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गुरू-नेप्च्यून के चंद्रमा के लिए नासा अभियान हुए खारिज, जानिए क्या खोया हमने

नासा (NASA) के खारिज किए गए अभियानों मे गुरू और नेप्चयून के चंद्रमा के अन्वेषण के लिए अभियान थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शुक्रग्रह (Venus) के लिए स्वीकृत नासा (NASA) के दो अभियानों की प्रतिस्पर्धा गुरू (Juptier) और नेप्च्यून ग्रह के चंद्रमा के लिए दो अन्य अभियानों से थी जो कई रहस्य उजागर कर सकते थे.

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    पिछले कई सालों से नासा (NASA) का ध्यान मंगल ग्रह पर ज्यादा रहा था. अभी नासा चंद्रमा पर इंसान भेजने की तैयारी भी जोर शोर कर रहा है. ऐसे में लगने लगा था कि नासा सौरमंडल के अन्य ग्रहों को भूल गया है. लेकिन हाल ही में उसने घोषणा की है वह इस दशक के अंत तक दो अभियान शुक्र ग्रह (Venus) तक भेजेगा. इसके साथ ही नासा ने गुरू (Jupiter) और नेप्च्यून (Neptune) ग्रहों के चंद्रमा के लिए दो अभियानों को खारिज कर दिया है. वैज्ञानिकों को कहना है इससे हम बहुत सी जरूरी जानकारी से महरूम रह जाएंगे.

    चार अभियानों का प्रस्ताव
    नासा ने साल 1990 में शुक्र ग्रह के लिए मैगेलन ऑर्बिटर शुक्र ग्रह के लिए भेजा था जिसके बाद मंगल के अलावा किसी और ग्रह के अन्वेषण के लिए कोई अभियान नहीं भेजा गया है.शुक्र ग्रह के लिए जिन दो नए अभियानों की स्वीकृति मिली है उनकी प्रक्रिया फरवरी 2020 में शुरू हुई थी. तब नासा  चार अभियानों का प्रस्ताव दिया था जो नासा का उस डिस्कवरी कार्यक्रम का हिस्सा थे जो नासा ने साल 1992 में शुरू किया था.

    दो स्वीकृत दो खारिज
    नासा के ये प्रस्ताव नौ महीने की उपयुक्तता समीक्षा प्रक्रिया से गुजरे थे. डिस्कवरी कार्यक्रम का उद्देश्य सौरमंडल का अलग और नए तरीके से अन्वेषण करना था. इन चार प्रस्तावों में से डाविंसी और वेरिटास अभियानों को 50 करोड़ डॉलर का अनुदान स्वीकृत हुआ है. और ये अभियान साल 2028 से लेकर साल 2030 तक के बीच में प्रक्षेपित किए जाएगें. लेकिन इनके अलावा दो अभियानों का खारिज कर दिया गया है.

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    लू गुरू ग्रह (Jupiter) का सबसे नजदीक का चंद्रमा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    किन दो अभियानों को किया गया खारिज
    स्वीकृत किए गए दो अभियानों को खारिज अभियानों से तगड़ी टक्कर मिली थी. ये दो अभियान गुर ग्रह के चंद्रमा लू और नेप्च्यून ग्रह के चंद्रमा ट्रिटॉन  के लिए थे. इस मौके पर यह चर्चा छिड़ गई है कि इन दो अभियानों के खारिज होने से विज्ञान जगत ने ऐसा क्या गंवा दिया तो जो इन दो अभियानों से हासिल हो सकता था.

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    यूरेनस और नेप्च्यून
    हमारे सौरमंडल के सबसे कम अवलोकित और अध्ययन किए गए ग्रह नेप्च्यून और यूरेनस हैं. इनकी कई विशेषताएं सौरमंडल में और कहीं नहीं मिलती हैं. यूरेनस की कक्षा की धुरी दूसरे ग्रहों की कक्षा के तल के मुकाबले झुकी है तो नेप्चूयन का केवल एक ही विशाल चंद्रमा है जिसे ट्रिटॉन कहते हैं. यह उल्टी दिशा में नेप्च्यून के चक्कर लगाता है. इसकी भी कक्षा के तल की धुरी 23 डिग्री तक झुकी है.

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    ट्रिटॉन भी नेप्च्यून (Nptune) की तरह कई अनोखी विशेषताएं लिए हुए है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    और ट्रिटॉन की ये विशेषताएं
    ट्रिटॉन में एक सक्रिया आयनमंडल है. यह आवेशित कणों के वायुमंडलीय परत है जो किसी भी अन्य चंद्रमा से 10 गुना ज्यादा सक्रिय है और जिसे सूर्य से शक्ति नहीं मिलती है. इसकी सतह भी लगातार बदलती रहती है माना जाता है कि यहां नाइट्रोजन की बर्फ हो सकती है. जब नासा का वॉयजर-2 यान ने इसकी तस्वीरें लीं तो पता चला कि यहां 8 किलोमीटर ऊंचाई तक बर्फ और गैस फेंकने वाले गीजह भी हैं जिससे पता चला कि यहां सतह के नीचे महासागर भी हो सकते हैं.

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    बेशक ये दो अभियान शुक्र के दो अभियानों को कड़ी टक्कर दे रहे थे. दोनों ही चंद्रमाओं की सक्रियता हमारे वैज्ञानिकों को खास तौर पर आकर्षित के साथ हैरान भी कर रही थी. जिस तरह के वॉयजर और अन्य अवलोकनों ने इन चंद्रमाओं के बारे में कई धारणाओं को तोड़ा है. उससे ये उपग्रह और भी ज्यादा रोचक और उम्मीद भरे पिंड हो गये हैं. लेकिन शायद इनके बारे में और ज्यादा जानने के लिए हमें लंबा इंतजार करना होगा.