लंबी बहस के बाद बुर्का नीदरलैंड में बैन..जानिए बुर्के के बारे में सबकुछ

नीदरलैंड्स में एक अगस्त से बुर्का पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है, इसके पक्ष और विपक्ष में हमेशा से आवाज उठती रही है. संयुक्त राष्ट्र संघ बुर्के पर पाबंदी के पक्ष में नहीं है

News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 1:25 PM IST
लंबी बहस के बाद बुर्का नीदरलैंड में बैन..जानिए बुर्के के बारे में सबकुछ
नीदरलैंड्स में विरोध के बाद भी बुर्का एक अगस्त से प्रतिबंधित
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Updated: August 2, 2019, 1:25 PM IST
कड़ी अदालती लड़ाई के बाद नीदरलैंड ने बुर्का पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन इससे पहले यहां की संसद में इसको लेकर 14 सालों तक बहस चलती रही. पहले बुर्का बैन को लेकर हल्का बैन लगाया गया था लेकिन नया कानून ना केवल कड़ा बल्कि इसमें 150 यूरो यानि दस हजार रुपए से ज्यादा का फाइन भी लगाया गया है. अगर किसी सार्वजनिक जगह पर बुर्का पहनकर कोई नजर आया तो उसकी उस जगह पर इंट्री भी बैन कर दी जाएगी.

नीदरलैंड की संसद ने अब जो कानून पास करके बुर्का पर प्रतिबंध लगाया है. वो कड़ा है. उसमें अब आप अपने चेहरे को बुर्के से ढंक नहीं सकते लेकिन अगर ऐसा किया तो 150 यूरो का जुर्माना देना होगा. ये प्रतिबंध बुर्का के साथ तमाम नकाब पर लागू होगा.इन्हें पहनकर अस्पताल, स्कूल,बाजार, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन,आफिसों और सार्वजनिक भवनों में जाना प्रतिबंधित रहेगा.

नीदरलैंड की छवि उदार देश की है, इसलिए दूसरे यूरोपीय देशों की तुलना में यहां काफी बहस के बाद एक अगस्त 2019 से बुर्का बैन लागू किया गया. नीदरलैंड्स के तटीय शहर रोटरडाम की इस्लामिक पार्टी ने प्रतिबंध का विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि जो भी सार्वजनिक जगहों पर प्रतिबंधित कपड़े पहने हुए पकड़ा जाएगा, उसका जुर्माना इस्लामिक पार्टी भरेगी.

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वर्ष 2005 में डच संसद ने बुर्का पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पेश किया, संसद में इसके पक्ष में वोट दिया गया. लेकिन इसके बाद भी इसे लागू नहीं किया गया. बल्कि इसे रोक लिया गया. 2016 में संसद ने इसके हल्के संस्करण को लागू किया. इस देश की आबादी करीब दो करोड़ की है, जिसमें बमुश्किल 200 से 400 महिलाएं ही बुर्का पहनती हैं.

यूरोप में पहले ही कई देश बुर्के पर प्रतिबंध लगा चुके हैं


हालांकि नीदलैंड्स के कई शहरों में अस्पतालों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने प्रतिबंध को मानने से मना किया है. पुलिस का भी कहना है कि वो कोई जबरदस्ती नहीं करेगी.
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यूरोप में सबसे पहले फ्रांस ने लगाया था बैन
वैसे यूरोप में सबसे पहले बुर्के पर बैन फ्रांस में दस साल पहले लगाया गया था. इसके बाद कुछ और देशों ने इसे बैन किया. कई देशों में भारी विरोध के बाद भी ये लागू है. 2019 में ऑस्ट्रिया ने भी प्राइमरी स्कूलों में छात्राओं के हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया. जर्मनी के हेसे प्रांत में भी सिविल सेवा के कर्मचारियों के बुर्का पहनने पर पाबंदी है.

ये हैं वो देश जहां बुर्का पर पाबंदी है
इनमें ऑस्ट्रिया, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम, ताजकिस्तान, तंजानिया, बुल्गारिया, कैमरून, चाड, कांगो, गैबन, नीदरलैंड्स, चीन और मोरक्को शामिल हैं. यानी केवल यूरोप ही नहीं बल्कि अफ्रीकी देशों में इस तरह का बैन लगा हुआ है.

केवल यूरोप ही नहीं बल्कि अफ्रीका में भी कई देशों में बुर्का प्रतिबंधित है


क्या होता है बुर्का
बुर्का का मतलब है अपने चेहरे को खास परिधान के जरिए ढंकना, जिससे कोई उसे देख नहीं सके. मुस्लिम महिलाएं इसे पहनती हैं. इसे उनके कल्चर से जोड़कर भी देखा जाता है. बुर्के को लेकर कई देशों में तो खासे कड़े रिवाज हैं, जहां इसे पहनना अनिवार्य है. नहीं पहनने पर वो सजा की हकदार होती हैं. बुर्के भी कई रूप हैं.मसलन-अबाया, चादोर, हिजाब, जिलाब, खिमार और निकाब. अलग-अलग देशों में इसको पहनने के तरीके भी अलग हैं.

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क्या है हिजाब, निकाब, चादर 
हिजाब- ज्यादातर मुस्लिम स्कॉलर हिजाब के पक्ष में हैं, ये सिर और गला कवर करता है. ये कई आकार और रंगों में आता है. ज्यादातर लोगों को लगता है कि मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना सही है.

हिजाब ऐसा मुस्लिम महिलाओं का परिधान है, जिसमें सिर और गले को कवर किया जाता है लेकिन चेहरा खुला रहता है


चादोर- ये आमतौर पर काले रंग की होती है. ये शरीर की लंबाई का गारमेट होता है. ईरान और खाड़ी के देशों में आधुनिक खयालों की महिलाएं इसे ज्यादा पहनती हैं. इसमें कोई बटन नहीं होता. इसे चादर की तरह लपेटा जाता है. इसमें चेहरा खुला रखा जा सकता है.

चादोर आमतौर पर सऊदी अरब में मॉडर्न खयाल वाली महिलाएं पहनती हैं. उसमें चेहरा खुला होता है लेकिन शरीर इससे ढंका रहता है


निकाब-ये एक तरह का बुर्का है. जो सारे चेहरे को कवर करता है लेकिन आंखें खुली रहती हैं. ये सिर के बालों को भी कवर करता है. ये आधी लंबाई का होता है यानि आधी पीठ से लेकर छाती के नीचे तक होता है.

क्या कहता है देवबंद
एशिया के मुस्लिमों के बीच देवबंद के फतवों को गंभीरता से लिया जाता है. देवबंद के उलेमाओं ने कहा है कि श्रीलंका की हुकूमत एक फिरके को टारगेट कर रही है, जो सही सोच नहीं है. हालांकि उलेमाओं ने कोलंबो धमाकों की भी निदा की है.

संयुक्त राष्ट्र भी इसे गलत मानता है
हालांकि यहां ये बताना जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र ने एक साल पहले 2018 में अपनी ह्यूमन राइट्स कमेटी के जरिए बुर्का पर प्रतिबंध को गलत बताया था. उसका कहना है कि ये महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन तो है ही साथ ही धार्मिक तौर पर उनके विश्वासों को ठेस पहुंचाना भी.
हालांकि दुनिया भर में बहुत से मुस्लिम स्कॉलर महिलाओं को बुर्का में रखने को सही नहीं मानते हैं. उनका कहना कि महिलाओं के लिए ऐसा करना कतई जरूरी नहीं है.

वैसे संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि बुर्का पर प्रतिबंध धार्मिक अधिकारों का हनन है


क्या कहता है कुरान
मौलाना फिरंगी महली की दलील है कि कुरान में अल्लाह ने पैगम्बर मोहम्मद का उद्धरण देते हुए बताया, “अपनी बीवियों, बेटियों और मुसलमानों की औरतों से कह दो कि अपने ऊपर चादर लटका लिया करें. इससे बहुत जल्द उनकी पहचान हो जाएगी और फिर वे सतायी नहीं जाएंगी.”

मौलाना ने कहा कि परदा शरीयत का अहम हिस्सा है. श्रीलंका में बुर्का पर पाबंदी को लेकर मौलाना ने कहा, मजहबी आजादी का हक हर एक को हासिल है और इसमें मुसलमान भी शामिल हैं.

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बुर्का का इतिहास
ज्यादातर लोगों को लगता होगा कि बुर्के की प्रथा इस्लाम के साथ आई होगी, लेकिन ऐसा नहीं है. इसका इतिहास इस्लाम से ज्यादा पुराना है. पहली सदी से पहले बेंजाटाइन साम्राज्य, जिसे पूर्वी रोमन साम्राज्य भी कहा जाता था, उसमें महिलाएं सिर को बांधती थीं लेकिन चेहरा नहीं ढंकती थीं. लेकिन अरब देशों में जहां तेज धूप रहती है और रेत भरी हवाएं चलती थीं, वहां महिलाएं चेहरे को बचाने के लिए उसे विशेष परिधानों से ढंकती थीं, ताकि वो रेत और धूप से बची रहें. इतिहास बताता है कि बुर्का इस्लाम से ज्यादा पुराना है. अलबत्ता इस्लाम ने उसे अपने मजहब का हिस्सा बना लिया

इस्लाम से पहले से था चेहरे को ढंकने का रिवाज
पहली सदी में ग्रीक ज्योग्राफर स्त्राबो ने लिखा है कि उसने पहली सदी में मध्य दुनिया के देशों में महिलाओं को चेहरा ढंके हुए देखा था. अफगानिस्तान और कई अन्य देशों में भी इस्लाम से पहले इस तरह से चेहरा ढंका जाता था. बालों को बचाने के लिए सिर को कपड़े से बांधकर रखते थे. जब इस्लाम आया, तो उसने इस परिपाटी को अपनी संस्कृति का हिस्सा बना लिया.
पर्दा प्रथा का ही एक पहलू है बुर्का का चलन. बुर्का एक तरह का घूंघट है जो मुस्लिम समुदाय की महिलाएं और लड़कियां कुछ खास जगहों पर खुद को पुरुषों की निगाह से अलग रखने के लिए इस्तेमाल करती हैं.

अफगानिस्तान और कई अन्य देशों में भी इस्लाम से पहले इस तरह से चेहरा ढंका जाता था. बालों को बचाने के लिए सिर को कपड़े से बांधकर रखते थे


भारत में पर्दा प्रथा इस्लाम की देन
भारत में हिन्दुओं में पर्दा प्रथा इस्लाम की देन है. इस्लाम के प्रभाव से और इस्लामी आक्रमण के समय खुद के बचाव के लिए हिंदू स्त्रियां भी पर्दा करने लगीं. इस प्रथा ने मुग़ल शासकों के दौरान अपनी जड़ें काफी मज़बूत कीं. वैसे इस तरह की प्रथा की शुरुआत भारत में12वीं सदी में मानी जाती है. प्राचीन भारत में बहुएं भी पर्दे में लोगों के सामने नहीं आती थीं. वो अपना सिर खुला ही रखती थीं.

भारत के संदर्भ में ईसा से 500 वर्ष पूर्व रचित 'निरुक्त' में इस तरह की प्रथा का वर्णन कहीं नहीं मिलता. निरुक्तों में संपत्ति संबंधी मामले निपटाने के लिए न्यायालयों में स्त्रियों के आने-जाने का उल्लेख मिलता है. न्यायालयों में उनकी उपस्थिति के लिए किसी पर्दा व्यवस्था का विवरण ईसा से 200 वर्ष पूर्व तक नहीं मिलता. इस काल के पूर्व के प्राचीन वेदों तथा संहिताओं में पर्दा प्रथा का विवरण नहीं मिलता.

कैसे आतंकी उठा रहे थे बुर्के का फायदा
ज्यादातर देशों में, जहां बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनका कहना है कि बुर्के के आड़ में आतंकवादी अपना काम करके निकल जाते थे और पता भी नहीं लगता था कि बुर्के के अंदर कोई महिला या पुरुष. यूरोपीय देशों में कई आतंकवादी घटनाओं में ये वाकया हुआ. कई आपराधिक वारदातों में भी ये बात सामने आई कि अपराधी बुर्का पहनकर पहुंचे, जिससे उनकी जांच नही हो पाई कि बुर्के की आड़ में कौन है.

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First published: August 2, 2019, 1:25 PM IST
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