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सौरमंडल के बाहर नाप ली दो तारों के बीच दूरी, जानिए नासा ने कैसे किया यह कमाल

न्यू होराइजन ने सौरमंडल के बाहर से तस्वीर खींची जिससे दोनों तारों की दूरी नापी जा सकी. (फोटो साभार: AP)

न्यू होराइजन ने सौरमंडल के बाहर से तस्वीर खींची जिससे दोनों तारों की दूरी नापी जा सकी. (फोटो साभार: AP)

यह पहली बार है कि पृथ्वी (Earth) से गए किसी अंतरिक्ष यान (Probe) ने सौरमंडल (Solar System) के बाहर से तारों (Stars) की दूरी नापने में मदद की है.

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नई दिल्ली: हमारे पास अनंत अंतरिक्ष के बारे में जानने के काफी सीमित साधन और तरीके हैं. एक तो हमारी पृत्वी पर मौजूद विभिन्न टेलीस्कोप (Telescope) और दूसरे वे अंतरिक्ष यान (space crafts) जो हमने अंतरिक्ष में भेजे हैं. यानि हमारी अंतरिक्ष के बारे में खासतौर पर हमारे सौरमंडल के बाहर के बारे में जानकारी हमें उसके अंदर ही हो सके अवलोकनों से हुई है. लेकिन नासा ने पहली बार हमारे सौलमंडल (Solar System) के बाहर से  दो तारों की दूरी नापने का कारनामा कर दिखाया है.

इस अंतरिक्ष यान से मिली मदद
नासा के न्यू होराइजन्स अंतरिक्षयान ने 2015 में दुनिया को प्लूटो ग्रह की तस्वीरें भेजी थीं और हाल ही में क्षुद्रग्रहों की कुइपियर बेल्ट के एक पिंड की नजदीकी तस्वीरें भेजी थीं. अब इस अभियान ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली है. इसने हमारे सौरमंडल के बाहर से दो तारों की दूरी नापने का काम किया है. अमेरिका के कोलोराडो के बोउल्डर स्थित साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से न्यू होराइजन्स के प्रमुख अन्वेषक एलन स्टर्न ने अपने बयान में कहा, “अब यह कहना सही होगा कि न्यू होराइजन एक एलियन आकाश को देख रहा है जो वैसा बिलकुल नहीं है जो हमारी पृथ्वी से दिखाई देता है.”

टेलीस्कोप ही काफी नहीं हैं
हबल टेलीस्कोप से लेकर नएयूरोपीय प्लैनेट हंटर CHEOPS टेलीस्कोप सहित दुनिया के ज्यादातर स्पेस टेलीस्कोप सभी पृथ्वी के नजदीक हैं. उनका पृथ्वी के वायुमडंल से बाहर होना ही बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन कई बार गहरे अंतरिक्ष से अवलोकन करना का बहुत फायदा होता है.



कैसे किया यह काम
इस साल अप्रैल के महीन में न्यू होराइजन की टीम ने अपने यान का मुख्य कैमरा सूर्य के सबसे नजदीकी तारे प्रॉक्जिमा सेंचुरी की ओर केंद्रित किया जो पृथ्वी से 4.2 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है. इसके साथ ही कैमरे में दूसरे तारे वोल्फ 359 भी दिख रहा था. जब यह तस्वीर ली जा रही थी, ठीक उसी समय नासा ने भी खगोलविदों को दोनों तारों की धरती से तस्वीर लेने को कहा. न्यू होराइजन पृथ्वी के मुकाबले सूर्य से 46 गुना ज्यादा दूर है. इससे यह संभावना भी बनी कि दोनों जगहों से तारों की स्थिति कुछ अलग दिखती. दोनों के बीच के अंतर का अध्ययन कर वैज्ञानिक इन दोनों तारों की धरती से दूरी पता कर सकते हैं.

पैरेलैक्स तकनीक से किया काम
यह तकनीक काफी पुरानी है और तारों की दूरियां नापने के लिए तब भी उपयोग में लाई जाती थी जब बड़े टेलीस्कोप का निर्माण नहीं हुआ था. इस तकनीक से हमारी गैलेक्सी के कई 3डी मैप तक बने हैं. यह मैप यूरोपीय स्पेस एजेंसी के गीगा प्रोब (GIGA Probe) की मदद से बनाया गया है. लेकिन गीगा के साथ समस्या यह है कि वह पृथ्वी के बहुत पास है. वह केवल उन तारों की दूरी पता कर सकता है जो पृथ्वी की आधी कक्षा के ही तरफ ही न हों बल्कि विपरीत हों. फिर भी तारों की बहुत ज्यादा दूरी होने पर यह पद्धति काम नहीं आती. लेकिन न्यू होराइजन पृथ्वी सूर्य के बीच की दो गुनी नहीं बल्कि 46 गुनी ज्यादा दूरी के आधार पर काम करता है. वहीं इस मामले में दो अलग जगहों से ली गई तस्वीरों से अंतर भी साफ दिखेगा.

NASA
नासा ने यह यान साल 2006 में प्लूटो के लिए प्रक्षेपित किया था.


फिर भी गौर करने वाली बात यह है कि न्यू होराइजन का उद्देश्य खगोलीय पिंडों की दूरी नापना नहीं है. वह यह काम कर भी नहीं सकता है. इसके बाद भी तस्वीरों से कुछ नई जानकारी तो जरूर मिलेगी.

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