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नेहरू ने आरे कॉलोनी में रोपा पहला पौधा, फिर 'कश्मीर' जैसी हो गई रंगत

News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 2:32 PM IST
नेहरू ने आरे कॉलोनी में रोपा पहला पौधा, फिर 'कश्मीर' जैसी हो गई रंगत
पौधा रोपकर जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी आरे कॉलोनी की नींव.

आरे कॉलोनी (Aarey Colony) और जंगलों (Forest) के बीच एक 'छोटा कश्मीर' है. यही नहीं, जानें कैसे नैनीताल (Nainital) के चित्रों के तौर पर भी आपने आरे कॉलोनी देखी है.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 2:32 PM IST
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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) स्थित आरे कॉलोनी (Aarey Milk Colony) में पेड़ों की कटाई पर मचे बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगाकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अब इस मामले में सुनवाई चलेगी, लेकिन आपको जानना चाहिए कि मुंबई का फेफड़ा (Mumbai Forest) कहे जाने वाले आरे जंगल पर संकट को लेकर इतना बवाल क्यों हुआ कि लोग सड़कों पर उतर आए और पेड़ों से लिपटकर रोए. असल में, पर्यावरण (Environment Issue) के नज़रिए के साथ ही इस जंगल और कॉलोनी का रोचक ऐतिहासिक महत्व भी रहा है.

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नेहरू ने पौधा लगाकर किया था उद्घाटन
आज़ादी के सिर्फ चार साल बाद ही पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) ने मुंबई की इस आरे कॉलोनी का उद्घाटन एक पौधा रोपकर किया था. गत 5 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में न्यूज़18 हिंदी ने आपको ये भी बताया था कि 1951 में मुंबई में डेयरी उद्योग (Dairy Production) को बढ़ावा देने के लिए पंडित नेहरू ने आरे मिल्क कॉलोनी की नींव रखी थी. नेहरू के पौधारोपण (Plantation) के बाद यहां इतने लोगों ने पौधे रोपे कि कुछ ही वर्षों में ये इलाका जंगल में तब्दील हो गया. ये पूरा वन्य इलाका 3166 एकड़ में फैला है.

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आरे कॉलोनी के बीच पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है यह छोटा कश्मीर.


दारा खुरोड़ी का था आइडिया
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साल 1949 में मुंबई में डेयरी उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने को लेकर आरे मिल्क कॉलोनी की स्थापना के विचार की शुरुआत हुई थी. यह विचार मूलत: दारा खुरोड़ी का था जिन्हें मुंबई में डेयरी सेक्टर का प्रणेता माना जाता है. देश में दुग्ध क्रांति के लिए चर्चित रहे डॉक्टर वर्गीज़ कुरियन के साथ दारा को संयुक्त रूप से 1963 में रैमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

इसी जंगल में बनी फिल्मसिटी
आरे मिल्क कॉलोनी का विस्तार काफी है, जिसमें 12 गांव या इलाके शामिल हैं : साई, गुंडगांव, फिल्मसिटी, रॉयल पाम्स, डिंडोशी, आरे, पहाड़ी गोरेगांव, व्यारावाल, कोंडिविटा, मरोशी या मरोल, परजापुर और पासपोली. इन तमाम इलाकों को मिलाकर आरे मिल्क कॉलोनी की अवधारणा रखी गई थी और 1977 में इसी इलाके में फिल्मों की शूटिंग की लोकेशन के लिहाज़ से 200 हेक्टेयर के क्षेत्र में फिल्मसिटी की शुरुआत हुई थी, जो आज मुंबई का काफी प्रसिद्ध इलाका है.

नैनीताल जैसा था आरे का जंगल?
नेहरू के पौधारोपण के बाद पौधे लगाने के जन अभियान से जंगल बनी आरे कॉलोनी कुछ ही सालों में एक खूबसूरत और हरे भरे जंगल में तब्दील होकर मुंबई की धड़कन बन गई थी. इसका प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षक था और 1958 में मशहूर फिल्मकार बिमल रॉय ने अपनी क्लासिक फिल्म मधुमती के लिए यहां शूटिंग की थी. असल में, बिमल दा इस फिल्म के लिए नैनीताल में शूट कर चुके थे और उन्हें उस सीन की मैचिंग के लिए जब शूट करना पड़ा, तो आरे के जंगल में उन्होंने नैनीताल की झलक देखी थी.

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आरे जंगल के इस तरह के कुदरती दृश्य फिल्मकारों को शूटिंग के लिए लुभाते रहे हैं. (इस स्टोरी के सभी चित्र विकिपीडिया से साभार.)


छोटा कश्मीर, चिड़ियाघर और नेशनल पार्क
आरे मिल्क कॉलोनी पर्यावरण के लिहाज़ से मुंबई के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है. यहां बगीचे, पशुपालन, नर्सरियां और झीलें हैं. यहां पिकनिक स्पॉट के तौर पर छोटा कश्मीर नाम से एक जगह है जो भरपूर हरियाली और झील से घिरी हुई है और पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण है. इसके साथ ही, एक चिड़ियाघर और संजय गांधी नेशनल पार्क भी आरे से सटा हुआ है.

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First published: October 7, 2019, 1:42 PM IST
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