Space और Covid-19 के असर में क्या है समानता, बहुत सीखने को है हमारे लिए

  कोविड-19 और अंतरिक्ष की चुनौतियों में बहुत समानताएं हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
कोविड-19 और अंतरिक्ष की चुनौतियों में बहुत समानताएं हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) और कोविड-19 (Covid-19) मरीजों के समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

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नई दिल्ली: हाल ही में स्पेसएक्स(SpaceX) कंपनी ने दो यात्रियों को ISS पर पहुंचाया. यह किसी निजी कंपनी का इस तरह का पहला अभियान था. इसी वजह से अंतरिक्ष और अंतरिक्ष यात्राएं चर्चा में हैं, लेकिन यह विषय कोरोना वायरस (Corona Virus) को पीछे नहीं छोड़ पा रहा है जिसके खतरे से अमेरिका सहित पूरी दुनिया जूझ रही है. लेकिन कोविड-19 बीमारी और अंतरिक्ष के प्रभावों में एक गहरा संबंध है.

अंतरिक्ष और कोविड-19 में क्या है संबंध
कई लोग कोरोना वायरस और अंतरिक्ष यात्राओं के बीच में संबंध ढूंढ रहे हैं. क्या अंतरिक्ष अनुसंधान का पृथ्वी पर हमारे स्वास्थ्य और कोविड-19 से कोई संबंध है. इस प्रश्न का फोर्ब्स के लेख में विश्लेषण किया गया है. इस सवाल के पर नासा में 18 साल तक सीनियर मेडिकल एडवाइजर रह चुकीं डॉ शर्लिन मार्क का कहना है कि ISS एक लैब की तरह है जहां हमारे वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन और प्रयोग करते हैं कि अंतरिक्ष में हमारा शरीर खुद को कैसे ढालता है. इंसानी शरीर में खुद को ढालने की अद्भुद क्षमता होती है. और ऐसे वह अंतरिक्ष में करता है. शरीर के हर सिस्टम में बदलाव आता है. यहां तक कि उसके इम्यून सिस्टम के साथ साथ प्रजनन तंत्र और व्यवहारिक स्वास्थ्य में भी बदलाव आता है.

Astronauts
अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में कई स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं.

अंतरिक्ष की तरह कोविड-19 भी करता है पूरे शरीर को प्रभावित


मार्क का कहना है कि कोविड-19 के साथ भी यही है, यह भी हमारे शरीर के सभी सिस्टम को प्रभावित करता है. यह हमारे शरीर को बदलाव करने के लिए मजबूर कर रहा है. यही अंतरिक्ष भी हमारे शरीर के साथ करता है. इतना ही नहीं अंतरिक्ष में इंसान का शरीर कम गुरुत्व में ढालने की कोशिश करता है और इसमें उसकी हड्डियों का वजन 3 से 5 प्रतिशत तक एक महीने में ही कम हो जाता है. हास्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों के साथ भी ऐसा ही होता है. इसी तरह का हाल कोविड-19 के मरीजों के साथ भी होता है. अंतरिक्ष में कई यात्रियों खासकर पुरुषों को स्पेस सिकनेस की समस्या का सामना करना पड़ता है. जिसमें उन्हें देखने में परेशानी, सूंघने और चखने की क्षमता कम होना जैसे समस्याएं होती है.

स्त्री पुरुषों में अंतर दोनों मामलों में
जेंडर यानि लिंग के अंतर का प्रभाव अंतरिक्ष और कोविड19 दोनों ही दिखाई देता है.  कोविड-19 में इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है. सभी उम्र में पुरुषों के कोविड-19 से मरने की दोगुनी संभावना है. शोधकर्ता अंतरिक्ष में इम्यून सिस्टम पर पुरुषों और महिलाओं पर कितना अलग अलग प्रभाव पड़ता है.

और ये अजीब समानताएं भी है
जहां अंतरिक्ष यात्रियों में महिलाओं को स्पेस सूट की फिटिंग में समस्या आती है वहीं उन्हें कोरोना वायरस के मामले में भी PPE  की फिटिंग में समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों का आइसोलेशन से जूझना उनके काम का हिस्सा है तो कोविड-19 मरीज को अनचाहा आइसोलेशन झेलना पड़ता है.

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कोरोना के मरीजों को भी अंतरिक्ष यात्रियों की तरह आइसोलेशन झेलना पड़ता है. (प्रतीकात्मक चित्र)


अब अपनाने होंगे ये तरीके
एक खास बात जो कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आई है कि लाखों लोग लॉकडाउन के दौरान डॉक्टर के पास नहीं जा पा रहे हैं और उन्हें टेलीमेडिसिन या टेली हेल्थ या रिमोट डायग्नोसिस का सहारा लेना पड़ रहा है. यानि कि उन्हें  फोन पर या वीडियो कॉलकर डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ रही है. अंतरिक्ष में भी वैज्ञानिकों को धरती पर इसी तरह सलाह लेनी पड़ती है. जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद पर कदम रखा था तब उनकी धड़कन बहुत तेज हो गई थी.  अब कोविड -19 भी हमें सिखा रहा है कि दूर से ही मरीज की स्थिति के बारे में जानने के तरीके खोजने होंगे.

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