चंद्रमा पर कितने नुकसानदायक होंगे Radiation, चीनी लैंडर के आंकड़ो ने बताया

चंद्रमा (Moon) पर विकिरण (Radiation) की मात्रा कितना ज्यादा है इसे मापने (Measurement) का काम चीनी लैंडर (Chinese lander) ने किया है.
चंद्रमा (Moon) पर विकिरण (Radiation) की मात्रा कितना ज्यादा है इसे मापने (Measurement) का काम चीनी लैंडर (Chinese lander) ने किया है.

चंद्रमा (Moon) के दूसरी तरफ उतरे चीनी रोवर (Chinese Rover) ने वहां पर आने वाले खतरनाक विकरणों (Hazardous Radiation) को नापकर बताया है कि ये कितने नुकसानदायक हो सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 4:17 PM IST
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दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां अंतरिक्ष, चंद्रमा (Moon) और मंगल (Mars) पर इंसान भेजने के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही हैं.  इसमें सबसे प्रमुख नाम अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा (NASA) का नाम प्रमुख हैं. अंतरिक्ष अनुसंधान में तमाम शोधों के साथ इस बात पर भी शोध चल रहे हैं कि क्या इंसान ऐसी जगहों पर सुरक्षित रह सकता है. हाल ही में वैज्ञानिकों ने बताया है कि चंद्रमा पर जाने वाले यात्रियों का इंटनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के मुकाबले  दो से तीन गुना ज्यादा कॉस्मिक विकरणों (Cosmic Radiation) का सामना करना पड़ेगा.

मोटी दीवार की जरूरत
इस अध्ययन में बताया गया है कि चंद्रमा पर जानने के लिए वहां मोटी दीवार का सुरक्षा की जरूरत होगी. चांद के दूसरे हिस्से में उतरा चीनी लैंडर ने इस तरह के विकिरण के प्रभाव को पहली बार पूरी तरह नापा है. यह जानकारी नासा के लिए बहुत अहम मानी जा रही है क्योंकि दुनिया में अभी वहीं चंद्रमा पर इंसान भेजने की योजना बना रहा है.

चीनी और जर्मन शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन
चीन और जर्मनी की टीम के द्वारा जमा गए आंकड़े अमेरिका के साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. ये आंकड़े चीन की चंद्रमा की देवी के नाम पर रखे गए चांग ई-4 लैंडर ने ये आंकड़े वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराए हैं.



इसके आधार पर तय हो सकते हैं मानदंड
जर्मन स्पेस एजेंसी के मेडिसीन इंस्टीट्यूट के भौतिकविद थॉमस बर्जर ने कहा, “यह एक उपलब्धि की तरह माना जाएगा क्योंकि अब हमारे पास ऐसे आंकड़े हैं जिसके आधार पर हम विकिरणों के मानदंड तय कर सकते हैं और चंद्रमा पर भेजने के पहले लोगों के लिए जोखिम को समझ सकते हैं.

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इस अध्ययन में बताया गया है कि चंद्रमा (Moon) पर विकिरण (Radiation) पृथ्वी (Earth) के मुकाबले दो सौ से हजार गुना ज्यादा है.


कितना भीषण होगा यह विकिरण
जर्मनी के कील में क्रिस्चियन एलबर्चट्स यूनविर्सिटी के रॉबर्ट विमर-स्विनग्रूबर ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियो को पृथ्वी पर जिस तरह का विकिरण झेलना पड़ता है, उसके मुकाबले चंद्रमा पर 200 से एक हजार गुना ज्यादा विकिरण झेलना होगा. यह ट्रांस एटलांटिक एयरलाइंस के यात्रियों मिलने वाले विकिरणों से 5 से 10 गुना ज्यादा होगा.

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कैंसर सबसे प्रमुख जोखिम
अपने इमेल में विमर-स्विनग्रूबर ने कहा कि कैंसर सबसे प्रमुख जोखिम है. इंसान इस तरह के विकिरणों के स्तर के लिए नहीं बना है और चंद्रमा पर रहते हुए उसे इसका बचाव के बारे में सोचना हो. पूरे चंद्रमा पर इस तरह के विकिरण एक समान ही होंगे, लेकिन गहरे क्रेटर्स की दीवारों के पास इनका प्रभाव नहीं होगा. अहम बात यह है कि आप आकाश को जितना कम देखेंगे उतना ही बेहतर होगा क्यों कि विकिरण का मूल स्रोत वही है.

नासा लगा चुका है इस तरह का अनुमान
विमर-स्विनग्रूबर का कहना है कि विकिरणों क स्तर वहीं पाए गए हैं जैसा कि मॉडल्स ने अनुमान लगाया था. हॉस्टन के जॉनसन स्पेसे सेंटर के स्पेस स्पेस रेडिएशन विशेषज्ञ कैरी ली का कहना है कि चांग ई-4 ने जिस तरह के स्तर नापे हैं वे उन्हीं मापनों से मेल खाते हैं जो नासा के ऑर्बिटर पर लगे डिटेक्टर ने एक दशक तक चंद्रमा का चक्कर लगाते हुए पता लगाए थे.

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नासा (NASA) अपने आर्टेमिस मिशन (Artemis) के तहत चंद्रमा पर 2024 में दो लोगों को भेजने की तैयारी में हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कितनी मोटी होनी चाहिए दीवार
जर्मन शोधकर्ताओं का कहना है कि चंद्रमा पर वहां कि मिट्टी से बने सुरक्षा स्थल कई दिनों तक कायम रह सकते हैं, दीवारों कम से कम 80 सेमी की होना चाहिए. वहां मिट्टी भी कॉस्मिक विकिरणों से अंतर्करिया कर अपना खुद का विकिरण भी उत्सर्जित करेगी.

जानिए चंद्रमा पर 2024 में इंसान भेजना का नासा का क्या है प्लान

नासा ने हाल ही में अपने आर्टेमिस अभियान की रूपरेखा सार्वजनिक की है जिसके तहत वह साल 2024 तक  चंद्रमा पर अगले पुरुष और अगली महिला को भेजने की तैयारी कर रहा है. दोनों यात्री करीब एक सप्ताह का समय वहां बिताएंगे. इसके अलावा नासा चंद्रमा पर एक बेस कैम्प भी बनाने की तैयारी कर रहा है और उसका इरादा अगले दशक में मंगल पर भी इंसान भेजने का है.
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