मुखर्जी आयोग ने क्यों कहा, हवाई हादसे में नहीं मरे सुभाष बोस, अस्थियां भी उनकी नहीं

1999 में केंद्र सरकार ने नेताजी के निधन के रहस्यों की जांच के लिए तीसरा आयोग गठित किया था, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी ने की थी

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 4:01 PM IST
मुखर्जी आयोग ने क्यों कहा, हवाई हादसे में नहीं मरे सुभाष बोस, अस्थियां भी उनकी नहीं
सुभाष चंद्र बोस (फाइल फोटो)
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 4:01 PM IST
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन को लेकर लंबे समय से संशय रहा है. अब भी बहुत से लोग हैं जो उनके हवाई हादसे में मरने की खबर पर विश्वास नहीं करते. एक दिन पहले ही दुनिया के जाने माने हैंड राइटिंग एक्सपर्ट ने दावा किया था सुभाष चंद्र बोस और गुमनामी बाबा की लिखावट एक जैसी थी. दोनों एक ही शख्स थे. वैसे सरकार द्वारा गठित जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी आयोग ने बहुत साफ शब्दों में कह दिया था कि नेताजी उस विमान हादसे में नहीं मरे थे, जिसमें बताया जाता है.

दरअसल इस रहस्य इसलिए ज्यादा गहरा हो गया, क्योंकि नेताजी की मृत्यु से रहस्य का पर्दा उठाने के लिए बने दो शुरुआत आयोग यानी शाहनवाज कमेटी और खोसला आयोग कमेटी किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची थी. किसी भी आयोग को आज तक ऐसा कोई प्रमाण हाथ नहीं लगा जो साबित कर सके कि जिस विमान में नेताजी सफर कर रहे थे, उसमें उन्हें बैठते हुए देखा गया था.

तीन जांच आयोग और कोई रिपोर्ट स्वीकृत नहीं
सबसे बड़ी बात ये भी है कि सरकार ने नेताजी के मौत के रहस्य की जांच को लेकर तीन जांच आयोग बनाए लेकिन उनकी रिपोर्ट कभी केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की नहीं की गई. वर्ष 1999 में जस्टिस मनोज मुखर्जी आयोग बनाया गया, जिसने कहा, बेशक नेताजी की मौत हो चुकी है लेकिन वो ताइवान में हवाई जहाज दुर्घटना में नहीं मरे.

सुभाष चंद्र बोस ही गुमनामी बाबा थे, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट का दावा

जापान मंदिर में अस्थियां नेताजी की नहीं 
जस्टिस मुखर्जी आयोग ने तो एक कदम आगे बढ़कर कहा कि जापान के मंदिर में रखी हुईं राख नेताजी की नहीं है. मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट भी सरकार ने स्वीकार नहीं की.
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नेताजी के निधन के रहस्य को तलाशने के लिए सरकार ने तीन आयोगों का गठन किया. शुरू के दो आयोग किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचे तो तीसरे मुखर्जी आयोग ने कहा कि नेताजी विमान हादसे में नहीं मरे


मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ताइवान में 18 अगस्त 1945 को कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ. तब नेताजी अचानक कहां गायब हो गए? यानी जिस रहस्य के बादल उनके कथित मौत के साथ बनना शुरू हुए थे, वो अब भी बरकरार हैं बल्कि कहना चाहिए कि वो रहस्य और गहराते जा रहे हैं.

मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्ष
जस्टिस मनोज मुखर्जी आयोग ने जांच के पांच प्रमुख बिंदुओं पर आठ नवंबर, 2005 को पेश अपनी रिपोर्ट में ये निम्नानुसार ठोस निष्कर्ष दिए. जानते हैं कि कुछ सवालों पर जस्टिस मुखर्जी की रिपोर्ट क्या कहती है.

क्या सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो चुकी है या वे जीवित हैं?
-मुखर्जी आयोग : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई है.

यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है तो क्या उनकी मृत्यु जैसा कहा गया, हवाई दुर्घटना में हुई थी?
-मुखर्जी आयोग: उनकी मृत्यु वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई, जैसा बताया जाता है.

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क्या जापानी मंदिर में जो अस्थियां रखी हैं वे नेताजी की हैं?
- मुखर्जी आयोग: जापानी मंदिर में रखे अवशेष नेताजी के नहीं हैं.

क्या उनकी मृत्यु किसी अन्य स्थान पर किसी अन्य ढंग से हुई है और यदि हाँ तो कब और कैसे?
-मुखर्जी आयोग: किसी निश्चित साक्ष्य के अभाव में कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया जा सकता.

जस्टिस मुखर्जी की रिपोर्ट सरकार ने मंजूर नहीं की और नेताजी को लेकर बना रहस्य कहीं ज्यादा गहरा गया


डीएनए परीक्षण क्यों नहीं
इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए सरकार बहुत पहले डीएनए टेस्ट करा सकती थी. जापान में नेताजी की अस्थियों रखी हुई हैं. अगर ये वाकई असली हैं तो इसके डीएनए का मिलान उनकी बेटी से कराया जा सकता है. जिससे असलियत से पर्दा उठ सके. ऐसा कभी नहीं किया गया. हालांकि ऐसे किसी कदम का विरोध नेताजी का परिवार भी हमेशा करता रहा है.

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