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NASA के Spitzer telescope ने मिल्की वे में पकड़ी तारों की जन्मस्थली

नासा का स्पिट्जर टेलीस्कोप हाल ही में रिटायर हुआ है जिसने उस नेबुला की तस्वीरें ली जहां तारे बनते हैं.  (

नासा का स्पिट्जर टेलीस्कोप हाल ही में रिटायर हुआ है जिसने उस नेबुला की तस्वीरें ली जहां तारे बनते हैं. (

नासा (NASA) के रिटायर हो चुके स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप (Spitzer Space Telescope) से हमारी गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way) के उसे इलाके की तस्वीरें मिली हैं जहां तारे (Stars) पैदा होते हैं.

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    ब्रह्माण्ड (Universe) के बारे में हमारे वैज्ञानिक जितना कुछ जान सके हैं, वह कम ही रहता है. यूं तो वैज्ञानिकों ने तारों के पैदा (Birth of Stars) होने के बारे में सिद्धात या व्याख्याएं बना रखी हैं. लेकिन वे अभी तक सप्रमाण और पुष्टि रूप से अब भी उनके बारे में जानने का प्रयास कर रहे हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि तारों के उत्पत्ति की व्याख्या पर पूरे ब्रह्माण्ड की जानकारी टिकी हुई है. इसीलिए जब नासा (NASA) के स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप (Spitzer Space Telescope) के आंकड़ों से हमारी गैलेक्सी मिल्की (Milky Way)वे में तारों की जन्मस्थली की एक तस्वीर सामने आई तो सभी के लिए कौतूहल होना स्वाभाविक था.

    तारों के पैदा होने के बारे में कई सवाल
    जब से वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड, तारों और उनके बीच के स्थान के बारे अध्ययन करना शुरू गिया है. इसमें तारों का हमेशा ही सबसे अधिक महत्व रहा है. तारों की उत्पत्ति के बारे में कई सवाल हैं जो अभी तक पूरी तरह से सुलझे नहीं हैं जैसे तारे कैसे और कहां पैदा होते हैं.  उनकी पैदा होने की जगह कैसी होती है वगैरह, वगैरह.

    यह नेबुला है बहुत अहम
    साल 1958 में रेडियो टेलीस्कोप के जरिए एक नेबुला की खोज हुई जिसे W51 नाम दिया गया. यह हमारी गैलेक्सी मिल्की वे का वह स्थान हैं जहां तारों के निर्माण की सबसे सक्रिय प्रक्रियाएं चलती है. हाल ही में रिटायर हुए नासाके स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप ने इस नेबुला की सबसे ताजा तस्वीर दी है W51 पृथ्वी से 17 हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित है इसे आकाश में रात को तारामंडल एक्विला (constellation Aquila) की दिशा में देखा जा सकता है.



    क्या होते हैं ये नेबुला
    नेबुला तारों के बीच की जगह स्थित धूल हाइड्रोजन, हीलियम और अन्य आयनीकृत गैसों का बादल होता है. नेबुला आम तौर पर बहुत विशाल होते हैं. इनमें से कुछ तो सैंकड़ों प्रकाश वर्ष के व्यास जितने बड़े होते हैं.  बहुत से नेबुला चमकीले दिखाई देते हैं क्योंकि उनके तारे होते है लेकिन कई बहुत ही धुंधले होते हैं. नेबुला में ही तारों की उत्पत्ति का पता इसिलिए चलता है कि तारे यहीं पैदा होते दिखाई देते हैं. इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि नेबुला में तारों के निर्माण की शुरुआती प्रक्रियाएं होती हैं.

    यह भी देखें:  जानिए क्यों हैं नासा को अपने पर्सिवियरेंस रोवर से इतनी उम्मीदें

    W51 को पहचान पाना आसान नहीं
    W51 नेबुला को रात के आकाश में प्रकाशीय टेलीस्कोप (Optical Telescopes) पहचान पाना आसान नहीं है. इसकी वजह यह है कि पृथ्वी और W51 के बीच मौजूद धूल के बादलों के कारण वहां से प्रकाश धरती तक नहीं पहुंच पाता है.

    Stars
    तारों का निर्माण हर जगह नहीं होता वे नेबुला में ही पैदा होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    इन टेलीस्कोप से मिलती है मदद
    इस नेबुला को देखने कि लिए रेडियो इंफ्रारेड, या बड़ी वेवलेंथ के प्रकाश इसे पहचाने में मदद कर सकते हैं. इसीलिए नासा का स्पिट्जर टेलीस्कोप जो कि इंफ्रारेड वेवलेंथ पर काम करता है इसे पकड़ सका. इसकी तस्वीर  को स्पिट्जर के जरिए 2004 में गैलेक्टिक लेगेसी इंफ्रारेड मिड प्लेन सर्वे एक्ट्रॉऑर्डिनायर (GLIMPSE) नाम के बड़े अवलोकन अभियान में कैद किया गया.

    भारतीय उपग्रह ने पकड़े वे संकेत जो नासा का हबल टेलीस्कोप भी न पकड़ सका

    क्यों अहम हैं ये तस्वीरें
    अमेरिका के पोमोना में कैलीफोर्निया स्टेट पॉलीटेक्निक यूनिवर्सिटी में फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी की एसिस्टेंट प्रोफेसर ब्रेयान्ना बिंडर ने बताया, “स्पिट्जर ने गिलिम्स के जरिए हमें जो शानदार तस्वीरें दी हैं वे हमें यह बताने में मदद करती हैं कि हमारी गैलेक्सी में विशाल तारों का निर्माण कैसे हुआ था. हम  तारों के बनने की प्रक्रिया दूसरी गैलेक्सियों में नहीं देख सकते. इसीलिये W51 हमारी मिल्की वे में तारों के निर्माण के बारे में जानकारी हासिल करने के लिहाज से बहुत अहम है.

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