वे देश, जहां बलात्कार साबित होने पर नपुंसक बना दिया जाता है

नाइजीरिया के कदूना प्रांत में महिलाओं पर यौन हिंसा रोकने के लिए अहम फैसला लिया गया-  file photo
नाइजीरिया के कदूना प्रांत में महिलाओं पर यौन हिंसा रोकने के लिए अहम फैसला लिया गया- file photo

नाइजीरिया में महिलाएं भी अगर रेप की दोषी (rape convict) पाई जाएं, तो उनके लिए भी मिलती-जुलती सजा का प्रावधान होने जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 8:28 AM IST
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नाइजीरिया के कदूना प्रांत में महिलाओं पर यौन हिंसा रोकने के लिए एक अहम फैसला लिया गया. इसके तहत सरकार अब बलात्कारियों को सजा के तौर पर नपुंसक बना देगी. साथ ही अगर रेप 14 साल या कम उम्र की बच्ची के साथ हो तो अपराधी को फांसी दी जाएगी. ये फैसला कोरोना काल में बढ़ी रेप की घटनाओं को देखते हुए लिया गया. वैसे नाइजीरिया के अलावा कई और देश भी हैं जहां रेपिस्ट को सर्जरी करके नपुंसक (Surgical castration) बनाने का प्रावधान है. जानिए, कौन से हैं वे देश, जहां महिलाओं पर यौन अपराधों पर इस सजा का कानून है.

भारत से ठीक 2 साल पहले आजादी पाए देश इंडोनेशिया में महिला अपराध काफी बढ़ने लगे थे. ये देखते हुए साल 2016 में वहां पर एक कानून पारित किया गया. इसके तहत रेपिस्ट को केमिकली नपुंसक बनाया जाने लगा. बता दें कि इसमें टेस्टिकल्स निकाले नहीं जाते, बल्कि केमिकल से उनपर ऐसी प्रक्रिया की जाती है, जिससे अपराधी की यौन इच्छाएं लगभग खत्म हो जाएं. हालांकि इसके साथ मुश्किल ये है कि इसका असर लगभग 5 सालों तक ही रहता है. इसके बाद अपराधी दोबारा यौन हिंसा कर सकता है. पुराने जमाने में भी यौन अपराधी को सजा देने के लिए उसे बधियाकरण की इसी प्रक्रिया से गुजारा जाता था.

चेक रिपब्लिक में रेपिस्ट के लिए सर्जिकल केस्ट्रेशन का कानून - file photo




इंडोनेशिया में तो बच्चों पर यौन हिंसा करने वाले के लिए ये कानून बन ही चुका है लेकिन कई दूसरे देशों में भी इसे आजमाया जा चुका है. द सन की रिपोर्ट के मुताबिक स्वीडन, डेनमार्क और कनाडा में भी यौन अपराधी को ये सजा कई बार दी जाती रही है.
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चेक रिपब्लिक में रेपिस्ट के लिए सर्जिकल केस्ट्रेशन का कानून है. यानी अगर किसी पर रेप साबित होता है तो उस पुरुष के अंडकोष काटकर उसे नपुंसक बना दिया जाएगा. इससे भविष्य में अपराधी के कोई और यौन हिंसा करने की आशंका खत्म हो जाती है. ये कानून वहां साल 1966 में आया. द न्यूज.कॉम की रिपोर्ट में चेक गणराज्य के हवाले से बताया गया है कि साल 2000 से 2011 के बीच वहां पर 85 अपराधी पुरुषों पर बधियाकरण की ये प्रक्रिया अपनाई गई. हालांकि वहीं पर मानवाधिकार कार्यकर्ता इसका काफी विरोध करते आए हैं.

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यूक्रेन की संसद ने साल 2019 की जुलाई में इस तरह का कानून बनाया. इसके तहत बलात्कार साबित होने पर दोषी को केमिकल केस्ट्रेशन से गुजरना होता है. हालांकि किशोरों को इस सजा से छूट मिली हुई है. इस श्रेणी में 18 से 65 साल के पुरुष ही शामिल हैं.

कोरोना वायरस बंदी के बीच नाइजीरिया में बलात्‍कार की घटनाएं काफी बढ़ गईं (Photo-pixabay)


अब हाल ही में नाइजीरिया के कदूना प्रांत में इस सजा का फैसला हुआ है. बता दें कि कोरोना वायरस प्रतिबंधों की वजह से देश में बलात्‍कार की घटनाएं काफी बढ़ गईं. इससे लोगों में गुस्‍सा बढ़ता जा रहा है, जिसे देखते हुए राज्‍य के गवर्नर को आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी. गवर्नर नसीर अहमद इल रुफई ने कहा कि इस गंभीर अपराध से बच्‍चों को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही सर्जिकल केस्ट्रेशन की बात निकली. वहीं अगर महिलाएं भी यौन हिंसा की दोषी पाई जाती हैं तो उनके लिए भी मिलती-जुलती सजा है. उनकी गर्भाशय नाल निकाल दी जाएगी.

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वैसे कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी यौन अपराधियों को रोकने के लिए केस्ट्रेशन का सुझाव दिया था. हालांकि वे केमिकल यानी रासायनिक केस्ट्रेशन की बात कर रहे हैं. यहां ये जानना जरूरी है कि बधियाकरण भी दो तरीकों से होता है- सर्जिकल और केमिकल केस्ट्रेशन. सर्जिकली बधिया करने के दौरान ऑपरेशन के जरिए अपराधी के टेस्टिकल्स निकाल दिए जाते हैं. इससे यौन इच्छाएं खत्म हो जाती हैं. वैसे सजा के अलावा कई बीमारियों जैसे प्रोस्टेट कैंसर या कई बार बाइलेटरल कैंसर में भी टेस्टिकल रिमूवल होता है. पुराने जमाने में समलैंगिक पुरुषों को भी यही सजा दी जाती थी.

पुराने जमाने में समलैंगिक पुरुषों को भी यही सजा दी जाती थी- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


दूसरी तरफ, रायायनिक बधियाकरण में अपराधी को हार्मोन्स का इंजेक्शन दिया जाता है या फिर टेबलेट दी जाती है. इससे अपराधी में यौन इच्छा खत्म हो जाती है. हालांकि ये दवा समय-समय पर रिपीट करनी होती है. यही वजह है कि कई बार यौन अपराध करने वालों के लिए इस सजा को देने वाले देश डाटा मेंटेन करते हैं. नियम समय के बाद उन्हें दोबारा हार्मोन दिए जाते हैं ताकि वे अपराध न कर सकें. उन्नीसवीं सदी में एक अमेरिकी डॉ हैरी शार्प का नाम सुर्खियों में था. डॉ शार्प ने रेप के आरोप में जेल आने वाले 200 से ज्यादा अपराधियों इस तरह से नपुंसक बनाया था.
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