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क्या है नेहरू-लियाकत पैक्ट, जिसका जिक्र कर अमित शाह ने किया नागरिकता बिल का बचाव

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 10:41 AM IST
क्या है नेहरू-लियाकत पैक्ट, जिसका जिक्र कर अमित शाह ने किया नागरिकता बिल का बचाव
भारत पाकिस्तान के बीच 1950 में नेहरू-लियाकत पैक्ट हुआ था

बंटवारे के बाद भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के अल्पसंख्यकों (minorities) के साथ अत्याचार के भयावह मामले सामने आ रहे थे. इस पूरे मसले को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान (Liaquat Ali Khan) और भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) के बीच एक पैक्ट हुआ था...

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  • Last Updated: December 11, 2019, 10:41 AM IST
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लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक ( Citizenship Amendment Bill 2019 ) को पेश करते वक्त गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने नेहरू-लियाकत पैक्ट (Nehru-Liaquat pact) का जिक्र किया. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर नेहरू-लियाकत पैक्ट फेल नहीं हुआ होता तो आज नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश करने की जरूरत नहीं पड़ती. सवाल है कि नेहरू-लियाकत पैक्ट था क्या? क्यों अमित शाह इसका जिक्र कर नए नागरिकता बिल का बचाव कर रहे थे?

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद लाखों लोगों का पलायन हुआ था. हिंदुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने वाले लोगों की संख्या लाखों में थी. विस्थापन के दर्द ने आजादी की खुशी को खत्म कर दिया था. बंटवारे के बाद जगह-जगह दंगे फैल गए. दिसंबर 1949 में दोनों देशों के बीच के व्यापारिक संबंध खत्म हो गए. 1950 तक पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) से करीब 10 लाख हिंदू सीमा पार कर हिंदुस्तान आ गए. उसी तरह से पश्चिम बंगाल से लाखों मुसलमान सीमा पार कर पाकिस्तान चले गए.

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हुआ था नेहरू-लियाकत पैक्ट
उस वक्त माहौल बड़ा विस्फोटक था. दोनों देशों के अल्पसंख्यकों के साथ काफी अत्याचार हुए. महिलाओं से बलात्कार के मामले सामने आए. पुरुषों और बच्चों की क्रूरता से मार डालने की घटनाएं हुई. इस पूरे मसले को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच एक पैक्ट हुआ, जिसे नेहरू-लियाकत पैक्ट के नाम से जाना जाता है.

दिल्ली में करीब एक हफ्ते की बैठक चलने के बाद दोनों देश एक एग्रीमेंट पर राजी हुए. इस पैक्ट में दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उन्हें बाकी नागरिकों की तरह अधिकार देने का वादा किया गया था.

nehru liaquat pact why amit shah mentioned to defend citizenship amendment bill in parliament
नेहरू-लियाकत पैक्ट का जिक्र कर अमित शाह ने नागरिकता बिल का बचाव किया


इस पैक्ट के अहम बिंदु थे--पलायन करने वाले लोगों को ट्रांजिट के दौरान सुरक्षा दी जाएगी. उन्हें अपनी संपत्ति को बेचने का अधिकार होगा और इसके लिए वो सुरक्षित आ-जा सकते हैं.

-अवैध तरीके से अल्पसंख्यकों की कब्जाई संपत्ति को उन्हें वापस लौटाया जाएगा, जिन औरतों को अगवा किया गया है उन्हें उनके परिवार को वापस सौंपा जाएगा.

-दोनों देश अपने यहां के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेंगे. अल्पसंख्यकों को देश के दूसरे नागरिकों की तरह अधिकार दिए जाएंगे. जबरदस्ती धर्म परिवर्तन अवैध होगा और इसे रोका जाएगा.

-दोनों देश संयम से काम लेंगे और युद्ध भड़काने वाली और देश की अखंडता को प्रभावित करने वाले प्रचार को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा.

पैक्ट के विरोध में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दिया था इस्तीफा
इस समझौते को लागू करवाने के लिए दोनों देशों ने अपने अपने यहां अल्पसंख्यक आयोग बनाए, जिनका काम था इन समझौतों को पालन करवाना. दिल्ली के गवर्नमेंट हाउस में इस समझौते पर नेहरू और लियाकत अली खान ने दस्तखत किए थे.

नेहरू-लियाकत पैक्ट का उस वक्त नेहरू सरकार में उद्योग मंत्री रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विरोध किया था. समझौता होने के दो दिन बाद ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. मुखर्जी ने बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो बाद में चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी.

नेहरू लियाकत पैक्ट सफल रहा या नहीं इसको लेकर बहस चलती रही. इस पैक्ट के लागू होने के बाद भी पूर्वी पाकिस्तान से हिंदुओं का भारत में पलायन जारी रहा. अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं सामने आती रहीं.

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असम में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लगाई गई आग को बुझाता पुलिसकर्मी (News18)


जब संसद में उठा था नेहरू-लियाकत पैक्ट पर सवाल
नेहरू-लियाकत पैक्ट पर सवाल उठाते हुए अगस्त 1966 में जनसंघ नेता निरंजन वर्मा ने उस वक्त के विदेश मंत्री रहे सरदार स्वर्ण सिंह से कुछ सवाल पूछे थे. उन्होंने पूछा था कि नेहरू-लियाकत पैक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या दोनों देश अब भी इस पैक्ट के अनुसार चल रहे हैं और अगर पाकिस्तान पैक्ट का उल्लंघन कर रहा है तो ये कब से हो रहा है?

सरदार स्वर्ण सिंह ने इसका जवाब देते हुए कहा था कि 1950 में नेहरू लियाकत पैक्ट भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इस पैक्ट के मुताबिक दोनों देशों को अपने यहां के अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है. दोनों देशों को देखना चाहिए कि उनके यहां अल्पसंख्यकों को बाकी नागरिकों की तरह सारे अधिकार मिल रहे हों.

स्वर्ण सिंह ने कहा था कि जहां तक भारत का सवाल है. भारत ने इस पैक्ट का सम्मान करते हुए अपने यहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है. यहां अल्पसंख्यक अपने नागरिक अधिकारों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान ने इसका बार-बार उल्लंघन किया है. पाकिस्तान में अब भी अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार के मामले सामने आ रहे हैं.

पाकिस्तान पैक्ट का उल्लंघन कब से कर रहा है, इस सवाल का जवाब देते हुए स्वर्ण सिंह ने कहा था कि जब से नेहरू-लियाकत पैक्ट बना, उसके तुरंत बाद से ही पाकिस्तान में इसके उल्लंघन के मामले सामने आने लगे.

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First published: December 11, 2019, 10:14 AM IST
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