होम /न्यूज /नॉलेज /वैज्ञानिकों को डार्क मैटर से भरी मिली पास की एक गैलेक्सी

वैज्ञानिकों को डार्क मैटर से भरी मिली पास की एक गैलेक्सी

यह गैलेक्सी (Galaxy) हमारी मिल्कीवे की सैटेलाइट गैलेक्सी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Kavli IPMU)

यह गैलेक्सी (Galaxy) हमारी मिल्कीवे की सैटेलाइट गैलेक्सी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Kavli IPMU)

मिल्की वे गैलेक्सी (Milky Way Galaxy) की सैटालाइट गैलेक्सी ने वैज्ञानिकों को चौंकाया है क्योंकि इसमें गैस या तारे ना हो ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

सैजिटेरियस बौनी गैलेक्सी मिल्की वे की सैटेलाइट गैलेक्सी है.
गैस, तारे या उनके अवशेष ना होने पर इससे गामा विकिरण हो रहा है.
इसके दो कारणों में से इसके अंदर मौजूद डार्क मैटर भी हो सकता है.

ब्रह्माण्ड में असामान्य पिंड केवल पृथ्वी से बहुत दूर ही नहीं बल्कि मिल्की वे गैलेक्सी (Milky
Way Galaxy) और उसके आसपास भी हैं. अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मिल्की वे के पास उसकी एक सैटेलाइट गैलेक्सी खोजी है जो काफी असामान्य है. उन्होंने पाया है कि यह गैलेक्सी डार्क मैटर से भरी हुई है. सैजिटेरियस बौनी गैलेक्सी (Sagittarius Dwarf Galaxy) नाम की इस गैलेक्सी की खोज करीब 10 साल पहले हुई थी लेकिन उसका स्रोत का  पता नहीं चल सका था. इस गैलेक्सी में ना गैस या तारे या उनके अवशेष नहीं है फिर भी यह गामा विकिरण का उत्सर्जन कर रही है. इसकी वजह डार्क मैटर (Dark Matter) या मिली सेकेंड पल्सर में से एक हो सकता है.

बुलबुले का जोड़ा
नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्तों ने पाया कि यहां से हो रहा गामा विकिरण असामान्य बात है और ज्यादा संभावना इसी बात की है इस उत्सर्जन की वजह खगोलीय विकिरण फेंकने वाले मिलीसेंकेड वाले पल्सर के नतीजे हो सकते हैं.  इस गैलेक्सी का केंद्र गामा विकिरण का चमकाते हुए बुलबुले का जोड़ा है जो 50 हजार प्रकाशवर्ष के इलाके में फैला हुआ है.

रहस्यमयी संरचना का उत्सर्जन
यह रेत की घड़ी के आकार की परिघटना करीब 10 साल पहले फर्मी गामा रे स्पेस टेलीस्कोप से देखी गई थी, लेकिन उसकी उत्पत्ति एक रहस्य ही बनी रही थी. इस पिंड के विकिरण वाले हिस्सों को फर्मी बुलबुले कहा जाता है जो रहस्यमी संरचनाओं के साथ जुड़े हैं जो बहुत ही चमकदार गामा विकिरणों का उत्सर्जन कर रहे हैं.

फर्मी बुलबले के अंदर गैलेक्सी
इसमें से चकमीले इलाके, जो दक्षिणी हिस्से का सबसे चमकीला हिस्सा है, के बारे में माना जाता था कि यह गैलेक्सी के सुपरमासिव ब्लैकहोल के प्रस्फोट का नतीजा था, इसीलिए काव्ली इंस्टीट्यूट फॉर फिजिक्स एंड मैथेमैटिक्स ऑप यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोजेक्ट शोधकर्ता और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर रोनाल्ट क्रूकर, और शुनसाका होरियूची एवं शिनइचिरो एंडो ने ईसा की GAIA और फर्मी स्पेस टेलीस्कोप के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इससे उन्होंने पाया कि फर्मी कैकून वास्तव में सैजिटेरियस बौनी गैलेक्सी के उत्सर्जन की वजह से बन रहा है.

Galaxy, Dark Matter, Milky Way, Satellite Galaxy, Galaxy Filled with Dark Matter, Pulsar, gamma radiation, dwarf galaxy, Sagittarius dwarf galaxy, Millisecond Pulsar,

इस अध्ययन से मिल्की वे गैलेक्सी (Milky Way Galaxy) की सैटेलाइट गैलेक्सी के बर्ताव की बेहतर व्याख्या हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA_JPL-Caltech)

गामा विकिरण के कारण
मिल्की वे की यह सैटेलाइट गैलेक्सी पृथ्वी की ओर से देखने पर फर्मी बुलबुलों के अंदर दिखाई देती है. उसकी नजदीकी कक्षा होने के कारण और पहले भी कई बार चक्कर लगाने के कराम इसके अंतरतारकीय गैस और उसके बहुत से तारे उसके क्रोड़ निकली धारा के जरिए खत्म हो चुके हैं. फिर भी यहां से गामा विकिरण उत्सर्जन होने के दो ही कारण, एक तो मिलीसेंकड की पल्सर की जनसंख्या या दूसरा फिर डार्क मैटर का विलोपन, हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने खोजा 30 छल्लों का ‘सुपर सैटर्न’, शनि से है 200 गुना ज्यादा बड़ा

क्या होते हैं मिलीसेकेंड पल्सर
मिलीसेकंड पल्सरक कुछ प्रकार के तारों के अवशेष होते हैं जो सूर्य से ज्यादा भारी होते हैं और समीपद्वीज तारें के तंत्र का हिस्सा रहे होते हैं , लेकिन अब वे खगोलीय कणों का उत्सर्जित कर रहे होते हैं जो उनके बहुत ही ज्यादा घूर्णन ऊर्जा का नतीजा होती है. इसके द्वारा फेंके गए इलेक्ट्रॉन पृष्ठभूमि के आ रहे निम्न ऊर्जा के फोटोन से टकराने से उच्च ऊर्जा वाले गामा विकिरणों में तब्दील हो जाते हैं.

Galaxy, Dark Matter, Milky Way, Satellite Galaxy, Galaxy Filled with Dark Matter, Pulsar, gamma radiation, dwarf galaxy, Sagittarius dwarf galaxy, Millisecond Pulsar,

शोधकर्ताओं का कहना है कि गामा विकिरण बहुत ही तेजी से घूमने वाले खास तरह के तारों के अवशेषों के पिंड पल्सर (Pulsar) की वजह से हो रहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मिली सेकेंड पल्सर पर जोर
शोधकर्ताओं ने प्रदर्शित किया कि गामा विकिरण कोकून की व्याख्या सैजिटेरियास बौने के मिलीसेकेंड पल्सर द्वारा की जा सकती है. इससे इसकी डार्क मैटर वाली व्याख्या को खारिज किया जा सकता है. इस खोज ने मिली सेकेंड पल्सर के उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन और पोजीट्रॉन  के कारगर एक्सीलटेर्स होने पर प्रकाश डाला है. इसके साथ इसमें यह भी सुझाया गया है कि इसी तरह की प्रक्रिया मिल्की वे की बाकी बौनी गैलेक्सी में भी हो सकती हैं.

यह भी पढ़ें: मंगल पर जाने से पहले शुक्र पर भेजने चाहिए यान, ऐसा क्यों सोचते हैं वैज्ञानिक

यह बहुत अहम हैक्यों डार्क मैटर के शोधकर्ता लंबे समय से विश्वास करते थे कि बौनी सैटेलाइट गैलेक्सी से गामा विकिरण होना पाया जाना, डार्क मैटर के विलोपन का संकेत होता है. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका वर्तमान अध्ययन बताता  है कि उच्च ऊर्जा की उत्सर्जन क्षमता  वाले  शांत छोटे पिंडों का गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है .

Tags: Galaxy, Research, Science, Space

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें