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NASA करेगा खास परीक्षण, क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराव से करेगा बचाव

नासा (NASA) का इरादा एक बड़ी परियोजना बनाने का है जिससे अंतरिक्ष में ही ऐसे पिंडों की दिशा मोड़ी जा सके. (तस्वीर: Pixabay)

नासा (NASA) का इरादा एक बड़ी परियोजना बनाने का है जिससे अंतरिक्ष में ही ऐसे पिंडों की दिशा मोड़ी जा सके. (तस्वीर: Pixabay)

NASA ने पृथ्वी (Earth) को क्षुद्रग्रह (Asteroid) के टकराव से बचाने के लिए एक परीक्षण अभियान भेजने का फैसला किया है.

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    हमारे सौरमंडल में ग्रह बहुत दूर दूर स्थित हैं.  फिर भी क्षुद्रग्रह(Asteroid) जैसे पिंड पृथ्वी (Earth) की कक्षा में आ जाते हैं और उनके पृथ्वी से टकराने की संभावना रहती है. यह सच है कि इन पिंडों के पृथ्वी से टकराने की संभावना कम होती हैं और उसके बाद भी उनके धरती तक पहुंच कर नुकसान पहुंचाने की गुंजाइश और भी कम होती है. लेकिन ऐसा होगा ही नहीं, यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है. ऐसे किसी खतरे से निपटने के लिए नासा (NASA) ने एक खास तरह के टेस्ट करने का फैसला लिया है जिससे पृथ्वी से टकराने वाले पिंड के छुटकारा पाया जा सके.

    क्या है यह अभियान
    नासा के इस नए अभियान का नाम डबल एस्ट्रॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट  (DART)  है जिसका उद्देश्य एक विशेष सुरक्षा परीक्षण करना है. इसके लिए नासा काइनेटिक एनर्जी इम्पैक्टर तकनीक का प्रयोग करेगा जो क्षुद्रग्रह  से इस तरह से टकराएगा जिससे उसका रास्ता बदल जाएगा और वह पृथ्वी से नहीं टकराएगा.

    एक बड़ी परियोजना का हिस्सा
    इस परियोजना का उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षा तंत्र बनाना है जो अंतरिक्ष में ही ऐसे पिंडों की कक्षा को बदलने में सक्षम हो. नासा एक क्षुद्रग्रह से एक बिना मानव का अंतरिक्ष यान का टकराव करेगा. नासा इस अभियान का सीधा प्रदर्शन दिखाने की भी योजना बना रहा है. जिसमें वह मानवरहित अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण करेगा.

    कैसे होगा ये
    यह परीक्षण कैलीफोर्निया के वैडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से स्पेस एक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट द्वारा मूनलेट डिडिमोस क्षुद्रग्रह की ओर भेजा जाएगा. यह यान लाखों मील का सफर कर अंतरिक्ष में डिडिमोस क्षुद्रग्रह से टकराएगा. नासा इसके साथ एक छोटा अंतरिक्ष यान भी भेजेगी जो डार्ट से अलग होकर इस घटना की सीधे प्रसारण के लिए तस्वीरें लेगा.

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    क्षुद्रग्रह (Asteroid) के पृथ्वी के टकराने की संभावना कभी खत्म नहीं होती है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    यह अध्ययन भी होगा
    इन तस्वीरों का उपयोग वास्तविक समय में हुए टकराव के अध्ययन के लिए किया जाएगा और यह भी समझने का प्रयास किया जाएगा कि यह वास्विक हालात में काम कैसे करता है.  यह सुरक्षा परीक्षण अगर सफल हो गया तो इसे भविष्यम में हमारे ग्रह को हानिकारक क्षुद्रग्रह से बचाने के लिए कायम रखा जाएगा.

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    ऐसे होगा टकराव
    नासा ने अपनी वेबसाइट में जारी अपने बयान में बताया कि यह परियोजना कैसे काम करेगी. बयान में कहा गया कि डार्ट अंतरिक्ष यान खुद को 6.6 किलोमीटर प्रति सेंकट की दर से मूनलेट से टकरा कर  काइनेटिक इम्पैक्ट डिफ्लेक्शन हासिल करेगा. इसमें डार्को नाम के कैमरा और विशिष्ठ ऑटोमैटिक नेवीगेशन सॉफ्टवेयर की मदद ली जाएगी.

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    अलग-अलग तरह के क्षुद्रग्रह (Asteroids) अपना रास्ता भटक कर पृथ्वी की कक्षा में आ जाते हैं जो खतरनाक हो सकते हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    इतना काम हो चुका
    इस टकराव से मूनलेट की उसकी कक्षा में गति  एक प्रतिशत बदल जाएगी लेकिन इससे उसका कक्षाकाल कई मिनट में बदल जाएगा जिसे पृथ्वी पर स्थित टेलीस्कोप से नापा जा सकेगा. नासा के के प्लैनेटरी डिफेंस कोऑरडिनेसन ऑफिस के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर में अभी भविष्य के लिए डिजाइन किए गए प्रोजेक्ट के फेज सी पर काम चल रहा है.

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    इस अभियान का प्रक्षेपण नवंबर 2021 के आसपास होगा जिसके बाद स्पेस फॉल्कन 9 क्षुद्रग्रह से सितंबर 2022 तक टकराएगा. ऐसा नहीं है कि हाल ही में क्षुद्रग्रहों के पृथ्वी से टकराव की संभावना बहुत बढ़ गई है. लेकिन इनकी संभावना हमेशा से ही कायम रहती है. इसके लिए एक सुरक्षा तंत्र बनाने की आवाज भी उठती रही है.

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