एक लाख सालों तक युद्ध लड़ती रही दो मानव प्रजातियां- कैसे मिले प्रमाण

होमो सेपियन्स (Homo sapiens) और निएंडरथॉल (Neanderthals) के बीच संघर्ष एक लाख साल तक चला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
होमो सेपियन्स (Homo sapiens) और निएंडरथॉल (Neanderthals) के बीच संघर्ष एक लाख साल तक चला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

इंसान (Humans) की दो प्रमुख प्रजातियों (Species) होमो सेपियन्स (Homo Sapiens) और निएंडरथॉल (Neanderthals) के बीच एक लाख सालों तक युद्ध (War) चला था. इस बात के विस्तृत प्रमाण मिले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 6:46 AM IST
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आज का इंसान युद्ध (War) के ज्यादा विनाशकारी रूप लाता जा रहा है. युद्ध का भी अपना इतिहास (History) है. लेकिन प्रागैतिहासिक काल (Prehisotry) में इंसान जानवरों से लड़ाई तो करता था. वह पर्यावरण के मौसम और जलवायु परिवर्तन से भी लोहा लेता था. लेकिन कम लोग जानते हैं उस समय के मानव प्रजातियों (Homo speices) के बीच भी युद्ध हुआ था और यह युद्ध एक दो सदी नहीं बल्कि एक लाख सालों (One lack years) तक चला था. वैज्ञानिकों को इस  संबंध में खास प्रमाण मिले हैं कि एक समय होमो सेपियन्स (Homo sapiens) और निएंडरथल (Neanderthals) प्रजातियों में लंबे समय तक युद्ध छिड़ा था.

दो प्रजातियों का युद्ध
करीब छह लाख साल पहले इंसान दो भागों में बंटे थे. एक समूह अफ्रीका में था जो अंततः आज के इंसान में विकसित हुआ. दूसरा समूह एशिया फिर यूरोप में छाया रहा जो होमो निएंडरथलेन्सिस जिन्हें निएंडरथेल्स के नाम से जाना जाता है. यह प्रजाति हमारे पूर्वज नहीं थे. लेकिन हमारे साथ ही विकसित होने वाले हमारे ही संबंधी थे.

निएंडरथॉल नहीं थे शांतिप्रिय
मानव शास्त्रियों के लिए निएंडरथॉल बहुत अहम हैं क्योंकि उनसे हम इंसानों के विकास के बारे में काफी कुछ पता चलता है. जीवविज्ञान और जीवाश्म विज्ञान इन दोनों प्रजातियों के बारे में अच्छी तस्वीर पेश नहीं करते हैं. निएंडरथॉल शातिप्रिय प्रजाति नहीं थी. वे बहुत ही सक्षम और खतरनाक योद्धा था और उनके दुश्मन थे आधुनिक मानव.



आपसी संघर्ष की वजह
निएंडरथॉल एक बेहतरीन शिकारी प्रजाति के तौर पर विकसित हुए. वे शेरों और भेड़ियों की तरह मिलकर बड़े शिकार करने में माहिर थे और खाद्य शृंखला में शीर्ष पर थे. इस तरह के जानवरों के साथ एक समस्या होती है. वे खुद का भी शिकार करने लगते हैं. जनसंख्या बढ़ने पर उनमें शिकार के इलाकों के लिए आपस में ही संघर्ष होने लगता है. निएंडरथॉल के साथ भी यही समस्या रही. अगर दूसरी प्रजातियां जनसंख्या नियंत्रित नहीं कर सकें तो आपसी संघर्ष कर देता है.

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निएंडरथॉल (Neanderthals) बहुत खतरनाक योद्धा थे, लेकिन अंततः उनकी हार हुई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


अपने इलाके से मोह
इंसानों में अपने क्षेत्र या इलाके प्रति बहुत गहरा मोह रहता है. इलाकों को लेकर संघर्ष में हमारे नजदीकी संबंधियों चिंपाजियों से भी हुआ.  पुरुष चिंपांजी भी मिलकर इंसानों के समूह पर हमलाकर उन्हें मारते थे. जो इंसानी युद्ध की तरह का बर्ताव था. इससे यह पता चलता है कि सामूहिक आक्रामकता चिंपांजी और हम इंसानों में करीब 70 लाख साल पहले से रहा. यही वजह रही है कि निएंडरथॉल को भी इस तरह के बर्ताव विरासत में मिले होंगे.

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दोनों ही प्रजातियां एक सी
कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए कि निएंडरथॉल हम इंसानों की तरह थे, युद्ध में भी. शोध बताता है कि दोनों में 99.7 प्रतिशत डीएनए समानता है. बर्ताव के तौर पर निएंडरथॉल हमारी ही तरह थे. आग जलाना, लाश दफनाना, फैशन, समुद्री जेवर, जानवरों के दातों का उपयोग, पत्थर के मकबरे आदि के अलावा विनाशकारी मानसिकता भी.

निएंडरथॉल थे खतरनाक
पुरतात्व रिकॉर्ड बताते हैं कि निएंडरथॉल शांतिप्रिय कतई नहीं थे. वे बड़े शिकारी थे, भालों का उपयोग करते थे. हिरन और भैसों से लेकर गैंडो और मैमथ जैसे विशालकाय जीवों तक का शिकार कर लेते थे. पुरात्तव प्रमाण बताते हैं कि अगर उनके घर या जमीन को कोई खतरा होता था तो उनमें संघर्ष भी आम ही था.

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होमो सेपियन्स (Homo sapiens) को एशिया और यूरोप में निएंडरथॉल (Neanderthals) के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


युद्ध के प्रमाण
पुरातन काल के मिले मानव शरीर के अवशेषों पर निशान साफ तौर पर बताते हैं कि कैसे होमो सेपियन्स और निएंडरथॉल दोनों ही एक दूसरे और अपनी प्रजाति के अन्य लोगों को मारने के लिए हथियारों का उपयोग करते थे. इतना ही नहीं खुदाई में मिले हथियार भी यही कहानी कहते हैं.  मानव कंकालों पर निशान, टूटी हड्डियां साफ तौर पर युद्ध के स्तर के संघर्ष की दास्तान बयां करती है.

एक लाख साल तक संघर्ष
विभिन्न जगहों के मिले अवशेषों के अध्ययन बताते हैं कि होमो सेपियन्स के विस्तार से निएंडरथॉल ने करीब एक लाख सालों तक संघर्ष किया. दोनों के संघर्ष के कारण ही होमो सेपियन्स को यूरोप और एशिया तक फैलने में इतना समय लग गया.

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कंवरशेसन में प्रकाशित लेख में बाथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के इस अध्ययन ने बताया है कि बेशक शुरू में निएंडरथॉल होमोसेपियन्स से युद्ध कला में बेहतर और शक्तिशाली थे, लेकिन शायद बाद में होमोसेपियन्स ने बेहतर हथियार या शिकार की तकनीकों ने उन्हें वर्चस्व की लड़ाई जीतने में मदद की.
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