अब खून की जांच लाएगा अवसाद के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव, जानिए कैसे

अवसाद (Depression) के लक्षणों के लिए चिकित्सकों को केवल मरीजे के बताए लक्षणों पर निर्भर रहना पड़ता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अवसाद (Depression) के लक्षणों के लिए चिकित्सकों को केवल मरीजे के बताए लक्षणों पर निर्भर रहना पड़ता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अवसाद (Depression) को लेकर हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने खून की जांच (Blood Tes) का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो अवसाद के स्तरों की जानकारी देगा. यह मनोचिकित्सा (Psychiatry) में क्रांतिकारी खोज साबित हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 9:56 AM IST
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अवसाद (Depression) एक ऐसा विकार है जिसे आमतौर पर या तो इंसान के मानसिक बर्ताव तक ही सिमित रखा जाता है या फिर उसे सीधे पागलपन से जोड़ दिया जाता है. आज भी अगर कोई मनोचिकित्सक (Psychiatrist) से सलाह लेता है तो बहुत से लोग यह मानने में देर नहीं लगाते कि उसका पागलपन के लिए इलाज चल रहा है. मनोचिकत्सक भी अवसाद के निदान (Diagnosis) के लिए मरीज के बताए हुए लक्षणों पर ही निर्भर करते हैं. लेकिन खून की एक खास जांच (Blood Test) डॉक्टरों को लोगों में अवसाद का स्तर जानने में मददगार साबित होगी. उम्मीद की जा रही है कि यह एक क्रांतिकारी खोज साबित हो सकती है.

एक नया सिस्टम

साइंस अलर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर मनोचिकित्सक अवसाद के शिकार किसी मरीज की शारीरिक जांच के लिए ही खून की जांच कराते हैं. वे यह पता करने का प्रयास करते हैं कि कहीं कोई शारीरिक बीमारी तो मरीज की मनोवस्था को खराब नहीं कर रही. वहीं हाल ही में विकसित किया गया नया सिस्टम ऐसे ब्लड बायोमार्कर्स पर निगरानी रखता है, जिनका संबंध मरीज की मनोदशा (Mood) विकारों से है. इस सिस्टम से अवसाद और बाइपोलर डिसऑर्डर के निदान से लेकर इलाज तक में नए बदलाव आ सकते हैं.

चिकित्सकों की निर्भरता
इस सिस्टम की पड़ताल और उससे संबंधित नतीजे मॉलीक्यूलर साइकियाट्री में प्रकाशित हुए हैं. अवसाद वैसे तो सदियों से पहचानी जाने वाली विकार या बीमारी है और दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे प्रभावित होते हैं. इसके परंपरागत निदान डॉक्टर मनोवैज्ञानिक और मनोचिकत्सकों के क्लीनिकल आंकलनों पर ही निर्भर होते हैं.

भविष्य में बहुत ही उपयोगी होगा

अभी तक खून की जांच अवसाद और उसके जैसे अन्य विकारों के निदान के दायरों में शामिल नहीं किया गया है. नया शोध यह सुझाता है कि भविष्य में डॉक्टर इन विकारों को समझने के लिए केवल मरीज के बताए लक्षणों पर निर्भर नहीं रहेंगे. वे अब स्वतंत्र रूप से अवसाद की स्तिथि का आंकलन कर सकेंगे. इस अध्ययन का कहन है कि भविष्य में यह एक व्यवहारिक विकल्प बनकर सामने आएगा.



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खून की जांच से ही अब अवसाद (Depression) के स्तरों की जानकारी मिल सकेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


बायोमार्कर्स की पहचान

इस नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 26 बायोमार्कर्स की पहचान की. बायोमार्कर्स वे प्राकृतिक संकेत होते हैं जिन्हें मापा जा सकता है. इन 26 बायोमार्कर्स का मरीज के मनोविकारों से संबंध होता है, जिनमें अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर और पागलपन जैसे विकार शामिल हैं. इंडियाना यूनिवर्सिटी के मनोचिकत्सक और तंत्रिकावैज्ञानिक एलेक्जेंडर बी नक्यूलेस्क्यू ने बताया कि खून के बायोमार्कर्स विकारों के लिए एक बहुत ही अहम उपकरण के तौर पर सामने आ रहे हैं.

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बेहद उपयोगी साबित होगी खून की जांच

नक्यूलेस्क्यू का कहना है कि मरीज के बताए हुए लक्षणों के आधार पर बनी रिपोर्ट हमेशा ही विश्वस्नीय नहीं होती है. लेकिन खून की जांच मरीज की एक सटीक स्थिति के अनुसार उसके लिए सही दवा सुझाने वाली और इलाज की प्रतिक्रिया की निगरानी के लिहाज से बहुत ही उपयोगी साबित होगी.

बायोमार्कर्स की पहचान में लगे चार साल

शोधकर्ताओं के सात नक्यूलेस्क्यू ने इस क्षेत्र में सालों तक अध्ययन किया और खून की बायोमार्कर आधारित ऐसी जांच विकसित की, जिससे मरीजों में आत्महत्या की प्रवृति के बारे पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और बहुत से दर्द का निदान हो सकता है. नक्यूलेस्क्यू के इस चार साल के शोध में शोधकर्ताओं ने इंडियानापोलिस के रिचर्ड एल रोउडेबुश वीए मेडिकल सेंटर में सैंकड़ों मरीजों पर जांच की शृंखला चलाई और मनोदशा विकारों के 12 पक्के बायोमेकर्स की पहचान की.

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शोधकर्ताओं ने 26 बायोमार्कर्स में खास 12 बायोमार्कर्स की पहचान की जो अवसाद (Depression) के स्तर को बताएंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


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शोधकर्ताओं को पूरा विश्वास है कि इस जांच के उपलब्ध होने से मनोचिकित्सकों को अब मरीजों को सही उपचार प्रदान करने में पूरी मदद मिलेगी और वे निश्चित समय के बाद अपने उपचार के असर की भी जांच कर सकेंगे. वहीं मरीजों को भी कई तरह की प्रयोगात्मक दवाओं से छुटकारा मिल सकेगा.
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