खरबों डॉलर के asteroid का अन्वेषण करेगा नासा, जानिए क्यों है ये इतना कीमती

खरबों डॉलर के asteroid का अन्वेषण करेगा नासा, जानिए क्यों है ये इतना कीमती
पहली बार होगा जब नासा इस तरह के धातु वाले क्षुद्रग्रह के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान भेज रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) एक ऐसे क्षुद्रग्रह (Asteroid) का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्षयान (Spacecraft)भेजने की तैयारी कर रहा है जहां केवल धातु है जिसका मूल्य बहुत अधिक है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 4:15 PM IST
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हमारे सौरमंडल (Solar System) और उसकी उत्पत्ति के बारे में केवल ग्रहों (Planets) से जानकारी नहीं मिलती. इसके लिए वैज्ञानिकों को क्षुद्रग्रहों (Asteroids) से भी काफी कुछ जानकारी मिलती रहती है. इसी सिलसिले में नासा (NASA) भी कई क्षुद्रग्रहों के अध्ययन करने का प्रयास करता रहता है. अब नासा 16 साइक (16 Psyche) के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान भेजने की तैयारी कर रहा है.

क्या खास है इसमें
16 साइक क्षुद्रग्रहों की पट्टी (Asteroid Belt) के सबसे बड़े क्षुद्रग्रहों में से एक माना जाता है.  माना जाता है कि इसकी रासायनिक संरचना की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से विशुद्ध धातुओं का बना है. नासा ने अपने अंतरिक्ष यान का नाम भी साइक स्पेसक्राफ्ट रखा है. फिलहाल इस यान ने डिजाइन स्तर का दौर पास कर लिया है.

क्या है यह 16 साइक
16 साइक 226 किलोमीटर बड़ा क्षुद्रग्रह है. यह हमारे चंद्रमा की व्यास का सोलहवां हिस्सा है. यह मंगल और गुरू ग्रह के बीच स्थित क्षुद्रग्रहों की पट्टी में स्थित रहकर सूर्य के चक्कर लगाता है. डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार इस ग्रह पर सैंकड़ों अरब-अरब डालर की कीमती धातु हो सकती है. रिपोर्ट में ग्रह विज्ञानी लिंडे एकल्किन्स-टैटोन का अनुमान बताया गया है. इसके मुताबिक यहां केवल लोहे की कीमत ही दस अरब-अरब डॉलर होगी.



कैसे करेगा नासा इसका अध्ययन
नासा का कहना है कि साइक अंतरिक्ष यान अगस्त 2022 में प्रक्षेपित किया जाएगा और यह अपने क्षुद्रग्रह पर 2026 की शुरुआत में उतरेगा. नासा की योजना 16 साइक के गुणों का अध्ययन कर उनका नक्शा बनाने की है. इसके लिए अंतरिक्ष यान के साथ मल्टीस्पैक्ट्रल इमेजर, गामा रे और न्यूरॉन स्पैक्ट्रोमीटर, एक रेडियों उपकरण और एक मौग्नेटोमीटर भेजा जाएगा.



क्या अध्ययन करेंगे ये उपकरण
मैग्नेटोमीटर के जरिए साइक अंतरिक्ष यान इस क्षुद्रग्रह की मैग्नेटिक फील्ड का अध्ययन करेगा. मल्टीस्पैक्ट्रर इमेजर सतह की तस्वीरें लेने के साथ क्षुद्रग्रह की संचरना और स्वरूप संबंधी आंकड़े जमा करेगा. स्पैक्ट्रोमीटर का काम इसकी सतह से उत्सर्जित होने वाले न्यूट्रॉन और गामा किरणों का अध्ययन करना होगा जिससे इस क्षुद्रग्रह की संरचना का पता चल सकेगा.

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लेकिन ये है सबसे बड़ी वजह
नासा को उम्मीद है कि चूंकि पृथ्वी बहुत बड़ा ग्रह है इसलिए उसके क्रोड़ (Core) का अध्ययन नहीं हो सकता है. लेकिन 226 किलोमीटर बड़े साइक क्षुद्रग्रह के अध्ययन से शोधकर्ताओं को हमारे ग्रह निर्माण के बारे में काफी कुछ जानकारी मिल सकती है.

Asteroid
आमतौर पर क्षुद्रग्रह केवल पत्थर और बर्फ से बने होते हैं, लेकिन साइक के साथ ऐसा नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहले किसी ग्रह का हिस्सा था यह
दरअसल साइक क्षुद्रग्रह के बारे में माना जाता है कि यह कभी एक पूरा ग्रह रहे पिंड का क्रोड है.  जो निकल और लोहे से भरपूर है जैसा की हमारी पृथ्वी के क्रोड़ में है. इसी वजह से वैज्ञानिकों की इस क्षुद्रग्रह में खासी दिलचस्पी है. और यही वजह है कि नासा यहां अंतरिक्ष यान तक भेजने की तैयारी कर रहा है.

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पहली बार होगा ऐसा अध्ययन
इस अभियान की अगुआई एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी करेगा. जबकि इसके कार्य संचालन, नेविगेशन और अभियान प्रबंधन नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी देखेगी. साइक अभियान पहला ऐसा मिशन होगा जो ऐसे संसार का अध्ययन करेगा जो धातु का होगा न कि चट्टान और बर्फ का. साइक की खोज इटली के खगोलविद एनीबेल डि गास्प्येर ने 17 मार्च 1852 में खोजा था.
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