• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • दंगों में अव्वल है बिहार, हर दिन दर्ज हुईं इतनी घटनाएं

दंगों में अव्वल है बिहार, हर दिन दर्ज हुईं इतनी घटनाएं

नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जमकर बवाल हुआ.

नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जमकर बवाल हुआ.

बिहार (Bihar) हर तरह के दंगों (riots) में अव्वल रहा है. एनसीआरबी (NCRB) के साल 2017 के आंकड़ों में बिहार में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक, जातीय और जमीन जायदाद को लेकर दंगे हुए...

  • Share this:
    दंगों (Riots) को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) ने हैरान करने वाली जानकारी दी है. भारत में दंगे तो कम हो गए हैं लेकिन दंगा पीड़ितों (riots victims) की संख्या बढ़ गई है. एनसीआरबी (NCRB) ने इस बारे में 2017 के आंकड़े जारी किए हैं. 2017 में दंगों के 161 मामलों में 247 दंगा पीड़ितों को हर दिन दर्ज किया गया.

    दंगा पीड़ितों की संख्या एक साल पहले की तुलना में 22 फीसदी तक ज्यादा थी. इस दौरान दंगों की संख्या में कमी जरूर आई. एक साल पहले की तुलना में 2017 में 5 फीसदी कम दंगे हुए. दंगा कम लेकिन पीड़ित ज्यादा. इसका मतलब है कि दंगे भले ही कम हुए, लेकिन जो भी हुए उसकी त्रीवता ज्यादा थी. वो पहले की तुलना में ज्यादा भीषण और विस्फोटक थे. तभी दंगों की संख्या कम हुई लेकिन पीड़ित बढ़ गए.

    2017 में दंगों के कुल 58,880 मामले दर्ज हुए. इनमें दंगा पीड़ितों की संख्या थी- 90,394. जबकि एक साल पहले का आंकड़ा बताता है कि 2016 में दंगों के कुल 61,974 मामले दर्ज हुए, जिसमें दंगा पीड़ितों की संख्या थी- 73,744. एक साल में दंगों की संख्या में तो कमी दर्ज की गई लेकिन इसके पीड़ितों की संख्या बढ़ गई. 2016 में दंगों के 169 मामलों में रोज 202 पीड़ित सामने आ रहे थे.

    ये आंकड़े सिर्फ सांप्रदायिक दंगों के नहीं हैं. इसमें जमीन-जायदाद, जातीय, राजनीतिक, विभिन्न समूहों और छात्रों के बीच होने वाले दंगे भी शामिल हैं. दंगों के बारे में इंडियन पीनल कोड (IPC) का सेक्शन 146 कहता है कि किसी भी तरह का समूह अगर कानून को अपने हाथ में लेकर हिंसा या गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम देता है तो ये दंगा का मामला माना जाएगा. दंगों के मामलों में अधिकतम 2 साल और जुर्माना या फिर दोनों एकसाथ की सजा का प्रावधान है.

    बिहार है दंगों की राजधानी

    बिहार देशभर में होने वाले दंगों की राजधानी की तरह है. यहां सबसे ज्यादा दंगे होते हैं. 2017 में बिहार में दंगों के 11,698 मामले दर्ज हुए. इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. यहां दंगों के 8,990 मामले दर्ज हुए. महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर रहा. यहां दंगों के 7,743 मामले दर्ज हुए. एक साल पहले 2016 में भी बिहार में सबसे ज्यादा दंगे हुए थे.

    ncrb riots in india 2017 report maximum rioting cases in bihar
    एनसीआरबी ने दंगों को लेकर साल 2017 के आंकड़े जारी किए हैं


    बिहार में दंगे सबसे ज्यादा होते हैं लेकिन यहां दंगा पीड़ित सबसे ज्यादा नहीं हैं. सबसे ज्यादा दंगा पीड़ित हैं तमिलनाडु में. साल 2017 में तमिलनाडु में दंगों के 1935 मामले सामने आए. इन दंगों के पीड़ितों की संख्या थी- 18,749. तमिलनाडु में दंगों की संख्या कम रही लेकिन उसकी त्रीवता काफी अधिक थी. वो भीषण और विस्फोट दंगे थे, जिसमें ज्यादा लोग प्रभावित हुए. हर दंगे में औसतन 9 लोग पीड़ित हुए.

    तमिलनाडु के बारे में ये भी कहा जा सकता है कि दंगे की कुल घटनाओं में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 3.28 फीसदी थी लेकिन पीड़ितों के मामले में राज्य की हिस्सेदारी थी- 21 फीसदी. इस मामले में पंजाब सबसे शांत राज्य घोषित हुआ. इसके बाद मिजोरम, जहां सिर्फ 2 केस रजिस्टर हुए, का नंबर आता है. नगालैंड और मेघालय में दंगों के 5 केस सामने आए थे.

    कम हुए सांप्रदायिक दंगे

    2017 में सांप्रदायिक दंगों में कमी आई. 2016 में सांप्रदायिक दंगों के 869 मामले सामने आए थे, जो 2017 में घटकर 723 रह गए. इतना ही नहीं दंगा पीड़ितों की संख्या में भी कमी आई. 2016 में जहां 1,139 दंगा पीड़ित थे, वहीं साल 2017 में इनकी संख्या घटकर 1,092 रही.

    सांप्रदायिक दंगों के मामले में भी बिहार ही अव्वल रहा. साल 2017 में बिहार में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक दंगों के 163 मामले सामने आए. इसके बाद कर्नाटक और ओडिशा का नंबर आता है, जहां 92 और 91 मामले सामने आए.

    सांप्रदायिक दंगों के मामले में हरियाणा में एक साल में काफी कमी आई. 2016 में हरियाणा में सांप्रदायिक दंगों के 250 मामले दर्ज हुए थे. इन दंगों में 271 लोग पीड़ित थे. वहीं 2017 में सांप्रदायिक दंगों के सिर्फ 25 मामले सामने आए.

    ncrb riots in india 2017 report maximum rioting cases in bihar
    सांप्रदायिक दंगों के मामले में भी बिहार अव्वल है


    जातीय दंगों में भी आई कमी

    2017 में जातीय दंगों में भी कमी दर्ज की गई. 2016 की तुलना में 2017 में जातीय दंगों में 65 फीसदी की कमी आई. जातीय दंगों के मामले में यूपी अव्वल रहा. 2017 में यूपी में जातीय दंगों के 346 मामले सामने आए. हालांकि ये साल 2016 के 899 मामले से काफी कम था.

    सबसे ज्यादा जमीन जायदाद को लेकर दंगा

    दंगों के सबसे ज्यादा मामले जमीन जायदाद को लेकर हुए. 2017 में हुए कुल दंगों में 22 फीसदी दंगे जमीन जायदाद से जुड़े थे. वहीं दंगा पीड़ित भी 35 फीसदी ऐसे थे, जो जमीन जायदाद के विवाद के शिकार हुए थे.

    जमीन जायदाद के दंगों में भी बिहार अव्वल है. बिहार में कुल 7,030 मामले दर्ज हुए. इसके बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. तमिलनाडु में सबसे कम 587 दंगे जमीन जायदाद से जुड़े हुए. लेकिन इन दंगों में सबसे ज्यादा 17,045 पीड़ित सामने आए. जमीन जायदाद के दंगों में भी संख्या कम रही लेकिन पीड़ित ज्यादा.

    ये भी पढ़ें: इस राज्य में सबसे ज्यादा होता है दलितों पर अत्याचार

    जन्मदिन विशेष: यूं ही चाणक्य नहीं कहलाते अमित शाह, 1990 में ही कर दी थी मोदी के पीएम बनने की भविष्यवाणी

    चीन और अमेरिका से ज्यादा अवसादग्रस्त भारत में क्यों बढ़ रहे हैं

    इस गांव के लिए Google मैप बना खतरा, पुलिस ने लोगों को यूज़ न करने की दी सलाह

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन