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    इस देश में हुई कैदियों की किल्लत, जेलें चालू रखने को पड़ोसी देश से उधार लिए अपराधी

    नीदरलैंड्स ऐसा मुल्क हैं, जहां की जेलें बंद होने की कगार पर हैं- सांकेतिक फोटो
    नीदरलैंड्स ऐसा मुल्क हैं, जहां की जेलें बंद होने की कगार पर हैं- सांकेतिक फोटो

    स्कैंडिनेवियाई देश नीदरलैंड्स में अपराध की दर इतनी कम (Netherlands has low crime rate) है कि जेलें लगभग खाली पड़ी हैं. ऐसे में नार्वे उसे अपने कैदी भेज रहा (Norway is sending inmates to Netherlands) है. इससे जेल के कर्मचारी बेगार नहीं होंगे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 25, 2020, 7:15 PM IST
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    एक तरफ दुनिया के लगभग सारे देशों में अपराध बढ़े हैं, वहीं नीदरलैंड्स ऐसा मुल्क हैं, जहां की जेलें बंद होने की कगार पर हैं. इसकी वजह वहां की खराब व्यवस्था नहीं, बल्कि लो क्राइम-रेट है. साथ ही जो कैदी जेल जाते हैं, उन्हें जल्दी से जल्दी बाहर निकालकर समाज से जोड़ने की मुहिम शुरू हो जाती है. यही वजह है कि देश की लगभग सारी जेलें बंद हो चुकी हैं.

    कितने अपराध होते हैं यहां 
    इस डच देश में हुई एक स्टडी बताती है कि यहां हर 1 लाख की आबादी पर केवल 61 लोग ही अपराध करते हैं, वो भी गंभीर किस्म के नहीं, बल्कि छोटे-मोटे अपराध. जबकि अमेरिका में अपराध की दर इससे 10 गुना ज्यादा है, यानी वहां हर 1 लाख पर लगभग 655 लोग किसी न किसी किस्म का अपराध करते हैं. ये डाटा वर्ल्ड प्रिजन ब्रीफ ने दिया है, जिससे नीदरलैंड्स की कानून-व्यवस्था को समझा जा सके.

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    अगले तीन सालों में इतने रह जाएंगे अपराधी 


    नीदरलैंड की वर्तमान आबादी लगभग 1.73 करोड़ है. इसे देखते हुए यहां के जस्टिस विभाग ने अनुमान लगाया कि साल 2023 तक पूरे देश में कुल मिलाकर 9,810 अपराधी हो सकते हैं. कैदियों की ये संख्या अधिकतम मानी जा रही है.

    साल 2023 तक पूरे देश में कुल मिलाकर 9,810 अपराधी हो सकते हैं- सांकेतिक फोटो (wallpaperflare)


    पड़ोसी देश भेज रहा अपने कैदी
    हालात ऐसे हैं कि नीदरलैंड में पड़ोसी देश नार्वे से कैदी भेजे रहे रहे हैं ताकि व्यवस्था चलती रहे. असल में नार्वे में अपराध की दर काफी ज्यादा है. बता दें कि ये व्यवस्था साल 2015 में शुरू हुई क्योंकि नार्वे के पास अपने कैदियों को रखने की जगह कम पड़ रही है. वैसे यहां ये जानना भी जरूरी है कि इन स्कैंडिनेवियाई देशों को कैदियों को काफी बेहतर ढंग से रखा जाता है और खानपान का भी सही बंदोबस्त होता है. ये वहां मानवाधिकार के लिहाज से जरूरी माना जाता है.

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    जेल भेजने की बजाए इस तरह की सजाएं
    नीदरलैंड्स में कैदियों की कम संख्या के पीछे केवल यही वजह नहीं कि यहां क्राइम रेट कम है, बल्कि एक और कारण भी है. यहां अपराध पर जेल की सजा देने की बजाए कई दूसरी सजाओं को तरजीह दी जाती है. जैसे जुर्माना भरना या सोशल वर्क से जुड़ा कोई काम. अस्पतालों या सरकारी दफ्तरों में काम करने की सजा भी अपराधियों को मिलती है. इससे जेल में कैदियों की संख्या खुद-ब-खुद कम हो जाती है.

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    क्या कहते हैं विशेषज्ञ
    इस बारे में Leiden University में क्रिमिनोलॉजी के प्रोफेसर हिल्डे वर्मिंग कहते हैं कि पैसों का जुर्माना या समाज सेवा की सजा को नीदरलैंड्स में जेल भेजने से पहले रखा जाता है. माना जाता है कि इससे अपराधी की मानसिकता में सुधार आता है.

    अस्पतालों या सरकारी दफ्तरों में काम करने की सजा भी अपराधियों को मिलती है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    ऐसे रखी जाती है नजर
    यहां पर कैदियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटरिंग सिस्टम है. इस सिस्टम में उनके पैर में एक ऐसी डिवाइस पहनाई जाती है, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस की जा सके. ये डिवाइस एक रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल भेजता है, जिसमें अपराधियों की लोकेशन का पता चलता है. यदि कोई अपराधी किसी अनुमत सीमा से बाहर जाता है, तो पुलिस को सूचना मिल जाती है. ये एंकल मोनिटरिंग सिस्टम देश में अराधिक दर को आधा करने में सक्षम रही है. वहां पर कैदियों को दिन भर बंद कर के बैठाने की बजाय काम करने और सिस्टम में वापस लाने के लिए कहा जाता है.

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    जेलें बंद हो जाएं तो क्या होगा 
    नीदरलैंड्स की जेलें बंद होने पर दो तरह से महत्वपूर्ण बदलाव होंगे. सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो घटती अपराध दर यानी सुरक्षित देश. रोज़गार के नजरिए से देखें तो जेल में काम करने वाले बेरोज़गार होंगे. जेल बंद होने का मतलब है कि वहां के लगभग दो हज़ार लोगों को नौकरी गंवाएंगे. जिसमें से सिर्फ 700 लोगों को सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई बाकी जगहों पर ट्रांसफर किया जाएगा. हालांकि जेलें बंद होना का अर्थ ये भी है कि नीदरलैंड्स एक देश, एक प्रणाली और नागरिकों के रूप में सफल हुआ है.
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