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जानिए नासा ने क्यों दिया गामा रे स्पेस टेलीस्कोप का प्रस्ताव

जानिए नासा ने क्यों दिया गामा रे स्पेस टेलीस्कोप का प्रस्ताव

नासा का यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष से आने वाली गामा विकिरणों (Gamma Rays) का अध्ययन कर कई रहस्य उजागर करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा का यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष से आने वाली गामा विकिरणों (Gamma Rays) का अध्ययन कर कई रहस्य उजागर करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) ने गैलेक्सी स्तर पर पोजीट्रॉन और मिल्की वे (Milky Way) के विकास के अध्ययन के लिए एक गामा रे स्पेस टेलीस्कोप (Gama Rays Telescope) का प्रस्ताव दिया है.

    जब भी अंतरिक्ष अवलोकनों  की बात होती है, तो इसमें दो पहलू अहम होते हैं. इसके लिए उपयोग में लाया जाना टेलीस्कोप (Telescope) कौन सा है और वह टेलीस्कोप कहां है. टेलीस्कोप वैसे तो क्षमता के आधार पर कई तरह के होते हैं, लेकिन यहां बात हो रही है, ऑप्टिकल या इंफ्रारेड, रेडियो या फिर अन्य टेलीस्कोप की. इसके अलावा टेलीस्कोप की स्थिति भी सटीक आंकड़ों को हासिल करने में मददगार होती है. इसमें आज की तारीख अगर टेलीस्कोप अंतरिक्ष में हो सबसे बेहतर होता है. नासा (NASA) ने अपने भावी अध्ययनों के लिए एक गामा रे स्पेस टेलीस्कोप की अनुमति के लिए प्रस्ताव दिया है जिसका उद्देश्य गैलेक्सी पोजीट्रॉन और हमारी गैलेक्सी (Milky Way का अध्ययन करना होगा.

    क्या नाम है इस टेलीस्कोप का
    नासा ने इस नए टेलीस्कोप का प्रस्ताव चुनाव तारों की उत्पत्ति, उनका जीवन चक्र, और हमारी गैलेक्सी का निर्माण करने वाले मूल रासायनिक तत्वें का अध्ययन करना है.  इस गामा रे टेलिस्कोप का नाम कॉप्टन स्पैक्ट्रोमीटर एंड इमेजर (COSI) है. नासा उम्मीद कर रहा है कि इस टेलीस्कोप को वह साल 2025 में आधुनिक छोटे खगोलभौतकीय अभियान के तौर पर प्रक्षेपित कर सकेगा.

    दो साल पहले मिला था नासा को प्रस्ताव
    दरअसल, नासा को एस्ट्रोफिजिक्स एस्ट्रोफिजिक्स एक्सप्लोरर्स प्रोग्राम के तहत साल 2019 में 18 टेलीस्कोप का प्रस्ताव मिला था, इसमें से उसने चार को मिशन के अवधारणा अध्ययन के लिए चुना था. इनका नासा के वैज्ञानिक और इंजीनियरों के एक पैनल द्वारा सविस्तृत समीक्षा करने के बाद, नासा ने COSI का चयन किया.

    मिल सकेंगे कई सवालों के जवाब
    वॉशिंगटन में नासा के साइंस मिशन के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर थॉमस जुर्बुशेन का कहना है कि 60 सालों से अधिक समय से नासा आविष्कारक और  लघु स्तर के अभियानों के लिए मौके प्रदान कर रहा है जिससे जानकारी का वह अभाव दूर हो सके जो अनउत्तरित सवालों से पैदा हुआ है. कोसी हमारी ही गैलेक्सी  मिल्की वे की उत्पत्ति करने वाले रासायनिक तत्वों से संबंधित सवालों के जवाब खोजेगा.

    गैलेक्सी और पृथ्वी के रहस्य
    कोसी का काम पृथ्वी के निर्माण में लगे जरूरी घटकों की भी पड़ताल करेगा. मिल्की वे में जब विशाल तारों के विस्फोट से पैदा होने वाले रेडियोधर्मी परमाणुओं निकलने वाली गामा विकिरणों का अध्ययन करेगा. इसके अलावा कोसी का हमारी गैलेक्सी में पोजीट्रॉन की रहस्यमयी उत्पत्ति की पड़ताल भी करेगा.

    कितनी लागत होगी इसकी
    पोजीट्रॉन एक एंटईइलेक्ट्रॉन के रूप में जाना जाता है, जो उपपरमाणु कण है जिसका भार इलेक्ट्रॉन के बराबर ही है, लेकिन उसका आवेश इलेक्ट्रॉन की तरह ऋणात्मक ना होकर धनात्मक है. बर्केले की कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के जॉन टॉमसिक कोसी के प्रमुख अन्वेषणकर्ता होंगे और इस अभियान की लागत करीब 14.5 करोड़ डॉलर की होगी.

    पहले गुब्बारे पर किया था प्रयोग
    कोसी की टीम दशकों से अपने तकनीक विकसित कर रही है. इसके लिए उसने वैज्ञानिक गुब्बारों का उपयोग किया है. साल 2016 में टीम ने नासा के अत्याधिक दबाव वाले गुब्बारे पर गामा विकिरण वाला एक उपकरण लगाया था, जो भारी वजन उठाने वाली लंबी उड़ान के लिए तैयार किया  गया था.

    नासा का एक्सप्लोरर कार्यक्रम उसका सबसे पुराना सतत चलने वाला कार्यक्रम है.  इसने बार बार कम लागत वाली अंतरिक्ष तक पहुंच प्रदान करने का काम किया है जिसमें खगोलभौतिकी और हेलियोभौतिकी कार्यक्रम संबंधित अंतरिक्ष शोध शामिल हैं.  1958 में पृथ्वी की रेडियो विकिरण पट्टी की खोज करने वाले एक्सप्लोरर 1 के प्रक्षेपण के  बाद से  इस कार्यक्रम ने 90 अभियान प्रक्षेपित किए हैं. नासा का एक अन्य एक्सप्लोरर अभियान,  द कॉस्मिक बैकग्राउंड एक्सप्लोरर, ने तो इसके प्रमुख अन्वेषणकर्ताओं के लिए  साल 2006 में नोबेल पुरस्कार भी जीता था.

    Tags: Nasa, Research, Science, Space

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