सनकी तानाशाह, जिसने लड़ाई के डर से देश में बनवा डाले लाखों बंकर

सनकी तानाशाह, जिसने लड़ाई के डर से देश में बनवा डाले लाखों बंकर
यूरोपियन देश अल्बानिया में हर तीन किलोमीटर पर एक बंकर बना हुआ है

द्वितीय विश्वयुद्ध (World War II) के बाद इस मुल्क के तानाशाह ने मिलिट्री बंकर (military bunker) बनवाना शुरू कर दिया. उसे डर था कि लड़ाई फिर शुरू हो सकती है और हमले से बचने के लिए देश में पर्याप्त बंकर होने चाहिए.

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दक्षिणपूर्वी यूरोपीय देश अल्बानिया (Southeastern European nation Albania) में हर तीन किलोमीटर पर एक बंकर बना हुआ है, जो देश के एक से लेकर दूसरे छोर तक फैला हुआ है. दरअसल यहां के तानाशाह एनवर होक्सहा (Enver Hoxha) ने अपनी सनक में अच्छे-खासे देश को खंदकों में बदलकर रख दिया. यहां साठ के दशक के बीच से लेकर बंकर बनाए जाने शुरू हुए तो अगले 20 सालों यानी होक्सहा की मौत तक काम चालू रहा. नतीजा ये हुआ कि देश गरीब हो गया. पूरा देश आज भी तानाशाह की इस सनक के चलते गरीबी में जी रहा है. हालांकि इन्हीं बंकरों को कैफे और आर्ट गैलरी में बदलकर सैलानियों को आकर्षित करने की कोशिश भी हो रही है.

ये दूसरे विश्वयुद्ध (second world war) के बाद की बात है. दुनिया के लगभग सारे ही देश एक-दूसरे से डरे हुए थे और लगातार परमाणु युद्ध (nuclear attack) की आशंका में जी रहे थे. यूरोप (Europe) का उत्तर पूर्वी देश अल्बानिया भी इन्हीं में से एक था. अल्बानिया में युद्ध के बाद का इतिहास काफी उथल-पुथल भरा रहा. शक की वजह से यहां के शासक एनवर होक्सहा ने धीरे-धीरे अपने मित्र देशों से दूरी बना ली, जिसमें यूगोस्लाविया, सोवियत और चीन शामिल हैं.

होक्सहा ने किसी हमले की आशंका में देश के नागरिकों और सैनिकों के बचाव के लिए बंकर प्रोजेक्ट शुरू किया




होक्सहा ने किसी हमले की आशंका में देश के नागरिकों और सैनिकों के बचाव के लिए बंकर बनवाने का प्रोजेक्ट शुरू किया. 1960 के दशक में बंकर बनने शुरू हुए तो ये सिलसिला लगभग दो दशकों तक चला और होक्सहा की मौत (1985) के बाद ही रुका. होक्सहा के शासनकाल में बने ये बंकर व्लोर की खाड़ी से लेकर राजधानी तिराना की पहाड़ियों तक और फिर मोंटेनीग्रो की सीमा से लेकर यूनान के द्वीप कोर्फू तक फैले हुए हैं. तानाशाह की सनक के बारे में नेशनल जिओग्रैफिक से बातचीत में University of Rijeka के प्रोफेसर पेवलोकोविक कहते हैं कि होक्सहा ने देश के लोगों की शिक्षा या सेहत पर खर्च करने की बजाए बंकर बनाने की शुरुआत कर दी. यहां तक कि लड़ाई के डर से देश ने खुद को पूरी दुनिया से अलग-थलग कर लिया.
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इतने बंकर बनाने में हजारों कारीगरों ने कई-कई सालों तक लगातार काम किया. 70 से 100 मजदूरों की हर साल बंकर बनाने के दौरान मौत होती रही. युद्ध या हमले तो दोबारा नहीं हुए लेकिन इस प्रोजेक्ट की वजह से अल्बानिया की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई. इसमें पैसे, समय और काफी रिसोर्सेज जा चुके थे. नतीजा ये हुआ कि अल्बानिया को अब यूरोप के सबसे गरीब देशों में शुमार किया जाता है.

बंकर बनाने में हजारों कारीगरों ने कई-कई सालों तक लगातार काम किया (Photo- flickr)


तमाम बंकर डोम आकार के हैं क्योंकि ये आकार आग और गोलबारी में सबसे ज्यादा सुरक्षित रहता है. मिलिट्री इंजीनियर जोसिफ जगाली ने इनका डिजाइन बनाया जो खुद दूसरे विश्व युद्ध का हिस्सा रहा और जिसे सोवियत में बंकरों की ट्रेनिंग मिल थी. जगाली के बेहतरीन डिजाइन को देखकर खुश होक्सहा ने उसे तुरंत सेना में ऊंचा ओहदा दे दिया. हालांकि कुछ सालों बाद शक्की तानाशाह ने इंजीनियर को फॉरेन एजेंट करार देते हुए उसे बंदी बना लिया.

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कंक्रीट, स्टील और लोहे से बने बंकर अलग-अलग आकार-प्रकार के हैं. डोम शेप के इन बंकरों में ज्यादातर ऐसे हैं, जिसमें दो लोग आराम से खड़े या बैठे हुए गोलियां चला सकें. इन्हें Qender Zjarri या firing position के नाम से जाना जाता है. एक अन्य बंकर Pike Zjarri या firing point कहलाता है, ये औसत आकार के दो बेडरूम के बराबर है, जो नागरिकों की सुरक्षा के मकसद से बनाया गया.

बंकरों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई थी, अब वही अल्बानिया के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया बने (Photo-pixabay)


साल 1990 अल्बानिया से कम्यूनिज्म का लगभग खात्मा हो गया लेकिन स्थानीय नागिरक अब परेशान थे. ज्यादातर लोगों के पास न रहने को छत बाकी रही और न ही जीने का कोई मकसद. तानाशाह की आइसोलेशन की पॉलिसी के कारण देश बाकी दुनिया से भी कट चुका था. ऐसे में शेल्टर के बिना रह रहे लोगों ने एक अनूठा तरीका निकाला. वो इन बंकरों का बाकायदा इंटीरियर करके यहां बसने लगे. इसके अलावा यहां स्टोरहाउस और जानवरों को भी रखा जाने लगा.

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नागरिकों की पहल ने सरकार को भी तरकीब सुझाई. एक वक्त पर जिन बंकरों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई थी, अब वही बंकर अल्बानिया के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया बन रहे हैं. दुनियाभर से लोग बंकरों के इस देश को देखने आ रहे हैं. यही वजह से कि सरकार भी बंकरों को नया रूप देने के लिए नए-नए प्रोजेक्ट शुरू कर रही है. यहां पर बेड एंड बंकर (Bed & Bunker) प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जिसके तहत विदेशी सैलानियों को बंकरों में ठहराया जाता है. कई दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी विचार हो रहा है, जिसमें म्यूजियम, पिज्जा हट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जगह तैयार करने जैसे विकल्प हैं.
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