जानिए मंगल पर कैसे उतरेगा नासा का पर्सिवियरेंस रोवर, सात मिनट होंगे अहम

नासा (NASA)का पर्सवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) अपने सबसे मुश्किल दौर में तब जाएगा जब वह मंगल (Mars) के वायुमंडल (Atmosphere) में प्रवेश करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) कल मंगल ग्रह (Mars) पर उतर जाएगा, लेकिन उसके मंगल के वायुमडंल में प्रवेश (Entry) के बाद के सात मिनट बहुत अहम होंगे.

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    गुरुवार की रात और शुक्रवार की सुबह एक बड़ी घटना होने वाली है. जब भारतीय समानुसार रात के 2.25 पर नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) मंगल (Mars)  के जजीरो क्रेटर पर उतरेगा, उसके सामने कुछ चुनौतियां होंगी. ऐसा नहीं है कि मंगल पर पहली बार इस तरह का कोई रोवर उतर रहा है. शायद इसीलिए लोग इसके लिए बहुत आशान्वित हैं, लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं है. यहां तक कि चंद्रमा पर यान उतरने की प्रक्रिया से भी कहीं ज्यादा जटिल है.

    20 करोड़ दूर से आएंगे संकेत
    जैसे ही नासा का यान मंगल के वायुमंडल में प्रवेश करेगा, वह एक रेडियो संकेत भेजेगा जिसे पृथ्वी तक पहुंचने के लिए 20.4 करोड़ किलोमीटर का सफर तय करना होगा. जब तक यह संकेत लॉस एंजेलिस के पास नासा के जेपीएल तक पहुंचेगा तब तक मंगल पर पर्सिवियरेंस की लैंडिंग हो चुकी होगा.  मंगल के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद पर्सिवियरेंस को केवल 7 मिनट ही जजीरो क्रेटर को छूने में लगेंगे.

    इतना समय लगेगा संकेत मिलने में
    मंगल से पृथ्वी तक एक संकेत के आने में 11 मिनट लगते हैं. यानि जैसे ही नासा के वैज्ञानिकों को यान के मंगल के वायुमंडल में प्रवेश का संकेत मिलेगा. तब तक रोवर मंगल की जमीन छू चुका होगा. और ऐसा सकुशल हो चुके होने के लिए वैज्ञानिकों को अगले संकेतों का इंतजार करना होगा. नासा के वैज्ञानिकों ने इस समय को “खौफ के सात मिनट” कहा है.

    28 सेंसर्स रखेंगे नजर
    पर्सवियरेंस में मंगल के प्रवेश कराने की जिम्मेदारी पर्सिवियरेंस की मार्स एंट्री, डिसेंट एंड लैंडिंग इंस्ट्रयूमेंटेशन 2 (MEDLI2) पर है. MEDLI2 में तीन तरह के सेंसर्स जो इस दौरान तापमान, अत्याधिक ऊष्मा और दबाव की जानकारी रखेंगे और यह प्रक्रिया पैराशूट खुलने के दौरान और उसके बाद भी जारी रहेगी. इस पूरी प्रक्रिया के ले 28 सेंसर्स को खास सिलसिले में लगाया गया है.

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    मंगल (Mars) पर नासा के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया स्वचलित होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)


    10 मिनट पहले से लगातार आंकड़े
    पर्सवियरेंस MEDLI2 को वायुमंडल में प्रवेश के पांच घंटे पहले ऊर्जा लेकर काम शुरू कर देगा. जिससे सिस्टम को गर्म होने का पर्याप्त समय मिल सके. इस दौरान MEDLI2 सेंसर्स से हर 45 मिनट में आंकड़े जमा किए जाएंगे. और वायुमंडल में प्रवेश के 10 मिनट पहले ही मार्स 2020 यान लागतार MEDLI2 के आंकड़े जमा करना शुरू कर देगा.

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    बहुत बढ़ जाएगा तापमान
    आंकड़े बताएंगे कि पर्सिवियरेंस के प्रवेश के बाद जैसे ही वह मंगल के वायुमंडल से गुजरेगा, MEDLI2 लगातार आंकड़े जमा करता रहेगा. इस दौरान 1200 से 1300 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच जाएगा और दबाव भी उच्चतम होगा. अंतिम सौ सेकेंड में यान सुपरसॉनिक उड़ान के दौर में होगा जहां से हवा की गति दिशा और अन्य आंकड़े भी जमा किए जाएंगे.

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    मंगल (Mars) पर नासा के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) अभूतपूर्व प्रयोग करेगा. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    पैराशूट और स्काइ क्रेन की सक्रियता
    नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार यह 2.7 अरब डॉलर का सबसे खतरनाक हिस्सा होगा. यह हमेशा ही सुनिश्चित नहीं रहता है. यह सबसे विशाल, सबसे भारी और सबसे जटिल रोवर है. पहले एक सुरसॉनिक पैराशूट खुलेगा जो जेट की शक्ति से चलने वाले एक स्काई क्रेन को नीचे लेजाएगा और उसकी गति भी धीमी करता रहेगा जब तक वह जमीन के पास न पहुंच जाए.

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    यहां से बैटरी से चलने वाला एसयूवी के आकार का रोवर जमीन पर हलके से गिरा दिया जाएगा. यहां से क्रेन दूर सुरक्षित दूरी पर जाकर क्रैश हो जाएगा. इस दौरान पूरी प्रक्रिया स्वचलित होगी और उस पर पृथ्वी से किसी भी तरह का कोई नियंत्रण नहीं होगा.

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