नासा को चांद पर मिला पानी, रूस ने कहा- हमने तो ढूंढ लिया था 50 साल पहले

चंद्रमा (Moon) पर पानी की खोज के नासा (NASA) के दावे क बाद रूस का कहना है कि वह यह खोज पहले ही कर चुका है.
चंद्रमा (Moon) पर पानी की खोज के नासा (NASA) के दावे क बाद रूस का कहना है कि वह यह खोज पहले ही कर चुका है.

नासा (NASA) ने दावा किया है कि उसने चंद्रमा (Moon) की सतह पर पानी (Water) खोज लिया है. इस पर रूस (Russia) का कहना है कि यह खोज उसके प्रोब (Probe) ने 1976 में ही कर ली थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 9:35 PM IST
  • Share this:
चांद (Moon) पर पानी (Water) की खोज बहुत उम्मीदों के साथ लंबे समय से हो रही है. कई बार दावा किया जा चुका है कि चंद्रमा पर पानी नहीं हो सकता है, लकिन फिर वैज्ञानिकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी. इसके बाद भारत के चंद्रयान (Chandrayaan) के जरिए अचानक पता चला कि चंद्रमा पर बर्फ (Ice) है, वह भी ध्रुवीय इलाकों में. लेकिन अब नासा (NASA) ने घोषणा की है कि उसे चंद्रमा की सतह पर पानी खोज लिया है. लेकिन इसपर रूस (Russia) का कहना है कि उसने तो यह काम 50 साल पहले ही कर लिया था.

नासा की घोषणा
नासा  हाल ही में बाकायदा औपचारिक तौर पर यह घोषणा की है कि उसने चंद्रमा की सतह पर पानी खोजने में सफलता पाई है. नासा की स्ट्रैटोस्फियरिक ऑबजर्वेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी ने इस बात की पुष्टि की. नासा का कहना है कि पहली बार उस सतह पर पानी पाया गया है जिस पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है.

क्या कहा नासा ने
नासा ने इस खोज की अहमियत  बताते हुए ट्वीट में कहा, “यह खोज हमारी चंद्रमा के बारे में अब तक की समझ को चुनौती देती है. हमें लगता था कि सूर्य का प्रकाश पड़ने वाली सतह पर पानी होगा भी तो वह वाष्पीकृत हो गया होगा, लेकिन हमने खोज लिया. अब में इस बात की पड़ताल करनी होगी कि पानी वहां कैसे बना और कैसे कायम है.



Moon, Earth, far side of moon near side of moon, volcano, Maria
चंद्रमा (Moon) पर पानी (Water) की खोज को बहुत अहम माना जाता है.


रूसी मीडिया ने कहा
नासा ने यह भी कहा कि इस पड़ताल से नासा को चंद्रमा के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए बेस कैम्प बनाने में सहायता मिलेगी. वहीं नासा की इस खोज के बारे में रूस की मीडिया एजेंसी स्पूत्निक ने दावा किया है कि जो खोज नासा ने की है वह खोज रूस ने 50 साल पहले ही कर ली थी. स्पूतनिक की रिपोर्ट में कहा गया, “ अगर नासा के वैज्ञानिकों ने सोवियत  साथियों के काम के बारे में थोड़ा पढ़ लिया होता तो उन्हें पता चलता कि सोवियत संघ के लूना 24 प्रोब ने यह खोज 1976 में ही कर ली थी.

जानिए चंद्रमा के पीछे का हिस्सा उसके आगे के हिस्से से क्यों है इतना अलग

यह शिकायत भी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोवियत संघ ने दर्जनों प्रोब बाह्य अंतरिक्ष में कई खगोलीय पिंडों के लिए भेजे थे जिसमें शुक्र और चंद्रमा शामिल है. इन अभियानों ने सौरमंडल की जानकारी में अहम योगदान दिया है. लेकिन पश्चिमी वैज्ञानिकों ने उनक काम को गलत तरह से लिया गया है.

Moon, Water, Water on moon, Russia.
रूस (Russia) का कहना है कि इस तरह की खोज उसने 50 साल पहले ही कर ली थी.


किस जगह पर मिला था पानी
1978 में सोवियत संघ की एकेडमी ऑफ साइंसेस के जर्नल में प्राकशित शोधपत्र के बारे में बात करते हुए मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस रिपोर्ट में विस्तार के साथ चंद्रमा की सतह पर मैरे क्रिसियम क्रेटर में पानी की खोज के बारे में बताया गया है.

वैज्ञानिकों ने पहली बार देखा गुरू ग्रह के चंद्रमा लो पर ज्वालामुखी का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमी के प्रोफेसर एर्लिन क्रोट्स ने बताया था कि जो नमूने  लूना 24 के जरिए चंद्रमा से लाए गए थे, उनकी इंफ्रारेड एबजॉर्वेशन स्पोक्ट्रोस्कोपी से पता चला था कि उस मिट्टी में 0.1 प्रतिशत भार पानी का था. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर आप गहराई से नमूने लेंगे तो यह प्रतिशत बढ़ता जाएगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज