क्यों अंतरिक्ष यान छोड़ गुब्बारे में रखकर आकाश में टेलीस्कोप भेजेगा नासा

क्यों अंतरिक्ष यान छोड़ गुब्बारे में रखकर आकाश में टेलीस्कोप भेजेगा नासा
नासा ने एक टेलीस्कोप को ऊंचाई पर भेजने के लिए गुब्बारे को जरिया बनाने की योजना बनाई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) एक टेलीस्कोप (Telescope) को अंतरिक्ष (Space) में भेजने के बजाए गुब्बारे (Balloon) के जरिए आकाश में भेजने की योजना बना रहा है.

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इंसान की आंख अंतरिक्ष (Space) से आता हुआ सारा प्रकाश (Light) नहीं देख सकतीं. इसके अलावा इंसान ज्यादा दूर तक के प्रकाश को भी नहीं देख पाता है. इसीलिए टेलीस्कोप (Telescope) बने. फिर अंतरिक्ष से आती हुई अलग अलग तरह की तरंगों के अध्ययन के लिए विभिन्न प्रकार के टेलीस्कोप बने. जिसमें एक्सरे (X-Ray) टेलीस्कोप, इंफ्रारेड (Infra-Red) टेलीस्कोप जैसे कई टेली स्कोप शामिल हैं. इन टेलीस्कोप से भी अंतरिक्ष का अध्ययन करने में एक परेशानी होती है जिसके समाधान के लिए नासा (NASA) अपना एक टेलीस्कोप एक बहुत बड़े गुब्बारे (Balloon) में रख कर ऊंचे आकाश में भेजने की तैयारी कर रहा है.

क्यों ऊंचाई पर टेलीस्कोप भेजना चाहता है नासा
दरअसल टेलीस्कोप कितनी ही शक्तिशाली क्यों न हों पृथ्वी के वायुमंडल और उसमें होने वाली तमाम तरह की तरंगे सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली  तरंगों को सही सलामत टेलीस्कोप कर पहुंचने नहीं देती जिससे टेलीस्कोप के अध्ययन में बाधा पहुंचती है. यही वजह है कि दुनिया भर के टेलीस्कोप ऊंचे ऊंचे पर्वतों में स्थापित किए जाते हैं और दुनिया की सारी वेधशालाएं ऊंचे पर्वतों पर ही बनाई गई हैं. नासा ने टेलीस्कोप को और ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए गुब्बारे का सहारा लेने के बारे मे सोचा है.

क्या है यह मिशन
नासा इस मिशन के जरिए 8.4 फुट ऊंचा टेलीस्कोप पृथ्वी के वायुमंडल के समतापमंल (stratosphere) पर भेजना चाहता है. इसके लिए नास इस टेलीस्कोप को एक फुटबॉल के आकार के गुब्बारे पर रख कर आकाश में भेजेगा. इस मिशन का नाम एस्ट्रोफिजिक्स स्ट्रैटोस्फियरिक टेलीस्कोप फॉर हाई स्पैक्ट्रल रिसोल्यूशन ऑबजर्वेशन्स एट सबमिलीमीटर वेवलेंथ (ASTHROS) रखा है. इसका प्रबंधन नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेट्री करेगी और इसका प्रक्षेपण दिसंबर 2023 से अंटार्कटिका से किया जाएगा.





कितनी ऊंचाई पर जाएगा यह
यह इंफ्रारेड टेलीस्कोप को इंफ्रारेड प्रकाश का अवलोकन करने के लिए 1,30,000 फीट की ऊंचाई पर जाना होगा. इस ऊंचाई हमारे व्यावसायिक उड़ान भरने वाले हवाई जहाजों की ऊंचाई से चार गुना ज्यादा ऊंचाई पर हैं. यह ऊंचाई हमारे वायुमंडल और अतरिक्ष की सीमा की ऊंचाई की आधी भी नहीं है.  इस गुब्बारे में हीलियम गैस भरी जाएगी जिसके बाद यह 150 मीटर बड़ा हो जाएगा जो कि एक फुटबॉल के स्टेडियम के आकार जिताना होगा.

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अंतरिक्ष अभियान की जगह गुब्बारा क्यों
नासा ने इस मिशन को केवल खर्च कम करने के लिहाज से ही नहीं चुना, बल्कि इसमें अंतरिक्ष अभियानों के मुकाबले बहुत कम समय भी लगता है. इस मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर और जेपीएल इंजनियर जोस सिल्स का कहना है कि एस्थ्रोस जैसे गुब्बारे मिशन अंतरिक्ष अभियान के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरे होते हैं लेकिन ये काफी फायदेमंद होते हैं.

Balloon
गुब्बारे से टेलीस्कोप आकाश में भेजना अंतरिक्ष यान से भेजने से ज्यादा किफायती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर, Reuters)


क्या पड़ताल करेगा यह टेलीस्कोप
इस गुब्बारे में रखा टेलीस्कोप उपकरण नए बने तारे के पास की गैसों की गति और गतिविधियों को मापेगा. गुब्बारे में क्रायोकूलर भी होगा जो उपकरणों के बहुत ठंडा रखेगा. एस्थ्रोस पहली बार अंतरिक्ष दो खासतरह के नाइट्रोजन आयन की उपस्थिति की पड़ताल भी करेगा. ये आयन वहां पाए जाते हैं जहां विशालकाय तारो और सुपरनोवा प्रस्फोट से हवाएं निकलकर तारों के बनने वाले इलाके में गैसों के बादलों को फिर से आकार देती हैं.

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इंफ्रारेड टेलीस्कोप बहुत ही संवेदनशील टेलीस्कोप होते हैं इसीलिए उन्हें व्यवाधानों से दूर रखना पड़ता है जिनके पृथ्वी की सतह पर होने की बहुत ज्यादा संभावना होती है. इसीलिए नासा अपना वेब टेलीस्कोप अंतरिक्ष में स्थापित करने की तैयारी कर रहा है. इसका प्रक्षेपण कई बार टल चुका है.
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