जानिए क्या कहती है सौरमंडल के बाहर तारों के बीच मिले नए संकेतों की जानकारी

हमारे सौरमंडल के बाहर तारों के बीच स्थित अंतरतारकीय माध्यम (Interstellar Medium)) में मौजूद प्लाज्मा से आवाज आ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ESO Twitter)

हमारे सौरमंडल के बाहर तारों के बीच स्थित अंतरतारकीय माध्यम (Interstellar Medium)) में मौजूद प्लाज्मा से आवाज आ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ESO Twitter)

नासा (NASA) के वायजर-1 (Voyger-1) ने सौरमंडल (Solar System) के बाहर अंतरतारकीय प्लाज्मा की भिनभिनाहट सुनी है.

  • Share this:

हमारे सौरमंडल (Solar System) के बाहर अंतरतारकीय इलाके में हवा तो नहीं है, लेकिन उसके अलावा काफी कुछ ऐसा है जो हमारे वैज्ञानिकों के लिए काफी रोचक हो सकता है. अंतरतारकीय अंतरिक्ष में पाई जानी वाली गैसों, जिन्हें अंतरतारकीय माध्यम (Interstellar Medium, ISM) कहा जाता है, में हमारे खगोलविदों को बहुत दिलचस्पी है. हाल ही में नासा (NASA) के वॉयजर-1 यान ने इस अंतरतारकीय माध्यम की भिनभिनाहट सुनी है.

बहुत हल्की भिनभिनाहट

वॉयजर-1 यान अंतरिक्ष में हमारे सौरमंडल के बाहर पहुंच गया है. यह अब भी वहां से संकेत भेज पा रहा है. नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक यह भिनभिनाहट बहुत हल्की  है और यह अंतरतारकीय माध्यम के प्लाज्मा तरंगों से आ रही है जिसे खोजी अंतरिक्ष यान ने पकड़ा है. इस अध्ययन में शामलि कोरनेल यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता स्टेला कोच ओकेर ने बताया कि बहुत ही हल्की और एकरसता से भी भिनभिनाहट है जो एक संकरी फ्रीक्वेंसी बैंड में हैं.

क्या होता है इस अंतरतारकीय माध्यम में
इस अंतरतारकीय माध्यम  में आयनीकृत, आणविक और अणु गैस के अलावा तारों की धूल और कॉस्मिक विकरणें मौजूद हैं. कॉस्मिक विकरणें उच्च ऊर्जा वाले आणविक नाभीकीय केंद्र और प्रोटोन से बनती हैं जो अंतरिक्ष में हर जगह घूमती पाई जाती हैं. ये विकिरणें अंतरतारकीय माध्यम के अन्य पदार्थों के बीच मानव के लिए बहुत नुकसादायक होती हैं.

हेलियोस्फियर की भूमिका

हमारा सूर्य सौरमंडल को बाहर से आने वाली इन कॉस्मिक विकिरणों को एक हेलियोस्फियर (heliosphere) का निर्माण कर रक्षा करता है. यह सौरमंडल के चारों ओर एक बुलबुला सा है जहां सूर्य से आने वाले आवेशित कणों से निर्मित सौर पवनें कॉस्मिक किरणों को सौरमंडल के अंदर आने से रोक लेती हैं. लेकिन सूर्य पूरी तरह इन्हें नहीं रोक पाता है.



 Space, NASA, Solar System, Voyager 1, Humming, Interstellar Plasma, Interstate Medium, heliosphere, Cosmic Rays,
नासा (NASA) का वॉयजर-1 यान का यूं भिनभिनाहट सुनना वैज्ञानिकों को नई जानकारी देने वाला साबित होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुंच पाते ये विकिरण

कॉस्मिक किरणें हेलियोस्फियर में भी घुसपैठ कर ही लेती हैं. ऐसे में पृथ्वी की मैग्नेकिट फील्ड और उसका वायुमंडल या तो इन विकिरणों की दिशा बदल देता है या फिर उन्हें निष्प्रभावी बना देता है. फिलहाल वायजर-1 सूर्य की हेलियोस्फियर के किनारे पर पहुंच चुका है.

सौरमंडल के बाहर बढ़ रहा है अंतरिक्ष में घनत्व, जानिए कैसे मिली यह जानकारी

2012 में कर लिया था सौरमंडल पार

हेलियोस्फियर के बाहर वॉयजर 1का सामना अब अंतरतारकीय माध्यम से हो रहा है. वायजर 1को नासा ने साल 1977 में प्रक्षेपित किया था और इसने साल 2012 को हमारे सौरमंडल को पार किया था.  वायजर को हमारे सौरमंडल के बाहरी ग्रहों और संभव हुआ तो सौरमंडल के बाहर के अन्वेषण के लिए भेजा गया था.

NASA, Solar System, Voyager 1, Humming, Interstellar Plasma, Interstate Medium, heliosphere, Cosmic Rays,
नासा (NASA) का वॉयजर-1 यान सौरमंडल के हेलियोस्फियर की सीमा पर पहुंच चुका है. (तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)

हेलियोस्फियर से बाहर आते ही भिनभिनाहट शुरू

वॉयजर 1 ने अब तक 38 अरब किलोमीटर का सफर तयकया है जो हमारे सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का 150 गुना है. इससे प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने के लिए 12 घंटों का समय लगता है. साल 2017 के बाद से करीब 23 अरब किलोमीटर की दूरी पर इसे लगातार प्लाज्मा तरंगों की भिनभिनाहट सुनाई दे रही है. यह प्लाज्मा एक बिखरी गैस होती है तो तारों के बीच विशेष अवस्था में होती है.

जानिए कैसे बनी शनि ग्रह की इतनी अजीब लेकिन सुडौल मैग्नेटिक फील्ड

यह एक तरह की कणों की हल्की बारिश की तरह होती है. जो अंतरतारकीय माध्यम में किसी बहुत हल्के स्तर पर होने वाली गतिविधि के कारण होती है. यह गतिविधि क्या है कि यह भी स्पष्ट नहीं हैं. यह ऊष्मा द्वारा आवेश प्लाज्मा स्पंदन हो सकते हैं या आभासी ऊष्मा की आवाज हो सकी है जो प्लाज्मा में इलेक्ट्रोन की गतिविधि के कारण पैदा होती है. जो भी हो इस खोज से अंतरतारकीय माध्यम में प्लाज्मा घनत्व का पता चल सकता है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज