जानिए शनि के टाइटन के वायुमंडल पर मिला यह अणु क्यों है अजीब

वैज्ञानिकों को इस बात से हैरानी है कि टाइटन (Titan) के घने वायुमंडल (Atmosphere) में यह अणु (Molecule) बिना प्रतिक्रिया किए कायम कैसे रहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)(प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)
वैज्ञानिकों को इस बात से हैरानी है कि टाइटन (Titan) के घने वायुमंडल (Atmosphere) में यह अणु (Molecule) बिना प्रतिक्रिया किए कायम कैसे रहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)(प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

शनि ग्रह (Saturn) का चंद्रमा टाइटन (Titan) के वायुमंडल में एक अणु (Molecule) की मौजूदगी ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है क्योंकि यह या तो प्रयोगशाला में रह सकता है या फिर अंतरतारकीय अंतरिक्ष में.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 7:19 AM IST
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नासा (NASA) ने शनि ग्रह (Saturn) के चंद्रमा (Moon) टाइटन (Titan) के वायुमंडल (Atmosphere) में अप्रत्याशित रूप से एक कार्बन अणु (Carbonic Molecule) की खोज की है. खगोलविदों की टाइटन में खासी दिलचस्पी है क्योंकि यह की लिहाज से पृथ्वी (Earth) के जैसा ही खगोलीय पिंड है. पृथ्वी से इतनी समानता हमारे सौरमंडल के किसी और ग्रह या उपग्रह में नहीं हैं.

क्या है यह अजीब अणु
नासा की रिपोर्ट के अनुसार यह पदार्थ साइक्लोप्रोपेनाइलडीन है जिसका रासायनिक सूत्र C3H2 है जो टाइटन के ऊपरी वायुमंडल में पाया गया  है. इस पदार्थ की मौजूदगी  इस उपग्रह पर और भी जटिल पदार्थों की मौजूदगी का इशारा हो सकते हैं.

क्यों हैरान करने वाली खोज है ये
साइक्लोप्रोपेनाइलडीन की टाइटन के घने वायुमंडल में खोज एक तरह से हैरान करने वाली है क्योंकि या अणु दूसरे अणुओं के संपर्क में आते ही उनसे आसानी से प्रतिक्रिया कर जाता है. एस्ट्रोनिमिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के प्रमुख वैज्ञानिक कॉर्नर निक्सन ने बताया, “जब मैंने यह जाना कि मैं साइक्लोप्रोपेनाइलडीन को देख रहा हूं, तो मेरा पहला विचार था, ‘यह तो बहुत ही अप्रत्याशित है’



खास श्रेणी का अणु है यह
साइक्लोप्रोपेनाइलडीन जैसे अणु जैविक कोशिकाओं में डीएनए और आरएनए के न्यूक्लोबेस की रीढ़ का काम करते हैं. डीएनए में जीव की सारी जेनेटिक जानकारी छिपी होती है. ऐसे अणुओं की एक चक्रीय रासायनिक संरचना होती है. निक्सन के साथ C3H2 पर काम करने वाले एलेक्जेंडर थेलान का कहना है कि  साइक्लोप्रोपेनाइलडीन का चक्रीय स्वभाव इसे बहुत ही अहम अणु बना देता है.

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नासा (NASA) के अंतरिक्ष यानों (Space probes) ने टाइटन (Titan) के बारे में काफी जानकारी हासिल की है. . (तस्वीर: Pixabay)


सबसे छोटा?
इसके अलावा साइक्लोप्रोपेनाइलडीन से पहले बेन्जीन C6H6 ही ऐसा चक्रीय अणु था जो इस तरह का सबसे छोटा अणु माना जाता था, लेकिन अब साइक्लोप्रोपेनाइलडीन सबसे छोटा चक्रीय अणु है. अह शोधकर्ताओं का ध्यान टाइटन पर साइक्लोप्रोपेनाइलडीन से बड़े अणुओं का अध्ययन करना होगा.लेकिन उसके लिए वे जानना चाहते हैं कि टाइटन के वायुमंडल में कैसी रासायनिक प्रतिक्रियाएं हो रही है जो जटिल अणुओं का निर्माण कर रही हैं और वर्षा से सतह तक पहुंचा रही हैं.

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कहां कायम रह सकता है यह अणु
एक बहुत ही कम पाया जाना वाला कार्बन अणु साइक्लोप्रोपेनाइलडीन इतना अधिक प्रतिक्रियाशील अणु है कि यह पृथ्वी पर केवल प्रयोगशाला के हालातों में पाया जा सकता है.  वास्तव में यह दुर्लभ अणु इससे पहले हमारे सौरमंडल या उसके बाहर कभी भी किसी वायुमंडल में नहीं पाया गया था. अगर यह किसी और जगह पर स्थायी रह सकता है तो वह अंतरातारकीय खाली अंतरिक्ष हो सकता है. लेकिन यह उन जटिल जैविक अणुओं के निर्माण में भूमिका निभा सकता है जो बाद में जीवन की शुरुआत कर सकते हैं.

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शनि ग्रह (Saturn) का यह उपग्रह पृथ्वी (Earth) से बहुत मिलता जुलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


तो फिर टाइटन पर कैसे?
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर साइक्लोप्रोपेनाइलडीन टाइटन के वायुमंडल में कैसे रह पाता है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि टाइटन का ऊपरी वायुमंडल इतना पतला है कि वहां शायद साइक्लोप्रोपेनाइलडीन कायम रह सकता हो, लेकिन ऐसा बाकी वायुमंडल वाले ग्रहों पर क्यों नहीं है यह पता लगाने वाली बात है.

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टाइटन शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा है और उसका वायुमंडल पृथ्वी के वायुमंडल से चार गुना ज्यादा घना है. इसी वजह से यहां रासायनिक क्रियाएं बहुत ज्यादा होने की संभावना रही है. वैज्ञानिकों को लगता है कि आज जैसे हालात टाइटन में हैं वैसे कभी पृथ्वी पर 3.8 से 2.5 अरब साल पहले हुआ करते थे.
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