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कोरोना के कहर के बीच नासा ने किया बड़े अभियान का ऐलान, यह करेगा पड़ताल

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: March 31, 2020, 6:53 PM IST
कोरोना के कहर के बीच नासा ने किया बड़े अभियान का ऐलान, यह करेगा पड़ताल
नासा मंगल पर इंसान भेजने की तैयारी कर रहा है.

नासा (NASA) ने सौर तूफान (Solar Storms) के अध्ययन के लिए छह सैटेलाइट (Cubesats) भेजने के अभियान की घोषणा की है. जुलाई 2023 तक इन सैटेलाइट को भेजने की तैयारी है जो सूर्य पर आने वाले सौर तूफान का अध्ययन कर उसके पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी देंगे.

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  • Last Updated: March 31, 2020, 6:53 PM IST
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नई दिल्ली: इस समय अमेरिका सहित पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वजह से फैल रही कोविड-19 महामारी से बुरी तरह से जूझ रही है. दुनिया भर में वैज्ञानिक इस बीमारी के इलाज के लिए शोध कर रहे हैं. दुनिया के कई देश लॉकडाउन की स्थिति में हैं. इसी बीच नासा ने 30 मार्च को अपने एक महत्वकांक्षी अंतरिक्ष अभियान का ऐलान किया है.

छह एक ही तरह के सैटेलाइट भेजे जाएंगे
नासा का कहना है कि वह सौर तूफानों के अध्ययन केलिए छह क्यूबसैट (Cubesats) प्रक्षेपित करेगा. ये छह सैटेलाइट पृथ्वी की भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit)  में जाकर काम करेंगे. स्पेसन्यूज में प्रकाशित लेख के अनुसार नासा ने सन रेडियो इटरफेरोमीटर स्पेस एक्सपेरिमेंट (SunRISE) मिशन के तहत भेजे जाएंगे.

इस प्रोग्राम का है यह मिशन



नासा के हेलियोफिजिक्स (Heliophysics) प्रोग्राम के लिए यह मिशन "मिशन ऑफ अपोर्चिनिटी" के तौर पर चुना गया है. इस  मिशन केतहत क्यूबसैट जुलाई 2023 को प्रेक्षेपित किए जाएंगे और इसकी लागत 62.6 मिलियन यूएस डॉलर होगी.



NASA Solar storm
सैौर तूफान पृथ्वी पर खासा असर डालते हैं औरइनका पृ्थ्वी से अच्छे अध्ययन करना संभव नहीं हैं.


क्या करेंगे ये सैटेलाइट
सनराइज (SunRISE) अभियान के तहत एक ही तरह के छह सैटेलाइट पृथ्वी की भू-स्थिर कक्षा (Geostationary orbit)  के ठीक ऊपर भेजे जाएंगे. दस किलोमीटर के दायरे में फैले ये सैटेलाइट एक रेडियो टेलीस्कोप की तरह काम करेंगे और सौर तूफान संबंधी वे अध्ययन कर सकेंगे जो पृथ्वी पर संभव नहीं है.

क्या दिक्कत है पृथ्वी से यह अध्ययन करने के लिए
सूर्य से जो किरणें आती हैं वे तो पृथ्वी तक पहुंच जाती है, लेकिन वहां से जो रोडियो तरंगे आती हैं वे पृथ्वी के आयनोस्फियर की वजह से यहां तक नहीं पहुंच पातीं. ऐसे में इन रोडियो तरंगों को पृथ्वी पर स्थित टेलीस्कोप नहीं पकड़ पाते.

सौर तूफान को समझने में मिलेगी मदद
इस अभियान से वैज्ञानिक सौर तूफान के कारणों को समझने की कोशिश कर सकेंगे. ये छह सैटेलाइट  सूर्य पर होने वाली गतिविधियों पर नजदीकी और ज्यादा बेहतर नजर रख सकेंगे. मिशिगन यूनिवर्सिटी के जस्टिन कास्पर जो इस सनराइज अभियान के प्रमुख शोधकर्ता हैं, इससे काफी उत्साहित हैं.

Cubesat, NASA , Solar Storm
छह सैटेलाइट एक क्यूबसैट के तौर पर प्रक्षेपित किए जाएंगे.


क्या महत्व रखते हैं ये सौर तूफान
सौर तूफान सूर्य की सतह पर उठने वाले आग के तूफान हैं. इनसे निकलने वाले विकिरण पृथ्वी के पर्यावरण और मौसम को नुकसान पहुंचाने में बहुत ज्यादा सक्षम होते हैं. इसके अलावा वे सौर मंडल में भी अप्रत्याशित परिवर्तन कर सकते हैं. इनसे अंतरिक्ष में हमारे सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष यात्रियों को भी नुकसान होने की संभावना होती है.

क्या समझ सकेंगे हम सौर तूफान के बारे में अब
कास्पर का मानना है, “हम  सूर्य की सतह पर उठने वाली लपटों को शुरू से देख सकते हैं और साथ ही कोरोनल मास इजेक्शन (CME) को भी उठते हुए देख सकते हैं. लेकिन हम नहीं जानते कि क्या इससे कोई पार्टिकल रेडिएशन होता है या नहीं और यह भी नहीं जानते कि क्या ये विकरण धरती तक पहुंच पाते हैं या नहीं”

इस अवधारणा में हो सकेगा सुधार
उन्होंने बताया, “सूर्य से होने वाले द्रव्यमान उत्क्षेपण (Mass Ejection) से होने वाले पार्टिकल एक्सीलरेशन (Particle Accelaration) को लेकर तरह तरह की अवधारणाएं हैं ऐसे में अगर हम यह समझ सके कि CME के किस हिस्से में चमक ज्यादा है तो हम इस बारे में सही और प्रमाणिक जानकारी हासिल कर सकेंगे.”

Solar Storm
पृथ्वी के आयनोस्फियर के कारण सौर तूफान से आने वाले रेडियो तरंगे पृथ्वी की सतह पर नहीं पहुंच पाती है.


क्या फायदा होगा इस शोध का
इस शोध से पता चल सकेगा कि तेज ऊर्जा वाले पार्टिकल्स कैसे पैदा होते हैं और इससे हमारी पृथ्वी की मौसमी गतिविधियों को कैसे नुकसान पहुंचता है. यह हमारे मौसम विभाग के लिए चेतावनी की  तरह भी काम कर सकता है और सौर तूफान के कारण धरती को होने वाले अन्य नुकसानों की भी जानकारी दे सकता है.

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First published: March 31, 2020, 6:53 PM IST
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