कोरोना ने बताया वो कौन से 5 देश हैं, जिनकी हेल्थकेयर सबसे शानदार है

कोरोना ने बताया वो कौन से 5 देश हैं, जिनकी हेल्थकेयर सबसे शानदार है
इस वक्त तक दुनिया में कोरोना संक्रमितों की संख्या 47 लाख पार कर चुकी है

कोरोना संक्रमण (corona infection) से लड़ने के दौरान ये बात और भी साफ होकर सामने आई कि कौन से देश सेहत (health) के मामले में आगे हैं. लंदन (London) के थिंक टैंक The Legatum Prosperity Index ने 167 देशों में हेल्थ का हाल जानने की कोशिश की.

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इस वक्त तक दुनिया में कोरोना संक्रमितों (corona infected) की संख्या 47 लाख पार कर चुकी है. विकसित देश भी इसके सामने लाचार दिख रहे हैं. केवल वही देश आगे हैं, जिन्होंने वक्त रहते एक्शन लिया या फिर जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़िया हैं. देशों को जांचने के लिए The Legatum ने 12 मापदंड बनाए. इसमें सेहत को लेकर लोगों की अपनी जागरुकता के साथ ये भी देखा गया कि बीमारी कितनी जल्दी अस्पताल पहुंच सकते हैं और उन्हें कितनी सुविधाएं मिलती हैं. जानते हैं ऐसे 5 देशों को, जो भले ही हेल्थ इंडेक्स (health index) में ऊपर न रहे हों लेकिन कोरोना के वक्त में इन्होंने अपनी हेल्थकेयर को बेस्ट (best healthcare) साबित कर दिया.

कैसे संभाला जापान ने
हेल्थ इंडेक्स में दूसरे नंबर पर खड़े जापान की तारीफ पूरी दुनिया कर रही है. चीन का पड़ोसी होने के बाद भी यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 16,285 है और मौत का आंकड़ा 800 से भी कम है. ये संख्या भी पिछले महीनेभर में सामने आई और 7 अप्रैल को यहां नेशनल इमरजेंसी लगा दी गई. जापान में जांच का तरीका अलग है. यहां हरेक की जांच पर जोर नहीं लेकिन कोई लक्षण होने पर सीटी स्कैन होता है और नतीजे के आधार पर इलाज या आगे की जांच होती है. जापान में कोरोना की दर कम होने के पीछे ये वजह भी मानी जा रही है कि वहां मास्क पहनने को लेकर पहले से ही जागरुकता है. साथ ही देश की 60% से बड़ी आबादी हर साल हेल्थ चेकअप कराती है.

जापान की 60% से बड़ी आबादी हर साल हेल्थ चेकअप कराती है

साउथ कोरिया बना सक्सेस स्टोरी


दक्षिण कोरिया कोरोना के वक्त से ही सक्सेस स्टोरी बनकर सामने आया है. हेल्थ इंडेक्स में ये चौथे नंबर पर है लेकिन कोरोना के मामले में काफी आगे है. यहां अब तक 11 हजार लोग कोरोना संक्रमित हैं, जबकि सिर्फ 263 मौतें हुई हैं. साल 2015 में Middle-East respiratory syndrome (Mers) झेल चुका देश किसी भी महामारी के लिए तैयार दिखता है. देश ने 450,000 से ज्यादा की आबादी का टेस्ट किया और अस्पतालों को पूरी तरह से तैयार रखा. वैसे दक्षिण कोरिया के हेल्थ सिस्टम ने भी महामारी से लड़ाई में मदद की. यहां सारे नागरिक National Health Insurance Service (NHIS) के अंदर आते हैं, जिससे इलाज का खर्च कम हो जाता है. साथ ही सार्स और मर्स झेलने की वजह से यहां पर हर पब्लिक प्लेस पर तापमान चेक करना प्रैक्टिस में है. सारी बिल्डिगों में थर्मल कैमरा लगे हुए हैं जो अधिक तापमान को पकड़ लेते हैं.

इजरायल ने बनाई टेस्ट किट
हेल्थ इंडेक्स में 11वें नंबर पर खड़े इजरायल ने भी कोरोना पर जीत हासिल की. अगर आप इजरायल के रहने वाले हैं तो आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस होना ही चाहिए. National Health Insurance Law of 1995 के तहत वहां रहने वाले अपने परिवार के मुताबिक इंश्योरेंस चुन सकते हैं, जिसमें काफी बड़ी मदद सरकार की तरफ से होती है. यहां के हेल्थ सिस्टम का अंदाजा इसी बात से लग सकता है साल 1948 में यहां केवल 53% लोगों के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस था, जो अगले 10 सालों के भीतर 90% से ऊपर चला गया. कोरोना के मामले में भी इस देश की कामयाबी का राज इसकी जागरुकता में है.

अगर आप इजरायल के रहने वाले हैं तो आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस होना ही चाहिए


यहां पर मामलों की शुरुआत में ही प्रतिबंध लग गए जो अब तक जारी हैं. जैसे कोई भी नागरिक घर से 100 मीटर यार्ड से ज्यादा दूरी तक नहीं जा सकता है, जब तक कि अस्पताल न जाना हो. सारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दुकानें बंद कर दी गईं. 20 से ज्यादा लोगों के एक जगह जमा होने पर बैन लग गया. कोरोना संक्रमण की पक्की जांच के लिए यहां की Central Virology Laboratory ने एक नई तरह की टेस्ट किट बनाई, जिसे RT-PCR कहा जा रहा है. Tel Aviv University में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर Dr Khitam Muhsen के अनुसार ये प्रामाणिक नतीजे देती है, जिसके कारण यहां पर इलाज जल्दी शुरू हो सका.

बीमारी से निपटने की जर्मन रणनीति
कोरोना से निपटने के मामले में जर्मनी की काफी तारीफ हो रही है. इसका बड़ा श्रेय जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को दिया जा रहा है. यहां पर कोरोना संक्रमितों की संख्या तो लगभग पौने 2 लाख है लेकिन इतनी बड़ी संख्या पर मृत्युदर काफी कम है. अब तक कोरोना संक्रमण से यहां 8,049 लोगों की मौत हुई है. हेल्थ इंडेक्स में 12वें नंबर पर खड़ा ये यूरोपीय देश अब अंतरराष्ट्रीय सक्सेस स्टोरी हो चुका है. दूसरे यूरोपियन देशों के मुकाबले यहां पर फेडरल सिस्टम है यानी स्टेट्स के पास ताकत है कि वे अपनी व्यवस्था कितनी बेहतर कर सकते हैं. ताकत के डीसेंट्रलाइजेशन के कारण यहां अस्पतालों में ICU और डॉक्टरों के इंतजाम बेहतर हैं. यही वजह है कि दूसरे देशों में मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल कम पड़ने की शिकायत आ रही है लेकिन जर्मनी से हालात इससे कहीं अलग हैं.

दूसरे देशों के मुकाबले जर्मनी में फेडरल सिस्टम है दो राज्यों को अधिकार देता है


ऑस्ट्रेलिया में डेथ रेट सबसे कम
ऑस्ट्रेलिया जो ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में 18वें स्थान पर है, कोरोना के मामले में नंबर 1 कहा जा सकता है. संक्रमितों की संख्या वहां 7,054 तक सिमटी हुई है, जबकि अब तक मौतें का आंकड़ा भी 100 से ऊपर नहीं पहुंचा है. ये अपने आप भी काफी बड़ी बात है. यहां का हेल्थ सिस्टम मिला-जुला है. जैसे यहां यूनिवर्सल कवरेज भी है और प्राइवेट सिस्टम भी. इस तरह के two-tier सिस्टम के कारण यहां अस्पताल सारी सुविधाओं से संपन्न हैं. इस बारे में मेलबोर्न यूनिवर्सिटी के डॉक्टर एलेक्स पॉलयेकॉव कहते हैं कि इससे हम किसी भी इमरजेंसी के लिए तैयार होते हैं. यहां तक कि कोविड-19 के मामले में निजी अस्पताल स्टैंड-बाय में रहे कि जरूरत में उनका भी इस्तेमाल हो.

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