नासा ने टॉयलेट डिजाइन करने का दिया चैलेंज, लाखों रुपये कमाने का है मौका

नासा ने टॉयलेट डिजाइन करने का दिया चैलेंज, लाखों रुपये कमाने का है मौका
नासा ने लूनार लू चैेलेंज के नाम से खुली प्रतियोगिता रखी है.

अंतरिक्ष (Space) में नित्यकर्मों से निपटना अब भी एक बड़ी समस्या है जिसके लिए नासा (NASA) ने लोगों से टॉयलेट डिजाइन (Toilet Design) करने को कहा है और उसके लिए बड़ी रकम ईनाम में रखी है.

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यूं तो अंतरिक्ष (Space)  हो या चांद(Moon) वहां जाना बहुत ही खर्चीला और जोखिम भरा काम है. लेकिन आज दुनिया के लिए अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में भेजना कोई नामुमकिन काम नहीं रह गया है. फिर भी अंतरिक्ष में जाना एक बहुत ही मुश्किल काम है और उसमें कई चुनौतियां हैं. अंतरिक्ष अनुसंधान में कई विषय ऐसे हैं जो अंतरिक्ष यात्रा की मुश्किलों को हल करने में जुटे हुए हैं. ऐसी ही एक समस्या  है अंतरिक्ष या चांद पर नित्यकर्मों से निपटने की जरूरत. इसे सुलझाने के लिए नासा (NASA) ने लोगों को एक चैलेंज दिया है जिससे लोगो लाखों कम सकते हैं

इन जरूरतों का समाधान बहुत जरूरी
एस्ट्रोनॉट बुद्धिमान और बहादुर होते हैं लेकिन अंतरिक्ष में भी उनकी जरूरतें इंसान की तरह होती हैं. अंतरिक्ष में उन्हें भी मलमूत्र त्यागने की जरूरत होती है. नासा को अपने एस्ट्रोनॉट्स के लिए बाथरूम संबंधी इस समाधान की जरूरत है. 1975 में जब अपोलो मिशन खत्म हुआ तब इंजीनियरों ने मलमूत्र विसर्जन को अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक गंभीर चुनौती बताया था. नासा ने कुछ उपकरण तो बनाए हैं लेकिन समस्या हल नहीं हुई है.

नासा ने लिया लोगों से मदद का फैसला
अब नासा ने इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए आम लोगों को भी शामिल करनेका फैसला किया है. नासा चाहता है कि लोग उसके एस्ट्रोनॉट्स के लिए माइक्रोग्रैविटी और चंद्रमा  जैसी जगह पर कम गुरुत्वाकर्षण वाले इलाके में काम कर पाने वाला टॉयलेट के डिजाइन बनाकर उसे भेजें.



कितना इनाम रखा है नासा ने इस पर
इस काम के लिए नासा ने 26 लाख से ज्यादा का इनाम भी रखा है. नासा अब चांद पर फिर से जाने की तैयारी कर रहा है और वहां अपने एस्ट्रोनॉट्स को लंबे समय तक रखा जा सके. इसकी तैयारी भी कर रहा है. बताया जा रहा है कि नासा की योजना चांद पर एक बेस कैम्प बनाने की है जहां लोग लंबे समय तक रह सकें. इसमें रहने की खास जगह, उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करना भी शामिल है.

NASA
नासा 2024 मेें चांद पर इंसान पहुंचाने की तैयारी कर रहा है


यह नाम दिया है नासा ने इसे
एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में खाना तो खाते हैं, लेकिन उन्हें नित्यकर्मों से निपटने केलिए माइक्रोग्रैविटि और चंद्रमा की ग्रैविटी में टॉयलेट सुविधा की जरूरत होगी. इस काम को लूनार लू चैलेंज नाम दिया है. नासा ने इसे हीरोएक्स पर इस चैलेंज को जारी किया है.

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क्यों जरूरत है नासा को इसकी
नासा ने अपने बयान में कहा है, “हालांकि स्पेस टॉयलेट्स पहले से मौजूद हैं और उपयोग में लाए भी जा रहे हैं, (जैसे कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) लेकिन वे केवल माइक्रोग्रैविटी के लिए डिजाइन किए गए हैं.” इस चैलेंज में दो श्रेणियां हैं एक तकनीकी और दूसरी जूनियर. डिजाइन को जमा करने की अंतिम तारीख 17 अगस्त है.

Moon
नासा को चंद्रमा के लिए अलग तरह के टॉयलेट की जरूरत होगी. .


यह योजना है नासा की
नासा का आर्टिमिस मून मिशन एक महिला और एक पुरुष यात्री को चंद्रमा की सतह पर उतारने का काम साल 2024 तक करेगा. आर्टिमिस कार्यक्रम चांद से मंगल तक के अन्वेषण का हिस्सा है जिसमें चांद की यात्रा का अनुभव मंगल की यात्रा के लिए उपयोग में लाया जाएगा. इसके लिए नासा ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम प्रोग्राम भी तैयार कर रहा है. नासा के विशेषज्ञ अपने व्यवसायिक साझेदारों के साथ मिल कर उनके ह्यूमन लैडिंग सिस्टम पर काम करेंगे.

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अब सब कुछ इस काम पर निर्भर
इस समय नासा का ध्यान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़े स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन की सफलतापूर्वक वापसी पर है. इसकी सफलता पर ही नासा की आगे की योजना निर्भर करती है. स्पेसएक्स ने पिछले महीने ही सफल प्रक्षेपण करते हुए अपने अंतरिक्ष यान से पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को ISS  तक सफलतापूर्वक पहुंचाया था. यह किसी निजी व्यवसायिक यान से पहली बार किया गया था. लेकिन यह अभियान पूर्ण नहीं हुआ है. सफलतापूर्वक वापसी ही इसी पूर्ण बना पाएगी. अब नासा ने अपने अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रक्षेपण का काम निजी क्षेत्र को सौंप दिया है.
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