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प्रशांत महासागर में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद के पैदा हुआ एक नया द्वीप

प्रशांत महासागर का यह होम रीफ ज्वालामुखी (Home Reef Volcano) 16 साल बाद फटा था. (तस्वीरछ NASA Earth Observatory)

प्रशांत महासागर का यह होम रीफ ज्वालामुखी (Home Reef Volcano) 16 साल बाद फटा था. (तस्वीरछ NASA Earth Observatory)

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में मध्य टोंगा द्वीपों के इलाके में समुद्र के अंदर एक ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Erup ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

प्रशांत महासागर के होम रीफ ज्वालामुखी में इसी महीने विस्फोट हुआ था.
इसी राख और मलबे के एक डूबे हुए पहाड़ पर फैलने से द्वीप निकला है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह द्वीप ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह सकेगा.

ज्वालामुखी  की घटना होने के बाद सुनामी, भूकंप, वायुमंडल में प्रदूषण जैसी परिघटनाओं का होना बहुत सामान्य सी बात है. लेकिन इस महीने प्रशांत महासागर के नीचे हुए ज्वालामुखी  विस्फोट (Volcanic Eruption in Pacific Ocean) में एक द्वीप पैदा होने की खबर आई है. मध्य टोंगा द्वीपों (Central Tonga Islands) के बीच महासागर के अंदर एक ज्वालामुखी फूटा और उसी के पास एक डूबे हुए द्वीप पर राख और मलबे फैलने से वह महासागर की सतह के ऊपर भी आ गया. समुद्र के अंदर होम रीफ नाम के पहाड़ (Home Reef Seamount) में इस 16 साल बाद ज्वालामुखी फूटा है. इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने यह भी अनुमान लगाया है कि यह द्वीप ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकेगा.

ज्वालामुखी से निकला पदार्थ
इसी महीने की दस तारीख को होम रीफ में से ज्वालामुखी के फूटने से महासागर के अंदर से ही लावा और  चट्टानों के टुकड़े बाहर निकलने लगे. यह घटना खत्म हो चुके द्वीप के दक्षिण पश्चिम दिशा में 25 किलोमीटर दूर हुई है जिससे महासागर की सतही लहरों पर राख और धुंए का गुबार फैल गया.

6 गुना फूल चुका है द्वीप
धीरे धीरे ज्वालामुखी के राष और अन्य पदार्थ पूरे द्वीप पर फैल गया जो करीब 4000 वर्ग मीटर तक फैला है और कुछ ही दिनों में इसकी ऊंचाई 10 मीटर तक हो गई. टोंगा जियोलॉजिकल सर्विसेस के अधिकारियों ने 20 सितंबर को बताया कि यह ज्वालामुखी प्रस्फोट ज्यादा लंबा नहीं होगा, लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी बताया कि यह द्वीप अपने आकार में छह गुना ज्यादा फूल चुका है जिससे इसका आकार 24 हजार वर्ग मीटर हो चुका है.

शायद ही कदम रख पाए कोई
जिस तरह पश्चिमी मिथक कथाओं  में फीनिक्स जानवर राख में से उबरता है, उसी तरह यह आकृति महासागर से निकल रही है, लेकिन संभवतः यह प्रशांत महासागर में वापस ही डूब जाएगा और शायद ही इस द्वीप कर कोई कदम रख पाए. रोचक बात यह है कि इससे पहले साल 2006 में भी होमरीफ से क नया द्वीप पैदा हुआ था. महासागर की लहरों को इसके शीर्ष को डुबोने में एक साल का समय लग गया था. इस बार यह शीर्ष काफी छोटा है.

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महासागर के अंदर का यह ज्वालामुखी (Volcano) पांच द्वीप पहले ही बना चुका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पांच द्वीप बना चुका है ज्वालामुखी
इस द्वीप का अधिकांश हिस्सा साल 2006 में आए ज्वालामुखी विस्फोट के राख और मलबे से बना है जिससे एक फैली हुई आकृति बनी है. 1852 से ही ने पांच मौकों पर द्वीपों का निर्माण किया है. इनमें से कुछ तो 50 से 70 मीटर तक ऊंचे हैं. 1984 में एक द्वीप में सो एक छोटा लैगून तक विकसित हो गया था.

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भूगर्भीय गतिविधि
प्रशांत महासागर में यह पहाड़ जो छोटी छोटी भूआकृतियां बनाने के लिए जिम्मेदार है, टोंगा-कर्माडेक निम्नीकरण क्षेत्र में आता है जहां दुनिया की कुछ सबसे तेजी से मिलती हुई टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. यहां प्रशांत प्लेट तेजी से कर्माडेक और टोंगा प्लाट के नीचे फिसल रही है. इसकी तर हर साल 24 सेंटीमीटर खिसकने की है जिससे यह दुनिया का दूसरा सबसे गहरा गड्ढा बन रहा है और बहुत ही ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी आर्क भी.

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नासा ने अमेरिका के भूगर्भीय सर्वे के आंकड़ों के आधार पर होम रीफ (Home Reef) की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं. (तस्वीर:Facebook_/Tonga Geological Services, Government of Tonga)

नासा ने जारी की तस्वीरें
टोंगा से न्यूजीलैंड तक फैली समुद्री तल की यह लंबी मेंढ़ वास्तव में पृथ्वी पर पानी के नीचे की सबसे घने ज्वालामुखियों का इलाका है. हाल ही में होम रीफ के ज्वालामुखी विस्फोटों की सैटेलाइट तस्वीरों से इस द्वीप के निर्माण के बारे में पता चला. ये तस्वीरें नासा ने यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के आंकड़ों के आधार पर जारी की हैं.

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नासा ने अपने हालिया प्रेस रिलीज में बताया कि पानी में बादल जैसी आकृति अम्लीय समुद्री पानी के बहुत ज्यादा गर्म गोने की वजह से हुई होगीच. जिसमें राख, ज्वालामुखी चट्टाने आदि मिली हैं. इसकी वजह से पासे क वावायु और हाआपाई इलाकों के रहवासियों और क्षेत्र के ऊपर से उड़ने वाले विमानों के लिए जोखिम कम है. रीफ के आसपास के चार किलोमीटर तक किसी भी तरह की समुद्री गतिविधि पर पाबंदी लगा दी गई है. 25 सितंबर से घटनास्थल से किसी भी तरह की राख या गुबार निकलता नहीं दिख रहा है.

Tags: Earth, Erupting Volcano, Research, Science

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