जानिए, नेपाल के PM ओली की संपत्ति में चीन का कितना योगदान है

जानिए, नेपाल के PM ओली की संपत्ति में चीन का कितना योगदान है
ओली राजनीति में सत्तर के दशक से जुड़े लेकिन सक्रियता बाद के सालों में आई (Photo-moneycontrol)

हाल ही में गरीबी से बाहर आए नेपाल के पीएम केपी शर्मी ओली (Prime Minister of Nepal KP Sharma Oli) के पास बेशुमार दौलत है. यहां तक कि स्विस बैंक में उनके अकाउंट (Swiss bank account) पर हर साल करोड़ों का ब्याज मिल रहा है.

  • Share this:
अब चीन (China) पर आरोप लगा है कि वो आर्थिक तौर पर कमजोर देशों के नेताओं का का इस्तेमाल करता है ताकि उस देश में अपनी पकड़ मजबूत कर सके. ग्लोबल वॉच एनालिसिस (Global Watch Analysis) ने अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है. इसका उदाहरण है नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली.  कहा जा रहा है कि पीएम को रिश्वत देकर चीन ने नेपाल में घुसपैठ की. ओली पर ये भी आरोप है कि वे चीन के साथ कई बिजनेस डील में लगातार घपले करते आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इसी वजह से बीते कुछ ही सालों में ओली की प्रॉपर्टी कई गुना बढ़ गई. जानिए, नेपाल के पीएम के पास कितनी संपत्ति है.

कब की ओली ने शुरुआत
ओली राजनीति में सत्तर के दशक से जुड़े लेकिन सक्रियता बाद के सालों में आई. वे दो बार पीएम बन चुके हैं. ये उनका दूसरा कार्यकाल है. इससे पहले साल 2015 में ओली ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन बाद में गठबंधन सदस्यों ने अपना हाथ खींच लिया और ओली को जुलाई 2016 में ही इस्तीफा देना पड़ा. तब भी ओली ने आरोप लगाया था कि ये भारत का काम है. ओली का कहना था कि वे नेपाल को आर्थिक मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं और भारत ऐसा होने नहीं दे रहा. बता दें कि तब तक नेपाल में चीन का हाथ फैलने लगा था और इनवेस्टमेंट के जरिए दखल भी बढ़ने लगा था.

चीन पर आरोप है कि वो आर्थिक तौर पर कमजोर देशों के नेताओं का का इस्तेमाल करता है

कैसी है नेपाल की माली हालत


दूसरी बार ओली फरवरी 2018 में वापस लौटे. तब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल देश की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. इस बीच नेपाल में चीन का इनवेस्टमेंट तेजी से बढ़ा और इसके साथ ही नेपाल में प्रति व्यक्ति आय में भी इजाफा देखा गया. इसी साल 1 जुलाई को वर्ल्ड बैंक ने एक रिपोर्ट जारी की. इसके मुताबिक यहां पर प्रति व्यक्ति आय में साल 2018 से अब तक तेजी आई है. दो साल पहले पर कैपिटा इनकम 960 डॉलर थी, वहीं 2019 में ये 1090 हो गई. इसके साथ ही नेपाल गरीब देशों की श्रेणी से ऊपर आते हुए वर्ल्ड बैंक के जरिए लोअर मिडिल इनकम ग्रुप में आ गया. बता दें कि अगर देश में पर कैपिटा इनकम 1036 डॉलर से कम हो तो ही वो गरीब देश कहलाता है.

ये भी पढ़ें: कितनी घातक है अमेरिकी असॉल्ट राइफल, जो अब दुश्मन के हौसले करेगी पस्त

क्या कहती है रिपोर्ट
एक ओर नेपाल में पर कैपिटा इनकम में चीनी इनवेस्टमेंट से इजाफा हुआ तो दूसरी ओर पीअम ओली की संपत्ति और भी तेजी से बढ़ी. ग्लोबल वॉच एनालिसिस की ताजा रिपोर्ट में बताया गया कि ओली का एक स्विस बैंक अकाउंट है. मिराबॉड बैंक की जिनेवा ब्रांच के इस अकाउंट में लगभग 41 करोड़ रुपए जमा हैं. लंबे समय के लिए हुए इस इनवेस्टमेंट से ओली को हर साल लगभग 1.87 करोड़ रुपए का लाभ हो रहा है.

ओली के गांव में उनके जन्मदिन को पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाता है


ओली का रहन-सहन खासा रईसाना है
काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ओली के गांव में उनके जन्मदिन को पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाता है. साथ ही खुद ओली इस रोज काफी शानदार और बड़ी पार्टी करते हैं. इसमें नेपाल के शेप का विशाल केक मंगवाया जाता है. ओली हेलिकॉप्टर से अपने गांव या जहां चाहे, वहां जाते हैं. केक कटिंग के दौरान फूलों की बारिश की जाती है. ओली के इस तरह ग्रांड बर्थडे सेलिब्रेशन पर काफी सवाल भी उठे थे, खासकर के नेपाल के आकार का विशाल केक काटने पर. लेकिन ओली ने सबको सांस्कृतिक मूल्यों को चोट पहुंचाने वाला कहकर खारिज कर दिया.

ये भी पढ़ें: कौन है वो शाही परिवार, जो बना देश के सबसे दौलतमंद मंदिर का रखवाला

लगातार रहा करप्शन का आरोप
ओली पर चीन से मिलकर देश की योजनाओं में करप्शन का आरोप भी लगता रहा है. मिसाल के तौर पर ओली ने साल 2015-16 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान कंबोडिया के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में निवेश किया. इस डील के लिए तब नेपाल में चीनी राजूदत वी चुन्टई ने उनकी मदद की. तब ओली लगभग 8 महीने ही कुर्सी पर रहे थे, जिस दौरान ये सब हुआ. दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही ओली पर करप्शन में लिप्त रहने का आरोप लगा.

ये भी पढ़ें: कितनी ताकतवर है वो अदालत, जहां China के खिलाफ चलेगा मुकदमा 

दिसंबर 2018 में ओली ने चीन की एक कंपनी हुवई के साथ 'Digital Action Room' के लिए करार किया, जबकि इस कंपनी ने फायदेमंद बोली तक नहीं लगाई थी. आरोप है कि ओली को इससे काफी फायदा मिला. कुछ ही महीनों बाद मई 2019 में नेपाल टेलीकम्युनिकेशन कंपनी ने हांगकांग की एक चीनी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया. रेडियो एक्सेस नेटवर्क के लिए हुए करार में भी ओली का निजी लाभ बताया जाता रहा है. साल 2020 में ही एक चीनी कंपनी जेटीई के साथ कोर 4 जी नेटवर्क के लिए करार हुआ है. लगभग 1106 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में भी ओली पर आंतरिक आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने काफी घपला किया है.

नेपाल कोरोना से बुरी तरह से जूझ रहा है और सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं (Photo-pixabay)


कोरोना दौर में भी घपले के आरोप
यहां तक कि जब नेपाल कोरोना से बुरी तरह से जूझ रहा है और सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, तब भी ओली की हेराफेरी की बात सामने आई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ओली ने कोरोना के लिए करीब 621 करोड़ रुपयों के पीपीई किट और टेस्टिंग किट खरीदे. इनमें से ज्यादातर लो-क्वालिटी थे. ये सामान भी चीन से ही खरीदे गए. इनमें खराबी की बात को लेकर नेपाल की सड़कों पर काफी प्रदर्शन भी हुए. खरीददारी को लेकर जानकारी की मांग भी की गई. माना जा रहा है कि इसमें भी ओली समेत उनके विश्वसनीय लोगों ने करोड़ों का घपला किया है. फिलहाल इसपर जांच चल रही है.

ये भी पढ़ें: नॉर्थ कोरिया में लीडर की मौत पर रोना जरूरी, वरना मिलती है सजा  

चीन ऐसे करता है घुसपैठ
इस बीच ये जानना भी जरूरी है कि चीन किसी देश में सेंध लगाने के लिए कैसे काम करता है. माना जा रहा है कि वो आर्थिक तौर पर कमजोर देशों में पहचान करता है कि कौन-कौन से राजनेता करप्ट हैं. उस देश में बैठे चीनी राजदूत इसके लिए काफी काम करते हैं. मेल-मुलाकातों के दौरान अंदाजा होता है. इसके बाद इन्हीं नेताओं को तैयार किया जाता है कि वे अपने देश में किसी प्रोजेक्ट के लिए किसी चीनी कंपनी से डील करें. कंपनी के साथ-साथ चीन के लोग भी बड़ी संख्या में उस देश जाते हैं. धीरे-धीरे लोकल घुसपैठ के जरिए ही चीन का दखल बढ़ने लगता है. यहां तक कि फिर देश की राजनीति और आंतरिक मामलो में भी चीन दखल देने लगता है. चूंकि देश में चीन का काफी सारा इनवेस्टमेंट रहता है और भ्रष्ट नेताओं की मिलीभगत होती है इसलिए चीन का वैसा विरोध भी नहीं हो पाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading