नासा ने बताया, आखिर क्या है हमारे सौरमंडल का आकार

नासा ने बताया, आखिर क्या है हमारे सौरमंडल का आकार
नए शोध ने बताया कि हमारे सौरमंडल का आकार पिचके हुए क्रसान्ट की तरह है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

NASA के आंकड़ों का उपयोग कर शोधकर्ताओं ने सूर्य (Sun) के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect) के जरिए पता लगाया कि हमारे सौरमंडल (Solar system) का आकार (Shape) कैसा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 7:37 PM IST
  • Share this:
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे सौरमंडल (Solar System) का आकार क्या हो सकता है. आमतौर पर इसे कह सकते हैं जहां तक हमारे सूर्य (Sun) और उसके चक्कर लगाने वाले ग्रहों का प्रभाव हैं वह हमारा सौरमंडल हैं. लेकिन इसके आकार के बारे में ताजा शोध ने एक धारणा तोड़ी है. पहले इसे एक धूमकेतू (Comet) के आकार का माना जा रहा था, लेकिन इस शोध ने का दावा है कि हमारा सौरमंडल एक पिचके हुए क्रसान्ट (Croissant) की तरह है. नासा ने इस आकार का ऐलान हमारे सौरमंडल के आसपास चुंबकीय बुलबले (Magnetic Bubble) के आकार के आधार पर बताया है.

क्या होता है कसान्ट
क्रसान्ट (Croissant)  एक खास तरह की मक्खन वाली पपड़ीदार पेस्ट्री होती है, जो अर्द्धचंद्राकार की तरह होती है. यह ऑस्ट्रिया में पहले ज्यादा बना करती थी, लेकिन समय के साथ इसका फ्रेंच फ्लेवर दुनिया भर में मशहूर हो गया. इसके साथ ही इसका आकार भी मशहूर हो गया. यह वास्तव में एक रोल होता है जो बीच में से फूला हुआ होता है.

पूर्व के अभियानों का आंकड़ों का उपयोग
नासा ने अपने पूर्व के अभियानों से मिले आंकड़ों का उपयोग कर हमारे सौरमंडल का एक मॉडल बनाया जिसके मुताबिक सौरमंडल का आकार सूर्य के मैग्नेटिक प्रभाव से जो बुलबुला बना है जिसे हेलियोस्फियर (heliosphere) कहते हैं. नासा ने इसी मॉडल के आधार पर निष्कर्ष निकाला है कि सौरमंडल का आकार एक पिचके हुए क्रसान्ट के जैसा है.  इससे पहले एक शोध ने सौरमंडल का आकार लंबी पूंछ वाले धूमकेतु (Comet) के आकार का बताया था.



हेलियोस्फियर की भूमिका
हेलियोस्फियर शोधकर्ताओं के लिए कम दिलचस्प नहीं है. यह हमारे सौरमंडल के लिए एक मैग्नेटिक शील्ड की तरह काम करता जिससे उसकी हमारी गैलेक्सी के दूसरे हिस्सों से रक्षा होती है. नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार इस चुंबकीय बुलबले के अंदर हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह समाए हुए हैं.  यह बुलबुला सौरपवनों के लिए सूर्य से लगातार निकलती सामग्री से बना है जिसके साथ चुंबकीय प्रभाव भी फैला हुआ है.



क्या है इस बुलबुले के बाहर
इस बुलबुले के बाहर तारों के बीच का माध्यम है जिसमें आयनीकृत गैसे और हमारी गैलेक्सी के दूसरे तारा समूह की मैग्नेटिक फील्ड शामिल है. अभी तक वैज्ञानिकों को लगता था कि हेलियोस्फियर का आकार एक धूमकेतु (Comet) की तरह था, जिसमें आगे का हिस्सा गोल, जिसे नाक कहा जाता है, और पीछे का हिस्सा पूंछ की तरह समझा गया था.

पृथ्वी की ओर मुड़ रहा है सूर्य की सतह पर यह धब्बा, जानिए कितना नुकसानदेह है ये

कैसे किया गया अध्ययन
हेलियोस्फियर का आकर अंदर ने मापना बहुत मुश्किल है.  इस का सबसे करीब का किनारा पृथ्वी ले 10 अरब मील दूर है. नासा का इंटरस्टेलर बाउंड्री एक्सप्लोरर (IBEX) अभियान इस हेलियोस्फियर का अध्ययन करता है. इस अध्ययन में बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शामिल थे जिसमें मेरव ओफेर इसकी प्रमुख लेखिका हैं. शोधकर्ताओं ने नासा प्लैनेटरी साइंस मिशन के आंकड़ों का उपयोग कर हेलियोस्फियर के बुलबुले की जगह को भरने वाली सामग्री के बर्ताव के गुणों का पता लगाया और उसकी नए सिरे से सीमा निर्धारित की.

Sun
सूर्य से निकली सौर पवनों और उसके मैग्नेटिक प्रभाव से ही सौरमंडल का आकार निश्चित होता है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे बना यह आकार
ओफेर ने बताया, “आमतौर पर आयन उष्मागतिकी प्रक्रियाओं पर हावी होते हैं, इसिलए सभी कुछ गोल होता है, लेकिन वे बहुत ही जल्दी सिस्टम को छोड़ देते हैं. इस वजह से हेलियोस्फियर पिचक जाता है.

शांति के समय में भी सूरज नहीं रहता इतना शांत, शोध ने किया दावा 

यह हेलियोस्फियर का आकार दूसरी दुनिया में जीवन ढूंढने के सवाल का भी हिस्सा है. ब्रह्माण्ड एस आने वाले नुकसानदायक विकरण किसी ग्रह की जीवन की अनुकूलता को छीन सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारा सौरमंडल ऐसे विकिरणों से बचा है क्योंकि इसका सुरक्षा कवच बहुत मजबूत है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज