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इस देश के बच्चे हैं सबसे खुश, ऐसा क्या करते हैं यहां के परेंट्स

इस देश के बच्चे हैं सबसे खुश, ऐसा क्या करते हैं यहां के परेंट्स

अंतरराष्ट्रीय बाल कोष ने पाया है की नीदरलैंड में बच्चे ज्यादा सुखी और स्वस्थ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंतरराष्ट्रीय बाल कोष ने पाया है की नीदरलैंड में बच्चे ज्यादा सुखी और स्वस्थ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अमीर देश (Rich Contries) होने का मतलब यह नहीं है कि वहां के बच्चे खुश और स्वस्थ ही हों. पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाल कोष (UNICEF) 41 उच्च आय देशों के आंकड़ों का अध्ययन में पाया कि नीदरलैंड (Netherlands) के बच्चे स्वस्थ और अच्छा जीवन जीने के लिहाज से शीर्ष पर हैं. इसका कारण इस देश की पेरेंटिंग वे तरीके हैं जो दूसरे देशों में कम या बिलकुल नहीं दिखाई देते हैं.

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    संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का काम केवल दुनिया के देशों के बीच की विसंगतियों को दूर करना ही नहीं है. बल्कि यह भी देखना है कि दुनिया के देश कितने खुश और सुखी हैं जिससे विकासशील और अन्य पिछड़े देशों को दिशा और मदद मिल सके.  इसी सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय बाल कोष (UNICEF) हर साल इस बात का विश्लेषण करता है कि दुनिया के तमाम देशों के बच्चों में स्वस्थ और अच्छा जीवन जीने का कितना भाव है. पिछले साल यूनिसेफ ने 41 उच्च आय देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि नीदरलैंड (Netherlands) के बच्चे इस मामले में शीर्ष पर हैं.

    अमेरिका सबसे नीचे के देशों में
    यूनिसेफ ने इन अमीर देशों के बच्चों के मानसिक सुख, शारीरिक स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षमताओं के विकास के आधार पर उन देशों की रैंकिंग की. इस रैंकिंग में नीदरलैंड के बाद डेनमार्क और नॉर्वे का स्थान है. दिलचस्प बात यह है कि इस सूची में  चिली बुलगारिया और अमेरिका सबसे नीचे के देशों में  शामिल हैं.

    कई मामलों में न्यूजीलैंड है आगे
    इसके अलावा ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के साल 2020 के बेहतर जीवन के सूचकांक दर्शाते हैं कि नीदरलैंड ने बहुत से मामलों में औसत से अधिक अंक हासिल किए हैं जिसमें आय, शिक्षा, घर और स्वास्थ प्रतिष्ठा शामिल है. द वर्किंग पेरेंट सर्वाइवल गाइड की लेखिका अनीता क्लेयर ने सीएनबीसी को बताया कि बच्चों की खुशी में सामाजिक आर्थिक कारकों की भूमिका को समझना जरूरी है.

    अमीर देशों में ज्यादा खुशी की संभावना
    क्लेयर बताती हैं कि अमीर देशों में बच्चों की अधिकांश जरूरतें पूरी हो जाती हैं. उनकी कुछ जरूरतें ही पूरी होने पर इस बात की बहुत संभावना है कि वे खुशी हासिल कर लेंगे. एक निश्चयात्मक अभिभावक तरीका, जो बहुत सारे प्रेम और ऊर्जा के साथ स्पष्ट सीमाएं तय करता है, दर्शाता है कि बच्चों में सकारात्मक नतीजे सामने आते हैं.

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    नीदरलैंड (Netherlands) में हर विषय पर बच्चों से खुल कर बात की जा सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Semmick Photo / Shutterstock)

    एक बड़ी बात यह भी
    क्लेयर का कहना है कि शर्म बच्चों के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकती है और नीदरलैंड के लोगों की छवि ऐसी है कि वे उन सभी मामलों में खुल कर बात करते हैं जो दूसरे देशों में चर्चा करने में असहज महसूस किए जाते हैं. यूनिसेफ क कहना है कि सभी अमीर देशों में रहने वाले बच्चों का बचपन अच्छा नहीं होता है.

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    कई बड़े देश पीछे
    यूनिसेफ के रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन देशों में अच्छे सामाजिक आर्थिक और पर्यावरण वाले हालात हैं, वहां भी वे संधारणीय विकास के एजेंडा के 2030 के लिए तय किए लक्ष्यों को हासिल करने में बहुत पीछे हैं. इन कमियों को पूरा करने के लिए यूनिसेफ ने उच्च आय वाले देशों से आग्रह का हैकि वे बच्चों से चर्चा करें कि उनका जीवन कैसे बेहतर किया जा सकता है. और ये देश यह भी सुनिश्चित करें कि बच्चों की सुख में सभी प्रयासों में जुड़ा रहे.

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    समावेशी समाज और सोच की वजह से नीदरलैंड (Netherlands) के बच्चों के विकास में मदद मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Melanie Lemahieu / Shutterstock)

    विविधता को अहमियत भी
    यूनिसेफ ने इन देशों को कई लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयासों में तेजी लाने की भी अनुशंसा की, जिनमें गरीबी कम करने और बच्चों की देखभाल की बेहतरी शामिल है. क्लेयर का  यह भी कहना है कि नीदरलैंड में विविधता का बहुत मूल्य है और उसकी छवि समायोजन करने वाले समाज की है. इस तरह से पेरेंटिंग में बहुत मदद मिलती है.

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    इस तरह की संस्कृति में जहां सभी को प्रकृति से मिले उपहारों का जश्न मनाया जाता है, बच्चे यह महसूस कर पाते हैं क वहे जो चाहे बन सकते हैं, वे सकारात्मक होते हैं, उनके खेल के मैदानों में ज्यादा सकारात्मक संस्कृति होती है.  इन सब से बच्चों को खुशी के स्तरों में मदद मिलती है.

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