चांद और मंगल के बाद NASA का शुक्र ग्रह के लिए VERITAS मिशन, जानिए क्या है यह

चांद और मंगल के बाद NASA का शुक्र ग्रह के लिए VERITAS मिशन, जानिए क्या है यह
शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए यह मिशन तैयार किया जा रहा है जो कई रहस्यों पर से पर्दा उठा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) ने यूरोपीय देशों के साथ मिल कर शुक्र ग्रह (Venus) के अध्ययन के लिए वेरिटस (VERITAS) मिशन की योजना बनाई है.

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इस समय पूरी दुनिया यह जानती है कि नासा (NASA) का ध्यान अभी चंद्रमा (Moon) और फिर उसके बाद मंगल (Mars) के अभियानों पर लगा हुआ है. लेकिन लगता है कि ऐसा बिलकुल नहीं हैं. हाल ही में नासा ने शुक्र ग्रह (Venus) के अध्ययन के लिए एक नए अभियान की घोषणा की है. छह साल बाद लॉन्च होने वाले अभियान में यूरोप के कुछ देशों की भी सहभागिता है.

क्या है यह अभियान
नासा ने हाल ही में अपने इस वैरिटस मिशन (VERITAS Mission) की विस्तार से जानकारी दी है. नासा का कहना है कि इस मिशन का उद्देश्य  पृथ्वी का जुड़वा ग्रह कहे जाने वाले ग्रह के बारे में गहराई से जानना है. उल्लेखनीय है कि जहां शुक्र ग्रह का निर्माण पृथ्वी के साथ ही हुआ था, वहीं यह ग्रह कई लिहाज से पृथ्वी से काफी अलग है.

पृथ्वी की तरह वहां जीवन क्यों नहीं
वैज्ञानिक दोनों ग्रहों को सिस्टर प्लैनेट कहते हैं. नासा का कहना है कि दोनों ग्रह जब एक ही साथ और एक जैसे ही बने थे तो दोनों में इतना अंतर कैसे आ गया. यही जानना वेरिटस का उद्देश्य है.  इसके अलावा शोधकर्ताओं को विश्वास है कि इससे पृथ्वी के विकास के बारे में भी जानकारी मिल सकती है.



Moon
इस मिशन से पहले नासा साल 2024 में दो लोगों को चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या काम करेगा वैरिटस
नासा की योजना वेरिटस को साल 2026 में लॉन्च करने की है. उसका यह मिशन फ्रेंच स्पेस एजेंसी (FSA), जर्मनी स्पेस एजेंसी (GSA) और इटैलियन स्पेस एजेंसी (ISA) के सहयोग से तैयार हो रहा है. इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह की कक्षा का चक्कर लगाएगा और एक हाई टेक रेडार सिस्टम की मदद से ग्रह का एक 3डी मैप बनाएगा. इसके अलावा यह ग्रह के आंतरिक हिस्सों का अध्ययन करने के लिए उसकी ग्रैविटेशनल फील्ड का भी मापन करेगा. इस अभियान से यह भी अध्ययन किया जाएगा कि शुक्र ग्रह की सतह किन चीजों से बनी है इसके लिए वेरिटस नियर इंफ्रा स्पैक्ट्रोमीटर का उपयोग करेगा.

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पृथ्वी से इतना अलग क्यों है शुक्र
नासा की जेट प्रोपलशन लैबोरेटरी में वेरिटस की प्रमुख अन्वेषणकर्ता सुजैन स्म्रेकर शुक्र ग्रह को एक दुर्घटना में मिला खगोलीय उपहार कहती हैं. उनका कहना है, “आपके पास दो प्लैनेट हैं, पृथ्वी और शुक्र, दोनों ने एक ही समय में शुरुआत की थी. लेकिन उनका विकास बिलकुल अलग-अलग तरह से हुआ लेकिन हम यह नहीं जानते ऐसा क्यों हुआ.

Mars
नासा अगले दशक में मंगल पर इंसान भेजने की जोरों से तैयारी कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पूरे ग्रह का खास मैप
नासा की प्रेस रिलीज के मुताबिक उसका उद्देश्य शुक्र के भूगर्भीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करना है. शोधकर्ताओं का कहना है कि हाई रिजोल्यूशन वाले 3डी टोपोग्रॉफिकल मैप्स के जरिए वेरिटस उन संरचनाओं के बारे में बताएगा जिनके बारे में अब तक पता नहीं लगाया गया था. मिशनल शुक्र ग्रह की सतह की संरचना का पहला मल्टी स्पैक्ट्रल मैप भी बनाएगा.

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सुजैन का कहना है कि शुक्र ग्रहों के रहस्यों को जानने कि लिए हमें शुक्र के आंतरिक भागों के बारे में जानना होगा. वह उसके भूगर्भीय और वायुमंडलीय उद्भव के लिए एक तरह का इंजन रहा है. क्या शुक्र और पृथ्वी मूल रूप से खास संसार हैं या दोनों के बीच केवल बाहर का ही अंतर है. इस तरह के सवालों के जवाब हमें यह समझने में मदद करेंगे कि किसी भी पथरीले ग्रह में जीवन की अनुकूलता की क्षमता कैसे  आ जाती है.
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