NASA के रोवर उपकरण को मिला है शेरलॉक होम्स का नाम, सीवी रमन से भी है इसका नाता

NASA के रोवर उपकरण को मिला है शेरलॉक होम्स का नाम, सीवी रमन से भी है इसका नाता
नासा का यह खास उपकरण पर्सवियरेंस के रोबोट वाली भुजा पर लगेगा जिसका नाम शेरलॉक है.

नासा के रोवर (Rover) के एक उपकरण का नाम मशूहर जासूसी पात्र शेरलॉक होम्स (Sherlock) के नाम पर रखा गया है.

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नई दिल्ली: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) की अपने मंगल (Mars) के अभियान की तैयारी जारी है. इस साल जुलाई में नासा की मंगल ग्रह के लिए अपना एक रोवर (Rover) रवाना करने जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह नासा का बहुत महत्वाकांक्षी अभियान है. इस रोवर में एक खास उपकरण (Device) लगा है जिसका नामकरण लोगों का ध्यान खींच रहा है.

मशहूर जासूसी पात्र का दिया गया है नाम
नासा ने पर्सवियरेंस रोवर के रोबोट भुजा पर लगे कैमरे को सर आर्थर कॉनन डॉयेल (Arthur Conan Doyle) के मशहूर पात्र शेरलॉक  (Sherlock Holms) का नाम दिया है. यह उपकरण मंगल की चट्टानों पर रेत के आकार के कणों  की छानबीन करेगा. यह अमेरिकी स्पेस ऐजेंसी का शेरलॉक (Sherloc) वाटसन (Watson) के साथ मिल कर काम करेगा. वाटसन एक कैमरा है कि चट्टानों की संरचना की तस्वीर लेगा.

क्या है रोवर का मिशन
नासा के इस रोवर का मिशन मंगल पर पुरातन सूक्ष्म जीवन की तलाश है.नासा की प्लैनेटरी साइंस विभाग की निदेशक रोली ग्लेज का कहना है कि उम्मीद है कि 2030 के दशक में मंगल से मिट्टी के नमूने पृथ्वी तक लाए जा सकेंगे. शेरलॉक को दक्षिण कैलीफोर्निया में नासा की जेट प्रपल्शन लैब में विकसित किया गया था. जबकि वाटसन का सैन डिएगो में मालिन स्पेस साइंस सिस्टम में बनाया गया था.



Mars
मंगल पर शेरलॉक वहां की चट्टानों में खनिज ढूंढेगा.


मिट्टी के नमूने लाए जाएंगे पृथ्वी पर
नासा का कहना है कि पर्सवियरेंस की टीम रोवर के जरिए आधे इंच तक के बड़े बहुत से नमूने जमा करेगी और उन्हें धातु के ट्यूब में पैक भी करवाएगी. इसके बाद वे धातु के ट्यूब मंगल पर ही छोड़ दिए जाएंगे जिससे भविष्य में पृथ्वी की ओर लौटने वाले अभियान उसे पृथ्वी पर लाएंगे.

क्या है शेरलॉक का रमन से संबंध
शेरलॉक (SHERLOC) का पूरा नाम स्कैनिंग हैबिटेब इनवायर्नमेंट विद रमन एंड ल्यूमिनेसेंस फॉर ऑर्गेनिक्स एंड कैमिकल है  इसमें रमन नाम रमन स्पैक्ट्रोस्कोपी दर्शाता है. जो भारत के मशहूर वैज्ञानिक सीवी रमन के नाम पर एक तकनीक है. सीवी रमन ने ही साल 1920 में मशहूर स्कै’ट्रिंग ऑफ लाइट’ यानि प्रकाश केप्रकीर्णन के प्रभाव का सिद्धांत दिया था. रमन प्रभाव के कारण ही वैज्ञानिक अणुओं के द्वारा विशेष स्पैक्ट्रल फिंगरप्रिंट से उनकी पहचान करते हैं.

क्या काम करेगा यह उपकरण
इस उपकरण से एक अल्ट्रावॉयलेट लेसर निकलेगी जिससे टीम यह अंतर कर पाएगी कि चट्टान में कौन से खनिज और ऑर्गेनिक पदार्थ मौजूद हैं. इसी के आधार पर  वैज्ञानिक यह जानने की भी कोशिश करेंगे कि क्या मंगल पर कोई सूक्ष्म जीवन है या था. इस अध्ययन से मंगल की सतह के रासायनिक प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिल सकेगी.

Nasa , Space Science
नासा मंगल पर इंसान भेजने की तैयारी कर रहा है.


मंगल पर इंसान भेजने की तैयारी का हिस्सा है यह रोवर
नासा के बारे कहा  जा रहै है कि इस रोवर के माध्यम से वह मंगल पर इंसान भेजने के अभियान की भी तैयारी करेगा. इसी सिलसिले में  वहां इंसान के पहुंचने पर आने वाली चुनौतियों का अध्ययन भी इस और नासा के बाकी अभियानों से किया जा रहा है.

नासा ने अपने रोवर केप्रक्षेपण की तैयारी शुरू कर दी है. इसे नासा यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस V रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा. इसे 17 जुलाई से 5 अगस्त के बीच में प्रक्षेपित किया जाएगा और यह 687 दिन बाद मंगल पर पहुंचेगा. लेकिन नासा ने इसके मंगल पर उतरने की तारीख 18 फरवरी 2021 तय की है.

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