Explained: क्या PAK में सेना के खिलाफ बोलने वाले जेल में डाल दिए जाएंगे?

पाकिस्तान में सेना के खिलाफ बोलने वालों की धरपकड़ के लिए एक कानून आ रहा है

पाकिस्तान में सेना के खिलाफ बोलने वालों की धरपकड़ के लिए एक कानून आ रहा है

पाकिस्तान आर्मी (Pakistan army) अपने देश में सरकार से भी ताकतवर मानी जाती है. अब इसके खिलाफ बोलने वालों पर सख्ती के लिए एक कानून (Pakistan criminalizes military criticism) आ रहा है, जिसे लेकर इमरान सरकार (Imran Khan government) घिर गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 2:04 PM IST
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पाकिस्तान में आमतौर पर सेना और सरकार के खिलाफ बोलने वालों को इसकी भारी कीमत अदा करनी पड़ जाती है. अब सेना पर टीका-टिप्पणी करने वालों पर लगाम और सख्त करने को एक नया बिल आया है. संसद के निचले सदन में पारित भी हो चुका है. इसके तहत अगर किसी ने सेना के खिलाफ बोलने की जुर्रत की तो उसे दो साल की सजा हो सकती है. इस बिल को लेकर अब पाकिस्तान सरकार और खासकर प्रधानमंत्री इमरान खान भी घेरे में हैं.

क्या है बिल

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी ऑन इंटीरियर ने 7 अप्रैल को एक आपराधिक कानून संशोधन बिल पास किया. अगर इसे सदन के दोनों पक्षों से सहमति मिल जाए तो पाकिस्तान में सेना की आलोचन काफी महंगी पड़ेगी. इसके तहत पाक के सशस्त्र बल के बारे में कोई भी ऐसी टिप्पणी, जो सेना के हित में न जाती हो, करने पर दो साल की कड़ी कैद और 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

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अब पाकिस्तान सरकार और खासकर प्रधानमंत्री इमरान खान भी घेरे में हैं (Photo- flickr)

नेता आए विरोध में 

हालांकि नेशनल असेंबली में अब भी इस बिल का पारित होना बाकी है लेकिन लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं. यहां तक कि खुद इमरान सरकार के मंत्री ऐसे बिल को हास्यास्पद बता रहे हैं. जैसे वहां के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने एक पत्रकार की ट्वीट की प्रतिक्रिया में लिखा कि बिल आला दर्जे का हास्यास्पद विचार है. समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने भी इस बात से सहमति जताई.





क्या डर है बिल को लेकर 

इधर विपक्षी पार्टियां इसे ह्यूमन राइट्स का हनन बता रही हैं. किसी हद तक बात सही भी है कि सेना की आलोचना करने भर से जेल में डाल दिया जाए. लोगों का डर है कि इसका इस्तेमाल सरकार समेत सेना अपनी असंतुष्ट लोगों की आवाज दबाने के लिए करेगी. डॉन अखबार के मुताबिक पाकिस्तान बार काउंसिल ने सरकार से यह बिल वापस लेने की अपील की है. हालांकि फिलहाल सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

कोरोना के कारण पाकिस्तान और बदहाल हो चुका है- सांकेतिक तस्वीर


क्यों पड़ी बिल की जरूरत?

दरअसल इमरान सरकार के कार्यकाल में लगातार सेना की आलोचना होने लगी थी. कहा तो ये भी जाने लगा था कि इमरान केवल वही करते हैं, जो सेना उनसे कहे. इस बात के साथ वो प्रमाण दिए जाने लगे, जो मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सेना के हित में किए गए. वैसे तो पाकिस्तान में सेना हमेशा से ताकतवर रही लेकिन अब लोकतंत्र के बाद भी सेना ताकतवर होने लगी. यहां तक कि सेना देश की सबसे मजबूत और सबसे अमीर बॉडी बन गई.

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पाकिस्तान में सबसे ज्यादा दौलत सेना के पास 

मालूम हो कि पाक सेना के पास अपने देश के सबसे मुनाफा देने वाले सभी बिजनेस में शेयर हैं. यहां तक कि पाकिस्तानी आर्मी पूरी तरह से कॉर्पोरेट आर्मी में बदल चुकी है. क्वार्ट्ज.कॉम के अनुसार ये आर्मी साल 2016 में ही 50 से ज्यादा व्यापारिक संस्थानों की मालिक बन चुकी थी, जिसकी कीमत 20 बिलियन डॉलर से भी कहीं ज्यादा थी. ये कीमत अब और ऊपर जा चुकी है. पेट्रोल पंप, इंडस्ट्रिअल प्लांट, बैंक, स्कूल-यूनिवर्सिटी, दूध से जुड़े उद्योग, सीमेंट प्लांट और यहां तक कि सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली बेकरीज भी सेना के हिस्से हैं. देश के आठ बड़े शहरों में हाउसिंग प्रॉपर्टी में भी सेना का सबसे बड़ा शेयर है.

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देश का काफी सारा पैसा सेना के पास जाना भी पाकिस्तान में गरीबी की एक वजह मानी जा रही है (Photo- defense.gov)


चैरिटी के नाम पर बिजनेस 

सेना के हिस्से में आए ज्यादातर बिजनेस चैरिटी के नाम पर चलते हैं और उनकी टैग लाइन में कहीं न कहीं इसका जिक्र रहता है कि ये सेना द्वारा चल रहे हैं इसलिए ज्यादा ईमानदारी से काम करते हैं. सीधे सेना के जनरल इन उद्योगों से जुड़ते हैं ताकि शक की कोई गुंजाइश न रहे.

वर्ल्ड बैंक तक ने टोक दिया था

इतनी अमीर होने के बाद भी सेना को बजट में से अपना हिस्सा चाहिए होता है. साल 2018 में कुल बजट का लगभग 21 प्रतिशत पाक सेना के पास गया. देश का काफी सारा पैसा सेना के पास जाना भी देश में आम जनता की गरीबी की एक वजह मानी जा रही है. यहां तक कि साल 2019 में खुद वर्ल्ड बैंक (World Bank) को कहना पड़ा था कि पाकिस्तान को अपना सैन्य बजट कुछ कम करना चाहिए.

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पाकिस्तान इकनॉमी गड़बड़ाने के बाद लोग सरकार को तो घेर ही रहे हैं, साथ में सेना को भी निशाना बना रहे हैं. खासतौर पर सोशल मीडिया पर सेना की खूब आलोचना होने लगी. माना जा रहा है कि असंतोष देखकर गुस्साई सेना ने ही सरकार पर दबाव डाला होगा कि वो इस तरह का कोई बिल लेकर आए.
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