Milky Way के केंद्र पर स्थित ब्लैकहोल की बनेगी तस्वीर, इस मॉडल से मिलेगी मदद

Milky Way के केंद्र पर स्थित ब्लैकहोल की बनेगी तस्वीर, इस मॉडल से मिलेगी मदद
ब्लैकहोल की तस्वीर के लिए हुए अध्ययन ने उसके बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां दी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने हमारे गैलेक्सी (Milky Way) के केंद्र के ब्लैकहोल (Black Hole) की तस्वीर (Image) बनाने के लिए उसके आसपास की घटनाओं का अध्ययन किया.

  • Share this:
नई दिल्ली: सुपरमासिव ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) अंतरिक्ष की लगभग हर गैलेक्सी में के केंद्र में होता है. हमारी मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र में भी है. इसका नाम है सैजीटैरियस A* (Sagittarius A*) खगलोविद लंबे समय से इसका अध्ययन कर रहे हैं.  ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने इसकी तस्वीर लेने की कोशिश में वैज्ञानिकों ने जो ब्लैकहोल के बारे में कई नई जानिकारियां हासिल की हैं.

तस्वीर के लिए ब्लैकहोल को समझना जरूरी
इतने विशालकाय पिंड की तस्वीर लेने के लिए यह समझना जरूरी है कि उसके आसपास क्या हो रहा है. इसकी वजह यह है कि तस्वीर ब्लैकहोल और उसके आसपास की चीजों की जानकारी के आंकड़ों से बनगी. यह बहुत ज्यादा चुनौती पूर्ण है क्योंकि इसमें कई स्तरों पर चीजों को नापने की भूमिका होगी. इस शोध को एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित करने वाले सांता बारबरा के काव्ली इंस्टीट्यूट फॉर थियोरिटिकल फिजिक्स के शोधकर्ता सीन रेसलर ने कहा कि यही वह सबसे बड़ी बाधा है जिसे हमें पार करना है. वे सैजीटेरियस A* की आसपास की एक्रीशन डिस्क की मैग्नेटिक विशेषताओं की पड़ताल कर रहे हैं.

तो क्या पता लगाया गया
रेसलर और उनके साथियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या ब्लैकहोल में गिरने वाले पदार्थों की वजह से बनने वाली मैग्नेटिक फील्ड की स्थिति वहां तक पहुंच सकती है जब उसमें गिरने वाले पदार्थ गिरना बंद हो जाए. इस अवस्था को वैज्ञानिक मैग्नेटिकली अरेस्टेड स्थिति कहता हैं. इस सवाल के जवाब के  लिए पास के तारे सहित सभी सिस्टम को सिम्यूलेट करने की जरूरत होगी. यानि एक कम्प्यूटर प्रोग्राम के जरिये आंकड़ों की सहायता से नतीजे निकालना था.



Black Hole
ब्लैक होल प्रकाश की गति से भी ज्यााद तेज गति से पदार्थ फेंकता दिखाई देता है.


कितना बड़ा है यह माजरा
यह बहुत बड़ा सिस्टम होगा. ब्लैकहोल का इवेंट होराइजन, यानि वह जगह जिसके बाद से कुछ वापस नहीं आ सकता, यही दूरी कम से कम 40 से 80 लाख मील की दूरी है जबकि उसका निकटतम तारा ही 2 खरब मील दूर होगा यानि जितना हमारे सूर्य के सबसे नजदीक के तारे की दूरी. रेसलर ने कहा, “आपको इसने बड़े मापन स्तर पर गिरते हुए पदार्थ को ट्रैक करना होगा और साथ ही बहुत छोटे स्तर पर भी. यह सब कुछ केवल एक ही सिम्यूलेशन में करना बहुत चुनौती पूर्ण होगा.” यह कुछ सेकंड्स के साथ ही हजारों सालों के स्तर पर एक साथ करना होगा.

तीन अलग समय के स्तर पर किए सिम्यूलेशन
यह शोधपत्र छोटे स्तर के सिम्यूलेशन, जो कि सैद्धांतिक आधार पर हैं, को बड़े स्तर के सिम्यूलेशन से जोड़ता है. इसमें वास्तविक अवलोकनों के आधार पर परिवर्तन किए जा सकते हैं. इसके लिए रेसलर ने इस काम को तीन स्कोलों  के मॉडलों में बांटा. पहले सिम्यूलेशन में ब्लैकहोल के आसपास के तारों के आंकड़ो को शामिल गकिया गया. ब्लैकहोल की गतिविधि में 30 बड़े तारों की बड़ी भूमिका है जो बहुत अधिक मात्रा में पदार्थ फेंक रहे हैं. एक ही तारे से निकलने वाली सामग्री उससे काफी ज्यादा है जो उतने ही समय में ब्लैक होल में समाता है. इस प्रक्रिया में दस लाख साल लगते हैं, लेकिन उसके बाद तारे स्थिर हो जाते हैं.
धीरे धीरे समय कम करते पहुंचे इवेंट होराइजन पर
इसी तरह रेसलर ने इन तारों की कक्षाओं का हजार सालों के समय पर सिम्यूलेशन किया और उसके नतीजों का उपयोग कर मध्यम दूरी के सिम्यूलेशन में उपयोग किया जो कम समय के लिए था . इस तरह से आते आते रेसलर इवेंट होराइजन तक आ गए जहां कोई भी गतिविधि केवल कुछ सेकंड में ही हो जाती है. रेसलर का कहना है कि इस तकनीक ने उनकी उम्मीदों से बढ़ कर शानदार काम किया.

Black hole
ब्लैकहोल के बारे में अध्ययन करना बहुत ही मुश्किल होता है. (सांकेतिक फोटो)


और फिर नतीजों ने चौंकाया
इन नतीजों से पता चला कि सैजीटेरियस A* मैग्नेटिकली अरेस्टेड अवस्था में पहुंच सकता है. यह एक चौंकाने वाली बात थी क्योंकि मिल्की वे का केंद्र बहुत ही ज्यादा बड़ा है. आमतौर पर मैग्नेटिकली अरेस्टेड ब्लैकहोल बहुत ही ज्यादा मात्रा में और बहुत ही तेज गति से ऊर्जा के जेट फेंकते हैं. लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों को इस तरह के जेट सैजीटेरियस A* से देखने को नहीं मिले हैं.

ब्लैकहोल की तस्वीर बना चुके वैज्ञानिकों की भी शोध में दिलचस्पी
टीम ने सिम्यूलेशन का उपयोग तस्वीरें बनाने के लिए किया जिनकी ब्लैकहोल के वास्तविक अवलोकनों से तुलना की जा सके. पिछले साल ब्लैक होल की पहली तस्वीर बनाने वाले इवेंट होराइजन टेलीस्कोप के वैज्ञानिकों ने इस सिम्यूलेशन के आंकड़ों की मांग की है जिससे उन्हें सैजीटेरियस A* की तस्वीर बनाने में मदद मिल सके. तस्वीर बनने में कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन रेसलर का शोध सैजीटेरियस A*  ब्लैकहोल की गतिविधि को समझने में काफी मददगार हो सकता है.

यह भी पढ़ें:

अनोखे शोध ने बताया, अपनी गैलेक्सी में और कितने हैं हमारे जैसे ‘बुद्धिमान जीवन’

सुशांत के ट्विटर प्रोफाइल पर लिखा ये वाक्य है अनूठा, जानिए क्या है इसका मतलब

क्या पृथ्वी की गहराइयों में हुई थी जीवन की शुरुआत, इस प्रयोग ने दिए संकेत
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज