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अगले दशक में अध्ययन के लिए यूरेनस का चुनाव क्यों कर रहे हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरेनस (Uranus) को अब तक बहुत नजरअंदाज किया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरेनस (Uranus) को अब तक बहुत नजरअंदाज किया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) के लिए अमेरिकी नेशनल एकेडमीज के विशेषज्ञों के पैनल ने अगले दशक के लिए यूरेनस ग्रह (Uranus) के लिए अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. पैनल की रिपोर्ट में विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है कि क्यों यूरेनस सौरमंडल (Solar System) के दो सबसे नजरअंदाज ग्रहों में से एक है. इसमें वैज्ञानिकों ने यूरेनस की उन विशेषताओं का जिक्र किया है जो किसी और ग्रह में नहीं हैं जिससे वह पड़ताल के लिए उपयुक्त ग्रह है.

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    दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों कि निगाहें नासा (NASA) पर होती हैं कि वह आने वाले समय में किस ग्रह के अध्ययन के लिए अभियान भेजेगा. हाल ही में अमेरिकी नेशनल एकेडमीज के विशेषज्ञों के पैनल ने अपनी रिपोर्ट में ग्रह विज्ञान और खगोलजीवविज्ञान के लिए अपने प्राथमिकताओं का निर्धारण किया है.  इस रिपोर्ट में पैनल ने अगले दशक में यूरेनस (Uranus) के लिए एक अंतरिक्ष यान भेजने को शीर्ष प्राथमिकता वाले अगले ग्रह अभियान के तौर पर चुना है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जहां हमारे सौरमंडल (Solar System) के ग्रहों के लिए एक समर्पित अभियान भेजे गए हैं. यूरेनस और नेप्च्यून के लिए ऐसा नहीं किया गया है.

    आने वाले दशक के महत्वपूर्ण लक्ष्य
    ओरिजन,वर्ल्ड्स, एंड लाइफ: अ डेकेडल स्ट्रैटजी फॉर द प्लैनेटरी साइंस एंड एस्ट्रोबायोलॉजी 2023-2032 शीर्षक की रिपोर्ट दस साल में एक बार में किया जाने अहम सर्वे होता है जिसे अमेरिका के यूएस नेशनल एकेडेमिक्स ऑफ साइंसेस, इंजीनियरिंग,  एंड मेडिसन तैयार करता है. इसे नासा के निवेदन पर तैयार किया जाता है जिसमें आने वाले दशक में महत्वपूर्ण लक्ष्यों की पहचान की जा सके.

    यूरेनस पर ध्यान देने का वक्त
    इस रिपोर्ट के अनुसार अब यूरेनस पर ध्यान देने का वक्त आ गया है. रिपोर्ट में लिखा गया है कि कमेटी यूरेनस ऑर्बिटर और प्रोब (UOP) की 2023-32 के दशक के लिए नए फ्लैगशिप अभियान की शुरुआत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता का फैसला करती है. यह प्रोब यूरेनस कक्षा में कई साल की यात्रा पर जाएगा, जहां वहां के वायुमंडल का अध्ययन करेगा.

    सौरमंडल का सबसे अजीब ग्रह
    यह अभियान इस विशाल बर्फीले ग्रह और उसके चंद्रमाओं के बारे में अभूतपूर्व जानकारियों का खजाना हासिल करेगा. यह ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे अजीब और रहस्यमयी पिंडों में से एक है. यह सौरमंडल का इकलौता ऐसा ग्रह है जिसकी घूर्णन की धुरी इतनी झुकी है कि वह लगभग ग्रहों की कक्षा के तल के समानांतर है. इसके जैसे छल्ले सौरमंडल में और कहीं नहीं मिलते हैं. और यहां से रहस्यमयी एक्स विकिरण भी उत्सर्जित होता है.

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    यूरेनस (Uranus) सौरमंडल का सबसे अजीब ग्रह माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    गहन पड़ताल का हकदार
    इन सब को देखते हुए कमेटी को लगता है कि यूरेसन गहन पड़ताल का हकदार है, जिससे सौरमंडल के विकास के कई रहस्यों को बेहतर समझा जा सकता है. इससे पहले नासा का ही वॉयेजर-2 1986 में इस ग्रह के  पास से गुजरा था. इस पैनल ने 2030 के दशकमें कई लॉन्च विंडो, यानि प्रक्षेपण के उपयुक्त समय की भी पहचान की है जिसमें सबसे पहले 2031 का है.

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    यूरेनस और उसके चंद्रमा
    ग्रहों के लिए अभियान भेजना एक लंबा खेल है. यूरेनस की आंतरिक ऊर्जाकम है, इसका वायुमडंल सक्रिय है और इसका जटिल मैग्नेटिक फील्ड कई पहेलियां खड़ी करता है. माना जाता है कि पुरातनकाल में किसी बड़े पिंड से टकराव के कारण इसकी धुरी का झुकाव बहुत ज्यादा बदल गया था और शायद उसी की वजह से उसके छल्ले और चंद्रमा बने थे. यूरेनस के विशाल बर्फीली चट्टान वाले चंद्रमाओं में चौंकाने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के संकेत वॉयेजर-2 से मिले हैं. यहां महासागरीय संसार होने के भी अनुमान हैं.

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    यूरेनस (Uranus) के चंद्रमाओं में जीवन के अनुकूल होने की स्थितियां होने की संभावना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    यहां जीवन की सबसे ज्यादा उम्मीद
    महासागरीय संसारों में खगोलजीवविज्ञानियों की विशेष रुचि है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन भूगर्भीय रूप से सक्रिय पिंडों के महासागरों के तलों में ज्वालामुखी सुराखों की वजह से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र फलते फूलते हैं जैसा कि पृथ्वी के महासागरों के जलऊष्मीय सुराखों में होता है. सौरमंडल में इस तरह के बहुत से पिंड पहचाने गए हैं और इनमें ही पृथ्वी से बाहर जीवन होने के सबसे प्रबल दावेदारी है.

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    कमेटी ने शनि के चंद्रमा एनसॉलेडस की इस लिहाज से पहचान की है और इसे दूसरी प्राथमिकता के तौर पर चुना है. इस अभियान को एनसेलेडस ऑर्बीलैंडर नाम दिया है. लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ये अभियान मूर्त रूप ले पाएंगे क्योंकि इससे पहले 2013-22 तक के लिए यूरेनस के लिए अभियान की अनुशंसा की गई थी, लेकिन तब उसकी प्राथमिकता कम थी.

    Tags: Nasa, Research, Science, Solar system, Space

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