NASA) का जूनो यान खास तौर गुरू ग्रह (Jupiter) के अध्ययन के लिए भेजा गया है. (तस्वीर: NASA)


    कब पैदा होते हैं ये
    शोधकर्ताओं ने पाया कि ये तूफान विशाल गैसीयग्रह में रात के समय बनते हैं.जब ग्रह घूमता है और सुबह होती है तब यह जटिल चमकदार ऑरोर और भी ज्यादा चमकीला हो जाता है जिससे हजारों गीगावॉट की अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश अंतरिक्ष में फैल जाता है. ये आम ऑरोर से 10 गुना ज्यादा ऊर्जा गुरू के ऊपरी वायुमंडल में फेंकते हैं.

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    जूनो साल 2016 से गुरु ग्रह का अध्ययनकर रहा है. यह विशाल गैसीय ग्रह है जिसमें 99 प्रतिशत भाग में हाइड्रोजन और हीलियम मौजूद है. जूनो के आंकड़े बताते है कि गहराई में जाने पर गुरू ग्रह की गैस आयानीकृत हो जाती है और गहन गर्म तरल धातु में बदल जाती है.