जानिए, किस देश के कर्मचारी करते हैं सबसे ज्यादा घंटों तक काम

OECD की रैंकिंग में अधिकतम काम के लिए मैक्सिको सबसे ऊपर रहा- सांकेतिक फोटो (pixabay)

जापान के लोगों में काम के लिए एडिक्शन (work addition in Japan) इतना ज्यादा है कि कंपनियां जबर्दस्ती अपने कर्मचारियों को छुट्टियों पर भेज रही हैं. वहीं कई देशों में लंबे-लंबे घंटों तक काम लिया जाता है.

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    चीन में उसके अपने ही लोग भड़कने लगे हैं. दरअसल वहां युवा काम के लंबे-लंबे घंटों से परेशान हैं और सप्ताह के 6 दिन रोजाना 12 घंटे काम के विरोध कर रहे हैं. चीन सरकार इस अभियान की पहुंच रोकने के लिए सेंसरशिप में लगी है. वैसे चीन दुनिया का पहला या अकेला देश नहीं, जहां कर्मचारियों के काम के घंटे खिंचते हैं. यूरोपीय संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकनॉकमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के एक सर्वे में पता चला कि मैक्सिको में आधिकारिक तौर पर काम के घंटे सबसे ज्यादा हैं.

    इस देश में साल में 2127 घंटे काम
    OECD की रैंकिंग में अधिकतम काम के लिए मैक्सिको सबसे ऊपर रहा. यहां सालभर में एक कर्मचारी औसतन 2127 घंटे काम करता है. ज्यादा काम के बाद दोहरी मार ये कि यहां पर कंपनियां अपने लोगों को छुट्टियां भी कम देती है. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां सालभर में 10 सवैतनिक छुट्टि्यां हैं. 26.6% कर्मचारी काम के लंबे घंटों की शिकायत लगातार करते आ रहे हैं, हालांकि इसपर कोई सख्त नियम नहीं बन सका.

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    दूसरे नंबर पर कोस्टा रिका 
    मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका भी इसी श्रेणी में है. यहां सालभर में कर्मचारी लगभग 2060 घंटे काम करते हैं. पहले इस श्रेणी में दक्षिण कोरिया आता था. लेकिन वहां पर साल 2018 में सरकारी नियम बनाकर काम के घंटों को कम किया गया. हालांकि कम करने के बाद भी वहां हफ्ते में 52 घंटे काम देना होता है. बता दें कि विकसित मुल्कों में इसी देश में काम के घंटे सबसे लंबे हैं.

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    काम के घंटों को घटाने की बात कई देशों में हो रही है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    रूसी लोगों में भी काम की धुन 
    रूस भी काम के लंबे-लंबे घंटों के लिए जाना जाता है. वैसे वहां पर सप्ताह में 40 घंटे ही काम का नियम है. और अगर कोई ओवरटाइम करना चाहे तो उसे भी 50 घंटे से ज्यादा समय देने की इजाजत नहीं. इसके बाद भी वर्कोहलिक रूसी आबादी घर से काम करती है ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा सके. रूस में वैसे छुट्टियां भी ठीक-ठाक हैं. वहां पब्लिक हॉलिडे के अलावा साल की 28 छुट्टियां मिलनी तय हैं.

    काम के घंटे घटाने की बात कई देशों में 
    इसकी बड़ी वजह ये है कि ज्यादा काम से थके कर्मचारी परिवार पर ध्यान नहीं दे पाते. इससे देशों में जन्मदर भी तेजी से घटी. जैसे दक्षिण कोरिया में इसका असर तेजी से दिखा और 3 दशकों के भीतर ये देश बुजुर्गों का देश बनने की श्रेणी में खड़ा है.

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    तनाव और अवसाद भी लंबे काम के घंटों से उपजता है
    मिसाल के तौर पर चीन को ही लें तो इसी साल वहां की मुख्य ई-कॉमर्स कंपनी Pinduoduo में काम के बहुत दबाव के कारण दो कर्मचारियों की मौत हो गई. रात में डेढ़ बजे तक काम के बाद एक कर्मचारी एकाएक गिर गया और वहीं उसकी मौत हो गई थी. इसपर हल्ला मचने से पहले से दबा दिया गया. खुद चीन में अलीबाबा के संस्थापक ने देर तक काम की वकालत करते हुए इसे बढ़ावा दिया था.

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    लंबे काम के घंटों से तनाव और अवसाद भी उपजता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    जापान में अलग ही ट्रेंड चलता रहा 
    अनुशासन के लिए जाने जाते देश जापान में लोग काम की अपनी सनक के लिए भी जाने जाते हैं. यहां के ज्यादातर कर्मचारी इसलिए छुट्टी नहीं लेते हैं कि इस दौर में कंपनी को कोई नुकसान न हो जाए. लोगों में काम की आदत एडिक्शन बन चुकी है. वे दिन के औसतन 16 घंटे काम करते हैं.

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    जबरन भेजा जा रहा लीव पर 
    लगातार काम करने की हद ये है कि वहां हर कर्मचारी को साल में 10 पेड लीव मिलती हैं. लेकिन वे छुट्टियां नहीं लेते. तो अब वहां की सरकार ने एक तरीका ये निकाला कि कर्मचारियों को साल में एक निश्चित समय के लिए जबर्दस्ती छुट्टी पर भेजा जाने लगा. इससे तनाव भी घटेगा और उत्पादकता भी बढ़ेगी.

    साल 2020 में कोरोना के पीक पर भी कंपनियों ने ये कदम उठाया. उन्होंने कर्मचारियों के काम में घंटों में लगभग 20 प्रतिशत कटौती कर दी ताकि वे फैमिली के साथ समय बिता सकें. यही नहीं, हरेक कर्मचारी को लगभग 940 डॉलर की रकम दी ताकि वो खाली समय में मनोरंजन कर सके.

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