NASA ने जारी की विशेष तस्वीरें, दे रहीं हैं सूर्य के कोरोना के दुर्लभ जानकारी

NASA ने जारी की विशेष तस्वीरें, दे रहीं हैं सूर्य के कोरोना के दुर्लभ जानकारी
सूर्य के वायुमंडल के बारे में बहुत से गूढ़ जानकारी उन तस्वीरों स मिेलेगी. (सांकेतिक तस्वीर)

नासा (NASA) ने ऐसी तस्वीरों को जारी किया है जो सूर्य (Sun) के वायुमंडल की हलचल की दुर्लभ गतिविधियों की जानकारी दे रही हैं. ऐसी तस्वीरें पृथ्वी से लेना संभव नहीं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2020, 10:44 PM IST
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नई दिल्ली:  इस समय दुनिया में कोरोना सार्स कोव-2 (SARS Cov 2) नाम के वायरस की याद दिलाता है. इस वायरस की वजह से दुनिया भर में कोविड-19 बीमारी फैली है जो डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को मार चुकी है. लेकिन सूर्य (Sun) का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के लिए कोरोना का मतलब कुछ और ही है. काफी समय पहले से ही सूर्य के वायुमंडल के बाहरी हिस्से को कोरोना (Corona) नाम दिया गया था. सूर्य की ताजा तस्वीरों ने यह उम्मीद जगाई है कि इसके कई रहस्यों पर अब पर्दा उठ सकेगा.

कैसे ली गईं थी ये तस्वीरें
 नासा के हाई रिजोल्यूशन कोरोनल इमेजर या हाइ-सी ( Hi-C) की ओर से जारी ताजा तस्वीरें बहुत सी जानकारी वैज्ञानिकों  दे रही है.  हाई सी एक छोटा से अल्ट्रावॉयलेट टेली स्कोप है जो एक रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में गया था और पृथ्वी पर गिरते समय उसने पांच मिनट में सूर्य की तस्वीरें ली थीं.

क्या दिख रहा है इन तस्वीरों में
सूर्य की सतह और उसके वायुमंडल पर होने वाली हलचल हमेशा से ही वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली रही है. इन तस्वीरों में सूर्य के वायुमंडल के वे क्षेत्र में दिखाई दे रहे हैं जो अब तक ठीक से दिखाई नहीं देते थे. इन क्षेत्रों में गर्म प्लाज्मा के महीन धागे  लिपटे दिखाई दे रहे हैं.



Nasa, Moon, Mars
नासा की आने वाले सालों में कई बड़ी योजनाएं हैं..


क्या अहमियत है इन तस्वीरों की
 अलाबामा के हंट्सविले स्थित नासा के मार्सल स्पेस फ्लाइट सेंटर के सोलर फिजिसिस्ट ऐमी वाइनबर्गर कहती हैं कि सूर्य के वायुमंडल में ऊर्जा कैसे स्थान परिवर्तन करती है यह समझने के लिए ये महीन रेशे की खोज बहुत अहम है.  इससे खगलविदों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कोरोना सूर्य की सतह से  इतना ज्यादा गर्म क्यों है.

पहले नहीं ली जा सकी थी इस तरह की तस्वीरें
कोरोना सूर्य की सतह के मुकाबले कई सौ गुना ज्यादा गर्म माना जाता है. यहां कुछ नए रेशे 200 किलोमीटर ज्यादा बड़े होते हैं. इन्हें इससे पहले कभी देखानहीं जा सका था क्योंकि इस तरह की तस्वीरें ही ली नहीं जा सकी थीं.

सूर्य की बहुत सी बातों से हैं हम अनजान
एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित नए शोध की सहलेखिका रहीं वाइनबर्गर का मानना है कि हम उन रेशों को वहां से बाहर आते देख रहे हैं जहां हमारे उपकरण कुछ नहीं देख सकते थे. हाई-सी ने यह सौर दृश्य मई 2018 को ये तस्वीरें ली थी जब सूर्य पर चुंबकीय गतिविधियां हो रही थीं इसमें  प्लाज्मा रेशों वाले इलाके हाई-सी तस्वीरों में दिखाई दे रहे हैं. इन तस्वीरों से साफ होता है कि अभी सूर्य की बहुत सी चीजों का खोजा जाना बाकी है.

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सूर्य के बारे में बहुत सी जानकारी पृथ्वी से ही हासिल करना संभव नहीं है. सांकेतिक फोटो.


पृथ्वी की सतह से नहीं किया जा सकता इनका अध्ययन
उल्लेखनीय है कि पृथ्वी से सूर्य के सतह पर आने वाले सौर तूफान के बारे में जानाकारी आने में कई बाधाएं हैं. सूर्य से आने वाली रेडियो तरंगें पृथ्वी पर आयनमंडल की वजह से नहीं पहुंच पाती. ऐसे में अंतरिक्ष स्थित टेलीस्कोप उनका अध्ययन कर सकते हैं.

इस  मिशन से सुलझाएगा नासा यह  समस्या
इस समस्या के समाधान के लिए नासा सन रेडियो इटरफेरोमीटर स्पेस एक्सपेरिमेंट (SunRISE) मिशन के तहत ये छह सैटेलाइट पृथ्वी की भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit) में भेजने की योजना बना रहा है ये क्यूबसैट जुलाई 2023 को प्रेक्षेपित किए जाएंगे. एक ही तरह के ये छह सैटेलाइट पृथ्वी की भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit)  के ठीक ऊपर भेजे जाएंगे, जो एक रेडियो टेलीस्कोप की तरह काम करेंगे और सौर तूफान संबंधी वह अध्ययन कर सकेंगे जो पृथ्वी से किया जाना संभव नहीं है.

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