नेशनल जियोग्राफिक घोषित किया दुनिया का पांचवा महासागर, जानिए किसे और क्यों

नेट जियो के लोगों ने इस महासागर (Ocean) को अलग नाम देने के लिए अपनी दलीलें भी दी हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) ने दुनिया के पानी (Global Surface Water) को आधिकारिक तौर पर चार महासागरों (Oceans) की जगह पांच महासागरों में बांटा है.

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    दुनिया का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पानी (Water)से ढका है. इसे भूगोल के नजरिए से चार महासागरों (Oceans) में बांटा गया है. लेकिन नेशनल जियोग्राफिक ने एक पांचवे महासागर की घोषणा की है. नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) के लोगों ने वर्ल्ड ओशीन डे के दिन एक पांचवे महासागर के लिए दक्षिणी महासागर नाम दिया है जो वास्तव में अंटार्कटिका के आसपास का महासागरीय इलाका है. यह बहुत लंबे समय से विवाद का विषय रहा है कि क्या इस महासागरीय क्षेत्र को अलग नाम दिया भी जाए या नहीं. इसीलिए अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अलग से महासागर घोषित नहीं किया जा सका है.

    लंबे समय से चल रही है बहस
    नेट जियो कहना है कि जब से 1915 से नक्शा बनने शुरू हुए हैं, तभी से दुनिया में केवल चार महासागरों की मान्यता दी जा रही है. ये महासागर अटलांटिक, प्रशांत, हिंद और आर्कटिक महासागर हैं. इस विषय पर लंबे समय से बहस चल रही थी और अब 8 जून को विश्व महासागर दिवस से दक्षिणी महासागर को पांचवा महासागर कहा जाएगा.

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    महासागरों का नाम देने का काम इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) करती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    नहीं बन पाई थी सहमति
    नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी के जियोग्राफर एल्क टेट का कहना है कि दक्षिणी महासागर को वैज्ञानिक लंबे से मान्यता दे रहे थे. लेकिन अंततरराष्टीय स्तर पर इस मामले में कभी सहमति नहीं बनी इसलिए इसे आधिकारिक तौर पर कभी मान्यता नहीं दी गई.

    क्या रहा ऐतराज
    दक्षिणी महासागर हमेशा से ही विवाद का विषय रहा, क्योंकि कुछ भूगोल विशेषज्ञों को इस बात पर हैरानी थी कि क्या इस महासागरों में वे खास गुण हैं जिनकी वजह से इसे अलग महासागर घोषित कर दिया जाए. अभी तक यह हिंद, प्रशांत और अटलांटिक महासागरों का ठंडा विस्तार भर है.

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    किसे था ऐतराज
    साल 1999 में नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOA) ने भी दक्षिणी महासागर को पांचवे महासागर के तौर पर पहचान दी थी. लेकिन साल 2000 में इंटरनेशल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन (IHO) इससे सहमत नहीं हुई. आईएसओ ही सभी सागरों, महासागरों और संचालन पानी का सही तरीके से सर्वेकरने के बाद उसका नक्शा बनाता है.

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    नए महासागर (Ocean) के पक्ष में लोग इसकी अलग विशेषताओं का तर्क भी दे रहे हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    कितना क्षेत्र आ रहा है इसमें
    अब इस बात से संतुष्ट होकर कि महासागर का अपना नाम होना चाहिए नेट जियो ने तय किया है कि वह अंटार्कटिका के आसपास का 60 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक का इलका दक्षिणी महासागर कहेगा. इसमें डार्क पैसेज और स्कोटिया सागर शामिल नहीं होगा. कई लोगों को इस बात पर हैरानी हो सकती है कि आखिर नाम को लेकर इतनी कवायद क्यों. इसका भी जवाब है.

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    ये दलीलें
    नोआ की मरीन वैज्ञानिक और नेशनल जियोग्राफिक एक्प्लोरर सेठ सिकोरा बोडी कहना है कि इसकी व्याख्या करने में परेशानी हो सकती है, लेकिन सभी जानते हैं कि यहां के ग्लेशियर ज्यादा नीले होते हैं, हवा ज्यादा ठंडी होती है. नेशनल ज्योग्राफिक एक्स्प्लोरर एनरिक साला ने वॉशिंगटन पोस्ट को  बताया कि यह पानी की भंडार शक्तिशाली एंटार्कटिक सर्कमपोलर करंट की विशेषता लिए हुए है जो पूर्व की ओर बहता है.

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