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Nelson Mandela Death Anniversary: आजादी के लिए गहन संघर्ष की कहानी

Nelson Mandela Death Anniversary: आजादी के लिए गहन संघर्ष की कहानी

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) को दक्षिण अफ्रिका में सभी समुदायों में भेदभाव मिटाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था. (Alessia Pierdomenico / Shutterstock)

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) को दक्षिण अफ्रिका में सभी समुदायों में भेदभाव मिटाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था. (Alessia Pierdomenico / Shutterstock)

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) ने 27 साल जेल में रह कर मुश्किल हालातों में शांति और रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया. यह संघर्ष उनके जीवन में काफी पहले से शुरू हो गया था. एक समय उन्हें जेल में बाहर की कोई भी जानकारी होने नहीं दी जाती थी. इन हालातों में उन्होंने जेल में कैदियों और उनकी सुविधाओं के लिए संघर्ष किया. बाद में उन्हें कुछ रियायतें मिली जिससे वे देश की राजनीति में सक्रिय रह सके. लेकिन इस संघर्ष का ही नतीजा था कि 1990 में रिहा होने के बाद वे देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने.

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    भारत और दक्षिण अफ्रिका (South Africa) दोनों ही देशों को आजादी के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा. जहां भारत की आजादी में गांधी जी (Mahatma Gandhi) के योगदान को बहुत बड़ा माना जाता है तो वहीं दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) को वहां का गांधी कहा जाता है. लेकिन दोनों देशों की कहनी बहुत अलग भी है. जहां भारत में स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी गई तो दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष आजादी के साथ रंगभेद के भी खिलाफ था इसी तरह नेल्सन मंडेला का भी संघर्ष एक अलग ही कहानी है. 5 दिसंबर को दुनिया उनकी पुण्यतिथि पर उनके योगदान के लिए याद कर रही है.

    वकालत के लिए छोड़ा पद
    नेल्सन रोलिह्लाला मंडेला का जन्म दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत में उम्टाटा के म्वेजो गांव में 18 जुलाई 1918 को हुआ था. नेल्सन के पिता म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे, उनकी शिक्षा मिशनरी स्कूलों में हुई. 12 साल की उम्र में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद उन्होंने वाकालत की पढ़ाई के लिए अपने जाति के सरदार पद को छोड़ दिया था.

    वकालत के दौरान नस्लभेद और भेदभाव के खिलाफ
    1941 में 23 साल की उम्र में मंडेला अपनी ही शादी से उठकर जोहानिसबर्ग भाग गए थे. दो साल बाद वो अफ्रीकानेर विटवाटरस्रांड विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई करने लगे, जहां उनकी मुलाकात अलग अलग नस्लों और पृष्ठभूमि के लोगों से हुई. इस दौरान वो उदारवादी, कट्टरपंथी और अफ्रीकी विचारधाराओं के संपर्क में आए. नस्लभेद और कई तरह के भेदभाव के चलते राजनीति के प्रति उनमें जुनून पैदा हुआ.

    वकालत से पहले ही राजनीति
    वकालत पूरी करने से पहले ही मंडेला 1944 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए. जल्दी ही अपने खुशमिजाज व्यक्तित्व की वजह से वे सबसे प्रिय हो गए और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की और तीन साल बाद उसके सचिव भी बने. और ट्रांसवेल प्रांत की अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के कार्यकारी समिति के सदस्य भी चुने गए.

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    नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) को 27 साल जेल में रहकर भी संघर्ष करना पड़ा था. (तस्वीर: cRadu Bercan / shutterstock)

    राष्ट्रीय स्तर पर रंगभेद के खिलाफ
    राजनीति में व्यस्त रहने के कारण मंडेला तीन बार वकालत की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में नाकाम हुए लेकिन 1949 में उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल कर ही ली. 1950 में वे एएनसी के नेशनल एक्जीक्यूटिव चुने गए. इसके बाद उन्होंने अफ्रकी, भारतीय और अन्य समुदायों को एक साथ लाने का प्रयास किया. और नस्लभेद के खिलाफ काम करते रहे.

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    नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: rnkadsgn/shutterstock)

    उम्रकैद की सजा का मामला
    1956 में 155 अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मंडेला पर देशद्रोह का मामला चला, लेकिन चार साल की सुनवाई के बाद लेकिन वे बेकसूर साबित हुए और उनके खिलाफ लगे आरोप हटा लिए गए. अगले साल उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने के लिए उन पर मुकदमा चला और उन्हें 1964 में देश द्रोह की सजा सुनाई गई.

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    जेल में संघर्ष
    जेल में भी मंडेला का एक नया संघर्ष शुरू हुआ. सजा के लिए उन्हें रॉबिन द्वीप की जेल भेजा गया जो भारत के कालापानी की सजा के लिए अंडमान की सेल्युलर जेल की तरह बदनाम थी. इस जेल में वे 18 साल तक रहे और अश्वेत कैदियों के लिए संघर्ष करते रहे. उन्हें कई बार एकांत कोठी में कैद रखा गया जिसमें अधिकांश बार अखबार की कतरने मिलने के आरोप कारण था जिसके लिए उनपर पाबंदी थी.

    राजनैतिक रियायतें और सेहत
    इसके बाद 1988 तक वे केपटाउन की पोल्समूर जेल और फिर 1990 तक विक्टर वेर्स्टर जेल में रहे. दोनों ही जगह उन्हें कई राजनैतिक छूट मिलीं जिससे वे दक्षिण अफ्रिका के राजनैतिक पटल पर विशेष शख्सियत बने रहे. उन्होंने तत्कालीन दक्षिण अफ्रीकी सरकार के कई प्रस्तावों को भी ठुकराया. इस दौरान उनका स्वास्थ्य भी कई बार खराब रहा.

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    11 फरवरी 1990 को 27 साल जेल में काटने के बाद उनकी रिहाई हुई. इसके बाद उन्होंने देश में एक लोकतांत्रिक और बहुजातीय दक्षिण अफ्रीका की नींव रखी. 1994 के भेदभाव रहित चुनाव में मंडेला की अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त कर जीत हासिल की और मंडेला अपने देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने. दक्षिण अफ्रीका का नया संविधान 1996 में लागू हुआ. 1997 में सक्रिय राजनीति छोड़ने के बाद 5 दिसंबर 2013 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.

    Tags: South africa, World

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