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Coronavirus: वेंटिलेटर की कमी से जूझते अस्पतालों को राहत, वैज्ञानिकों ने बनाई नई मशीन

News18Hindi
Updated: April 1, 2020, 2:40 PM IST
Coronavirus: वेंटिलेटर की कमी से जूझते अस्पतालों को राहत, वैज्ञानिकों ने बनाई नई मशीन
लंदन के वैज्ञानिकों ने सांस लेने की एक नई मशीन बनाई है

ये खबरें आ रही थीं दुनियाभर में वेंटिलेटर्स कम पड़ सकते हैं. ये भी खबरें थीं कि वो सही तरीके से काम नहीं कर रहे. ऐसे में लंदन के वैज्ञानिकों ने मरीजों के सांस लेने के लिए एक नई तरह की मशीन बनाई है. जानें वो कैसी है

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दुनिया के तमाम देशों के वैज्ञानिक कोरोना (coronavirus) के खिलाफ जंग छेड़ चुके हैं. वे लगातार नई खोज कर रहे हैं ताकि वायरस को खत्म किया जा सके या मरीजों को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके. इसी सिलसिले में University College London के वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है. उन्होंने सांस लेने में मदद करने के लिए एक नया उपकरण बनाया है जिससे मरीज बिना एनेस्थीसिया के सांस ले सकेंगे. इसे Cpap डिवाइस नाम दिया गया है.

ये असल में ऑक्सीजन मास्क और वेंटिलेटर के बीच का उपकरण है. इसे Medicines and Healthcare products Regulatory Agency से मान्यता भी मिल चुकी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि हफ्तेभर के भीतर इस उपकरण के 1000 मॉडल तैयार हो जाएंगे. UCLH के प्रोफेसर Mervyn Singer के अनुसार सी-पैप डिवाइस की मदद से अस्पतालों पर दबाव कम होगा और थोड़े बेहतर स्वास्थ्य वाले मरीज, तो सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हों, उन्हें सी-पैप से ऑक्सीजन दी जाएगी, जबकि क्रिटिकल हालत वाले मरीजों के लिए वेंटिलेटर का इस्तेमाल होगा.

सी-पैप अपेक्षाकृत स्वस्थ और युवा मरीजों को दिया जा सकता है




कैसे काम करती है सी-पैप मशीन



इस मशीन के जरिए मरीज के मास्क के ऑक्सीजन और हवा का मिश्रण पहुंचेगा और मुंह से ही मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सजीन की पर्याप्त मात्रा पहुंच जाएगी. इसके बाद मरीज खुद ही कार्बन डाइऑक्साइड को निकाल सकेगा. ये उपकरण अपेक्षाकृत युवा मरीजों की मदद करेगा, जो कोरोना पॉजिटिव होने के कारण सांस की तकलीफ से तो जूझ रहे हैं लेकिन जिनकी हालत दूसरे अधिक उम्र के रोगियों से बेहतर है. इस प्रक्रिया में मरीज को बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया (डॉक्टर मरीज को बेहोशी की दवा देते हैं जिसे अंग्रेजी में एनेस्थीसिया कहते हैं) नहीं दिया जाएगा जैसा कि आमतौर पर ICU में भर्ती मरीजों के साथ होता है. बेहोश करने की इस प्रकिया में न्यूरोमॉस्कुलर ब्लॉकर देते हैं, जिसके भी कई दुष्परिणाम होते हैं. यही वजह है कि एनेस्थीसिया किसी एक्सपर्ट की मदद से ही दिया जाता है.

कैसे काम करता है वेंटिलेटर
ये गंभीर मरीजों को सांस लेने में मदद करता है. आमतौर पर आईसीयू में भर्ती मरीज जो जीवन बचाने वाले उपकरणों पर निर्भर होते हैं, उन्हें वेटिंलेटर से ही सांस दी जाती है. इसमें सांस लेने के लिए खुद कोशिश नहीं करनी होती है. ऑक्सजीन सीधे मरीज के फेफड़े में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है. दूसरी तरफ सी-पैप में मरीज को सांस बाहर निकालने के लिए खुद मेहनत करनी होता है. यानी सी-पैप अपेक्षाकृत स्वस्थ और युवा मरीजों को दिया जा सकता है.

मास्क से हल्का सा भी लीकेज होना अस्पताल स्टाफ के लिए जानलेवा हो सकता है.


क्या है फायदा
Royal United hospital Bath NHS में एनेस्थिशिया और इंटेसिव केयर के प्रोफेसर का कहना है कि इस नई मशीन के जरिए आईसीयू पर दबाव कम हो जाएगा, वहां केवल क्रिटिकल हालत वाले मरीज रखे जाएंगे, जबकि बाकी मरीजों को सी-पैप डिवाइस के साथ सामान्य कोरोना वार्ड में रखा जा सकता है. डॉक्टरों का दावा है कि ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के सफल होने के बाद हफ्तेभर के भीतर ऐसी 1000 सी-पैप मशीनें बना ली जाएंगी. इससे वेंटिलेटर की कमी से जूझ रहे अस्पतालों पर दबाव कम होगा. साथ ही एनेस्थिशिया के कारण होने वाले साइड इफैक्ट जैसे सांस का अटकना, शरीर में जकड़न और मिचली लगना या उल्टियां होने जैसी परेशानियों से बचाव हो सकेगा.

क्या है डर
इस मशीन पर कई विवाद भी हैं. जैसे Oxford University में इंटेंसिव केयर मेडिसिन के प्रोफेसर Duncan Young के अनुसार जिन मरीजों में कोरोना जैसी खतरनाक सांस की बीमारी है, उनमें Cpap मशीन की सफलता थोड़ी संदिग्ध है. कोरोना संक्रामक बीमारी है, ऐसे में मास्क से हल्का सा भी लीकेज मरीजों की देखभाल कर रहे अस्पताल स्टाफ के लिए जानलेवा हो सकता है.

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First published: April 1, 2020, 12:35 PM IST
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